आप अंग्रेजी सीखें, मगर दिल में अपने मादरी भाषा को रखिएः विकास दिव्यकीर्ति

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] • 2 Months ago
Vikas Divyakirti
Vikas Divyakirti

 

मोहम्मद अकरम / नई दिल्ली

एक भाषा आत्मा की होती है और दूसरा भाषा दिल की होती है. इस लिए आप लोग अंग्रेजी सीखें, मगर दिमाग से सीखे, आपकी जो भी मादरी भाषा हैं, उसे दिल में जगह दें. अब वक्त आ गया है कि उर्दू को महबूब की जुल्फों, महबूब की बिस्तरों से बाहर ले आने की. अभी तक उर्दू सिर्फ शेर व शायरी की जबान है. अब उर्दू को साइंस की जबान बनाया जाए. इसे ख्वातीन-किचन तक पहुंचाया जाए. ये बातें दृष्टि आईएएस कोचिंग इंस्टीट्यूट के संस्थापक और शिक्षक डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने जश्न ए रेख्ता में कहीं.

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डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने आगे कहा कि एक भाषा को बनाने में हजारों लोगों और कई सौ साल लगते हैं. इसलिए उर्दू के विकास को दिल से लगाएं. मेरा पसंदीदा शायर साहिर लुधियानवी हैं, जिन्होंने उर्दू को जमाने के मुकाबले में शायरी की है.

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विकास दिव्यकीर्ति ने नई पीढ़ी के हवाले से कहा कि लोग अंग्रेजी की तरफ दिन-रात लगे हैं. मगर अपनी मादरी जबान को छोड़ रहे हैं. 

लंदन में पढ़ रहे बेटे को समझाया

उन्होंने अपने बेटे के हवाले से कहा कि मेरा बेटा लंदन में 12वीं क्लास में पढ़ाई करता है, जब मुझे पता चला कि उन्होंने ऑप्शनल जबान के तौर पर विदेशी भाषा को चुना है, तो मैंने उसे समझाया, तब उसने हिन्दी भाषा को लिया हैं. अब वह शायरी भी करता है. 

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किसी के चाहने से कोई भी भाषा खत्म नहीं होता है, जावेद अली के हवाले उन्होंने कहाः

उर्दू को मिटा देंगे इस जहां से

कमबख्त ने ये बात भी उर्दू में कही है

डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि हमें इस बात का अफसोस है कि उर्दू को सिर्फ बोलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. नई नस्ल में उर्दू की हालत अच्छी नहीं है. इस हवाले से राशिद आरफी ने अपने बेटे के नाम एक खत लिखा कि कहीं मेरा बेटा अपनी मादरी भाषा को न भूल जाएं.

मेरी अल्लाह से बस इतनी दुआ है ‘राशिद’

मैं जो उर्दू में वसीयत लिखूँ बेटा पढ़ ले.


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