टॉलीवुड में बांग्लादेशी कलाकारों के काम पर छिड़ी है नई बहस

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-05-2026
A new debate has erupted in Tollywood over the work of Bangladeshi artists.Chunky Pandey in a Bangladeshi film
A new debate has erupted in Tollywood over the work of Bangladeshi artists.Chunky Pandey in a Bangladeshi film

 

नौशाद अख्तर 

कोलकाता के फिल्म उद्योग टॉलीवुड में इन दिनों एक नई हलचल देखी जा रही है। भारत और बांग्लादेश के कलाकारों के बीच का पुराना रिश्ता अब एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। पाकिस्तानी कलाकारों की तरह क्या बांग्लादेशी कलाकारों पर भी प्रतिबंध लगेगा, यह सवाल बंगाल के सियासी और फिल्मी गलियारों में तैर रहा है। चंकी पांडेय जैसे अभिनेताओं ने कभी बांग्लादेशी सिनेमा में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। वहीं मिथुन चक्रवर्ती को लेकर भी सीमा पार अलग तरह के हालात बनते दिखे हैं। हाल के समय में फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' और पश्चिम बंगाल के चुनावों में बांग्लादेशी कलाकारों की भूमिका ने इस पूरे मामले को एक नया रंग दे दिया है।

इस पूरे विवाद की एक बानगी हाल ही में कोलकाता में देखने को मिली। भाजपा के एक नवनिर्वाचित विधायक और अभिनेता रुद्रनील घोष ने टॉलीवुड के तकनीशियनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कोलकाता के टेक्नीशियन स्टूडियो के कई बड़े नाम शामिल हुए।

फिल्म निर्देशक परमब्रता चटर्जी, श्रीजीत मुखर्जी और इंद्रदीप दासगुप्ता जैसी हस्तियों की मौजूदगी में तकनीशियनों ने अपना दर्द साझा किया। कोलकाता के तकनीशियनों का आरोप है कि जब वे काम के सिलसिले में बांग्लादेश जाते हैं तो वहां उनके साथ सही व्यवहार नहीं होता है।

उनका कहना है कि वहां उन्हें अपमानित होना पड़ता है। इसके उलट बांग्लादेश के कलाकार कोलकाता में आकर पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करते हैं। तकनीशियनों ने इस स्थिति पर गहरा गुस्सा जताया है और इसे पूरी तरह से अनुचित ठहराया है।

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टाॅलीवुड में सर्वाधिक फीस लेने वाली बांग्लादेशी अभिनेत्रियां

तकनीशियनों की इन शिकायतों पर विधायक रुद्रनील घोष ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक के नाते हमारे लोगों का ऐसा अपमान बहुत दुखद है। उन्होंने भरोसा दिया कि वे इस पूरे मामले की जानकारी केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि बांग्लादेशी कलाकारों के भारत में काम करने का अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर ही लिया जा सकता है। भारत के रिश्ते बांग्लादेश के साथ पाकिस्तान जैसे नहीं हैं। हमारे संबंध काफी सौहार्दपूर्ण रहे हैं। बांग्लादेश में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो भारत से बेहद प्यार करता है। कुछ मुट्ठी भर चरमपंथी ताकतों की वजह से पूरे देश को एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता है। फिर भी तकनीशियनों के साथ जो भी घटनाएं हुई हैं उनकी गंभीरता से जांच की जाएगी।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक बदलावों के बाद टॉलीवुड के फिल्म संगठनों में भी काफी तनाव देखा जा रहा है। फेडरेशन ऑफ सिने टेक्नीशियन्स वर्कर्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया यानी एफसीटीडब्लूईआई ने हाल ही में बंगाली फिल्म निर्देशक राहुल मुखर्जी पर तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया था।

राहुल मुखर्जी पर आरोप था कि उन्होंने फेडरेशन की अनुमति लिए बिना बांग्लादेशी वेब सीरीज 'लोहू' की शूटिंग की थी। पिछले साल भी इस सीरीज का प्रोडक्शन कुछ दिनों के लिए रोकना पड़ा था। फेडरेशन का कहना था कि निर्देशक ने विदेशी प्रोडक्शन में काम करने वाले स्थानीय तकनीशियनों को ज्यादा फीस देने के नियमों की अनदेखी की थी। राहुल मुखर्जी ने इन सब के बावजूद बांग्लादेशी तकनीशियनों के साथ काम जारी रखा था जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।

टॉलीवुड में इस तरह का तनाव अक्सर फेडरेशन के सख्त नियमों के कारण पैदा होता है। फेडरेशन का नियम है कि किसी भी विदेशी या सीमा पार के प्रोजेक्ट में स्थानीय तकनीशियनों का एक तय कोटा होना जरूरी है। इसके साथ ही विदेशी काम के लिए मानदेय और वर्क परमिट के नियम भी बेहद कड़े हैं। जब भी कोई निर्देशक इन नियमों को दरकिनार कर बांग्लादेशी फिल्मकारों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करता है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ता है।

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भाजपा के  नवनिर्वाचित विधायक और अभिनेता रुद्रनील घोष

इस विवाद का एक दूसरा पहलू राजनीतिक भी रहा है। साल 2019के लोकसभा चुनाव के दौरान बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद को तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करते हुए देखा गया था। भारत के स्थानीय चुनावों में एक विदेशी कलाकार के इस तरह हिस्सा लेने पर विपक्षी दलों ने तीखा विरोध दर्ज कराया था।

इसके बाद भारत के गृह मंत्रालय ने सख्त कदम उठाते हुए उनका वीजा रद्द कर दिया था और उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इस घटना ने फिल्मी सहयोग के बीच राजनीतिक दखल के खतरे को साफ कर दिया था।

बांग्लादेश में हुए हालिया तख्तापलट और राजनीतिक अस्थिरता के बाद स्थितियां और भी पेचीदा हो गई हैं। वहां अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों का असर भारत के लोगों की भावनाओं पर भी पड़ा है। इसका सीधा उदाहरण खेल के मैदान पर भी देखने को मिला जब आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स से एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को बाहर का रास्ता देखना पड़ा।

टॉलीवुड की यह समस्या केवल बाहरी कलाकारों तक सीमित नहीं है। यह पूरी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के भीतर की व्यवस्थागत कमियों को भी उजागर करती है। हाल के दिनों में शूटिंग सेट पर सुरक्षा के मुद्दों, फेडरेशन की कथित तानाशाही और निर्देशकों की रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर कई बार काम ठप हो चुका है।

तकनीशियन और निर्देशकों के बीच का यह आपसी टकराव अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आड़े आने लगा है। दोनों देशों के फिल्म निर्माता और कलाकार अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि संबंधित सरकारी विभाग और मनोरंजन उद्योग के संगठन इस दिशा में क्या अंतिम नीति तय करते हैं।