अर्सला खान/नई दिल्ली
मुहर्रम के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए कुछ वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन वीडियो में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच भाईचारे, सम्मान और सौहार्द की झलक देखने को मिल रही है। जहां एक ओर मुहर्रम का पर्व इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर इस अवसर पर सामने आईं कुछ तस्वीरों ने भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को भी उजागर किया है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा से वायरल हुए एक वीडियो में मुहर्रम के जुलूस में शामिल लोगों पर बड़े प्रेम और सम्मान के साथ फूल बरसा रहे हैं. यह दृश्य लोगों को खासा प्रभावित कर रहा है। इसी तरह vikram_vandana_balmiki नामक सोशल मीडिया यूजर ने भी एक वीडियो साझा किया है, जिसमें हिंदू भाई दुलदुल को भोजन कराते नजर आ रहे हैं। वीडियो में धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सम्मान और प्रेम का संदेश दिखाई देता है।
वहीं जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक लाल चौक से भी एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में मुहर्रम के जुलूस के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ नजर आ रहे हैं। जुलूस में शामिल लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए कर्बला के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कश्मीर की साझा संस्कृति में विभिन्न समुदायों की सहभागिता कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।
इन वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने इसे "भारत की असली पहचान" बताया, तो कई लोगों ने लिखा कि ऐसे दृश्य समाज में प्रेम और भाईचारे को मजबूत करते हैं। कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि नफरत फैलाने वाली खबरों के बीच इस तरह के वीडियो उम्मीद जगाते हैं और यह बताते हैं कि आम लोग आज भी एक-दूसरे के धर्म और परंपराओं का सम्मान करते हैं।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि इमाम हुसैन का संदेश इंसानियत, न्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का है, इसलिए उनकी शहादत को याद करने में सभी समुदायों की भागीदारी स्वाभाविक है। वहीं कुछ लोगों ने इन वीडियो को साझा करते हुए कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे अवसर इस ताकत को और मजबूत करते हैं।
मुहर्रम की सबसे बड़ी सीख कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना से मिलती है, जहां इमाम हुसैन ने सत्य और न्याय के लिए अपना बलिदान दिया था।
यही कारण है कि उनकी शहादत का संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं माना जाता।

गोंडा से लेकर श्रीनगर तक सामने आए ये दृश्य इसी संदेश को जीवंत करते हैं और बताते हैं कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत, सम्मान और भाईचारा सभी को जोड़ने का काम करते हैं।
सोशल मीडिया पर इन वीडियो को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रियाएं इस बात का संकेत हैं कि समाज में आज भी सद्भाव, एकता और आपसी सम्मान की भावना मजबूत है। मुहर्रम के अवसर पर सामने आई ये तस्वीरें न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति और सामाजिक एकता की भी एक खूबसूरत मिसाल हैं।
