तुलसी गैबार्ड ने अमेरिकी खुफिया प्रमुख पद से इस्तीफे का ऐलान किया

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 23-05-2026
Tulsi Gabbard announces resignation from US intelligence chief post.
Tulsi Gabbard announces resignation from US intelligence chief post.

 

 

वॉशिंगटन

अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक Tulsi Gabbard ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उन्होंने अपने पति की गंभीर बीमारी को इस फैसले की वजह बताया है। तुलसी गैबार्ड का इस्तीफा 30 जून 2026 से प्रभावी होगा।

सोशल मीडिया पर जारी एक भावुक संदेश में तुलसी गैबार्ड ने कहा कि उनके पति Abraham Williams को हाल ही में एक दुर्लभ प्रकार के अस्थि कैंसर का पता चला है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में उन्हें अपने सार्वजनिक दायित्वों से पीछे हटकर पति के साथ रहना होगा।

तुलसी ने अपने संदेश में लिखा कि परिवार इस समय एक कठिन लड़ाई से गुजर रहा है और वह चाहती हैं कि अपने पति के उपचार और मानसिक सहारे के लिए पूरी तरह उनके साथ मौजूद रहें।

उनके इस्तीफे की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने तुलसी गैबार्ड के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासन में शानदार भूमिका निभाई है और उनकी कमी महसूस की जाएगी।

ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि अब्राहम विलियम्स के जल्द स्वस्थ होने को लेकर उन्हें पूरा विश्वास है। उन्होंने यह भी बताया कि तुलसी के पद छोड़ने के बाद वर्तमान उप निदेशक आरोन लुकास को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक का कार्यभार सौंपा जाएगा।

तुलसी गैबार्ड का राजनीतिक सफर अमेरिका की राजनीति में काफी चर्चा का विषय रहा है। वह पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख नेताओं में शामिल थीं। हालांकि 2022 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वह रिपब्लिकन पार्टी के करीब आ गईं और डोनाल्ड ट्रंप का खुलकर समर्थन किया।

ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई थी। पूर्व सैन्य अधिकारी रह चुकी तुलसी गैबार्ड अपनी स्पष्ट राय और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती रही हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी में रहते हुए उन्होंने कई बार अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना की थी। उन्होंने ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले का विरोध किया था और रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति Joe Biden और नाटो की नीतियों पर भी सवाल उठाए थे।एक पुराने इंटरव्यू में तुलसी ने कहा था कि अगर अमेरिका और नाटो रूस की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेते, तो यूक्रेन युद्ध टाला जा सकता था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तुलसी गैबार्ड प्रशासन के कुछ सैन्य अभियानों को लेकर भी असहमत थीं। बताया जाता है कि वे जनवरी में निकोलस मादुरो से जुड़े कथित अभियान और फरवरी में ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं थीं।

तुलसी गैबार्ड के इस्तीफे को अमेरिकी राजनीति और सुरक्षा तंत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनके जाने से ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल अमेरिकी राजनीतिक हलकों में तुलसी गैबार्ड के इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा जारी है।