असम का यूसीसी विधेयक मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का परोक्ष प्रयास: ओवैसी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 26-05-2026
Assam's UCC bill a veiled attempt to impose Hindu law on Muslims: Owaisi
Assam's UCC bill a veiled attempt to impose Hindu law on Muslims: Owaisi

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने असम विधानसभा में पेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक की आलोचना करते हुए इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का ‘‘परोक्ष प्रयास’’ बताया है।

ओवैसी ने दावा किया कि उत्तराधिकार, विरासत और तलाक के मामलों में हिंदू सिद्धांतों को थोपा जा रहा है।
 
हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने सोशल मीडया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘केवल हिंदू संस्कृति की रक्षा की जा रही है जबकि मुसलमानों को इन तथाकथित समान नियमों का पालन करना होगा।’’
 
असम सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर सोमवार को एक विधेयक विधानसभा में पेश किया जिसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और सह-जीवन (लिव-इन) संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रावधान है।
 
विधेयक में हालांकि कहा गया है कि यह असम में निवास करने वाली किसी भी अनुसूचित जनजाति (एसटी) पर लागू नहीं होगा।
 
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधेयक के ‘उद्देश्य और कारणों के विवरण’ में कहा, ‘‘इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सह-जीवन (लिव-इन) संबंध से संबंधित कानूनों को एकीकृत और सरल बनाना है।’’
 
कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए विधेयक में विवाह और तलाक के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है जो पति-पत्नी के लिए भरण-पोषण, विरासत और अन्य कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
 
उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य उत्तराधिकार कानूनों का आधुनिकीकरण करना है ताकि संपत्ति का निष्पक्ष और समान वितरण किया जा सके।
 
ओवैसी ने कहा कि असम की समान नागरिक संहिता ‘‘कतई समान’’ नहीं है।
 
उन्होंने सोमवार को कहा, ‘‘यह जनजातीय समुदायों को समान नागरिक संहिता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखती है। संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत प्रत्येक समुदाय को अपनी संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार है लेकिन केवल जनजातीय समुदायों की स्वायत्तता की ही रक्षा क्यों की जा रही है? यह ऐसा कानून थोपना है जिसे कोई नहीं चाहता। संविधान सभा ने अनिवार्य समान नागरिक संहिता की कल्पना नहीं की थी।’’