आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इजराइल की सरकार ने उन सैकड़ों फ्लोटिला (जहाजों का विशाल काफिला) कार्यकर्ताओं को रिहा कर निर्वासित कर दिया, जिन्होंने गाज़ा पर इजराइल की नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी।
कार्यकर्ताओं के साथ इजराइल में हुए बर्ताव को लेकर अनेक देशों में भारी आक्रोश फैल गया और कई देशों ने अपनी चिंताएं जताने के लिए इजराइली राजदूतों को तलब किया।
करीब 420 कार्यकर्ता इजराइल से विमानों के जरिए तुर्किये के लिए रवाना हुए और वे बृहस्पतिवार शाम इस्तांबुल पहुंचे। स्लेटी रंग के स्वेटसूट और अरब काफतान पहने ये कार्यकर्ता जब विमान से उतरे तो उन्होंने दो उंगलियों से सलाम किया और ‘‘फलस्तीन को आजाद’’ करो के नारे लगाए।
तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी ‘अनादोलु’ ने अपनी एक खबर में कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया जाएगा।
इजराइल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि फ्लोटिला के ‘‘सभी विदेशी कार्यकर्ताओं’’ को निर्वासित कर दिया गया है।
इजराइल में अरब अल्पसंख्यकों के अधिकारों के कानूनी केंद्र ‘अदाला’ ने कहा कि इजराइली नागरिकता वाले एक कार्यकर्ता ज़ोहर रेगेव को अदालत में सुनवाई के बाद रिहा कर दिया गया।
उन पर इजराइल में अवैध प्रवेश और अवैध रूप से ठहरने के आरोप लगाए गए थे। रेगेव पहले भी गाज़ा जाने वाले फ्लोटिला अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं।