दिल्ली साइबर पुलिस ने फ़र्ज़ी एक्सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, 18 लोग गिरफ़्तार

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 25-06-2026
Delhi Cyber Police bust fake export call centre, 18 held
Delhi Cyber Police bust fake export call centre, 18 held

 

नई दिल्ली 
 
नई दिल्ली ज़िले के साइबर पुलिस स्टेशन ने एक फ़र्ज़ी एक्सपोर्ट कंसल्टेंसी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने विदेशी खरीदारों और एक्सपोर्ट सर्टिफ़िकेशन दिलाने के बहाने एक्सपोर्टर्स के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में 18 लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिनमें कथित मास्टरमाइंड भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों से मिली NCRP साइबर धोखाधड़ी की कई शिकायतों की जांच के दौरान इस रैकेट का पता चला। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फ़र्म के प्रतिनिधि बनकर कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से एक्सपोर्ट ऑर्डर दिलाने में मदद का वादा किया। पीड़ितों को शुरू में 5,000 रुपये का रजिस्ट्रेशन या टोकन अमाउंट देने के लिए मनाया गया। इसके बाद उनसे एक्सपोर्ट सर्विस पैकेज के लिए 19,780 रुपये और तथाकथित ग्लोबल GAP/ट्रस्ट सर्टिफ़िकेशन व एक्सपोर्ट से जुड़ी अन्य औपचारिकताओं के लिए 41,300 रुपये जैसी अतिरिक्त रकम ट्रांसफर करवाई गई।
 
विश्वसनीयता बनाने के लिए, आरोपियों ने कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया और अलग-अलग देशों के विदेशी खरीदारों का रूप धरा। पीड़ितों को बनावटी बातचीत दिखाई गई और भरोसा दिलाया गया कि एक्सपोर्ट ऑर्डर की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, पेमेंट मिलने के बाद आरोपियों ने या तो जवाब देना बंद कर दिया या आगे बातचीत करने से बचते रहे, जिससे शिकायतकर्ताओं को गलत तरीके से नुकसान हुआ।
तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल सबूत और लगातार जांच के आधार पर, नई दिल्ली ज़िले के साइबर पुलिस स्टेशन की एक समर्पित टीम ने SHO/साइबर पुलिस स्टेशन और ACP/कनॉट प्लेस की देखरेख में दिल्ली में एक जगह पर छापा मारा।
 
ऑपरेशन के दौरान, साइबर धोखाधड़ी की गतिविधियों में शामिल एक फ़र्ज़ी कॉल सेंटर का पता चला और बाद में उसका भंडाफोड़ किया गया। पुलिस ने कॉल सेंटर के कथित मास्टरमाइंड और मालिक प्रदीप कुमार के साथ-साथ टेली-कॉलिंग और धोखाधड़ी से जुड़े कामों में शामिल 18 लोगों को गिरफ़्तार किया। एक अन्य आरोपी, सम्मी कुमार गिरी, और 16 टेली-कॉलर्स (14 महिलाएं और 2 पुरुष) को BNSS की धारा 35(3) के तहत पाबंद किया गया है।
 
छापेमारी के दौरान 20 मोबाइल फ़ोन, 35 सिम कार्ड, 6 लैपटॉप, 9 CPU और एक डेबिट कार्ड बरामद किए गए। ज़ब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल सबूतों का अभी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि अन्य पीड़ितों, साथियों और जुड़े हुए साइबर धोखाधड़ी के मामलों की पहचान की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस सिंडिकेट से साइबर धोखाधड़ी की 19 शिकायतें जुड़ी हैं, जिनमें कुल 10,57,780 रुपये की धोखाधड़ी हुई है। नेटवर्क के अन्य सदस्यों और अपराध से हुई कमाई का पता लगाने तथा धोखाधड़ी के पूरे दायरे का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने, अपराध से हुई कमाई का पता लगाने और पीड़ितों से ठगी गई कुल रकम का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं। जांच चल रही है।