त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के सोनामुरा के एक छोटे से गांव, दाउदारानी सिद्दिकिया हाई स्कूल से अपनी शिक्षा प्राप्त करने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला ज़कारिया ने हाल ही में त्रिपुरा पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है. इस सफलता ने न केवल उनके व्यक्तिगत सामर्थ्य को साबित किया है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था में मदरसा शिक्षा के महत्व को भी पुनः रेखांकित किया है.
मोहम्मद अब्दुल्ला ज़कारिया का यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं. एक समय था जब मदरसा शिक्षा को केवल धार्मिक शिक्षा से जोड़ा जाता था, लेकिन अब्दुल्ला ने यह साबित कर दिया कि मदरसों से भी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त की जा सकती है.
37 वर्षीय ज़कारिया ने 100 में से 68.8 अंक हासिल कर इस परीक्षा में टॉप 30 में अपनी जगह बनाई और यह साबित कर दिया कि अगर इच्छा हो, तो किसी भी प्रकार की शिक्षा प्रणाली से सफलता प्राप्त की जा सकती है.
उनकी सफलता की कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि उनके परिवार की कड़ी मेहनत का भी परिणाम है. ज़कारिया के पिता, नूरुल इस्लाम, एक उच्च-शिक्षित अरबी शिक्षक हैं, और उनकी माता, एक प्रेरक महिला, हमेशा उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को समर्थन देती आई हैं.
अब्दुल्ला ने मदरसा में अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और फिर बाद में आम स्कूल में विज्ञान की शिक्षा ली. इसके बाद उन्होंने अपनी मेडिकल शिक्षा पूरी की और 2018 में त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला लिया.
ज़कारिया के अनुसार, त्रिपुरा के सरकारी मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता किसी भी सरकारी स्कूल से कम नहीं है. यहाँ क़ुरान, हदीस और अरबी के साथ-साथ सामान्य विषयों में भी उच्च स्तर की शिक्षा दी जाती है.
उन्होंने यह भी बताया कि मदरसा शिक्षा में केवल धार्मिक ज्ञान नहीं, बल्कि छात्रों का चरित्र निर्माण और शिष्टाचार पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है.
मोहम्मद ज़कारिया की सफलता ने यह भी साबित किया कि मदरसों से प्राप्त शिक्षा केवल सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को एक मजबूत और व्यापक शिक्षा देती है, जो उन्हें किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद करती है.
उन्होंने यह भी कहा कि "देशभक्ति केवल राष्ट्रीय ध्वज लहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सेवा और समाज की भलाई के लिए काम करना ही असली देशप्रेम है."
अब्दुल्ला ज़कारिया के परिवार में उनके तीन भाई-बहन हैं, जिनमें से उनकी बड़ी बहन जूनियर इंजीनियर हैं और छोटी बहन भी अब मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं. ज़कारिया अब भविष्य में एक बाल रोग विशेषज्ञ बनने का सपना देख रहे हैं, और इसके लिए वे एमडी कोर्स करने की योजना बना रहे हैं.
मोहम्मद अब्दुल्ला ज़कारिया की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह त्रिपुरा के मदरसा शिक्षा प्रणाली की उत्कृष्टता को भी उजागर करती है.
उनका यह सफर और उनकी सोच समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देती है, और यह संदेश देता है कि मदरसा शिक्षा से भी किसी छात्र के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.