वॉशिंगटन।
संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हजारों नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए एक व्यापक बचाव अभियान शुरू किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद यह मानवीय अभियान शुरू किया गया है।
कतर स्थित मीडिया संस्थान अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में 11,000 से अधिक नाविक लंबे समय से फंसे हुए हैं। इन नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र, क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग के बीच समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने एक बयान में कहा कि यह बचाव अभियान अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा, "इस अभियान को ईरान, ओमान, संयुक्त राज्य अमेरिका, क्षेत्र के अन्य तटीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग के साथ घनिष्ठ समन्वय के जरिए संचालित किया जा रहा है।"
डोमिंगुएज़ ने बताया कि नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी सुरक्षा गारंटी प्राप्त कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित नौवहन के लिए अनुकूल वातावरण की पुष्टि भी कर दी गई है।
गौरतलब है कि इसी वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद ईरान ने रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस कदम के कारण सैकड़ों वाणिज्यिक जहाज और हजारों नाविक समुद्र में फंस गए थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ा था।
हालांकि, पिछले सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं। समुद्री यातायात की निगरानी करने वाली कंपनी केपलर के अनुसार, सोमवार को कम से कम 36 वाणिज्यिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। युद्ध शुरू होने के बाद एक दिन में गुजरने वाले जहाजों की यह सबसे बड़ी संख्या बताई जा रही है।
ओमान के रक्षा मंत्रालय ने भी बचाव अभियान को लेकर जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा, ताकि समुद्र में भीड़भाड़ और जहाजों के बीच टक्कर की आशंका को कम किया जा सके। मंत्रालय ने कहा कि अभियान के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इस बीच, डेनमार्क ने घोषणा की है कि वह फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशन में शामिल होगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन को बहाल करना और समुद्री यातायात को सामान्य बनाना है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी भी देश को यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब कभी भी युद्ध-पूर्व जैसी नहीं होगी। उनके इस बयान ने क्षेत्र में भविष्य की समुद्री सुरक्षा और व्यापार को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर बनी हुई है, क्योंकि यहां की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को सीधे प्रभावित करती है।