Water crisis deepens at Rawalpindi-Islamabad border as residents accuse authorities of Inaction
रावलपिंडी [पाकिस्तान]
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में रावलपिंडी-इस्लामाबाद बॉर्डर के पास 14 इलाकों में पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) ने सरकारी मंज़ूरी से चल रहे 20 ट्यूबवेल और पानी के बोरिंग के लिए जारी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) रद्द कर दिए हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, फैज़ाबाद से कोरल चौक तक के इलाकों में रहने वाले लोग पिछले तीन दिनों से पानी के बिना हैं, जिससे परिवारों को पीने के पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं और अधिकारियों पर बिगड़ते मानवीय हालात को ठीक न कर पाने का आरोप लगा रहे हैं।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने बताया कि ट्यूबवेल अचानक बंद होने से रहमतबाद, गरीबबाद (ब्लॉक A, B, C और D), गुलरेज़, जब्बार कॉलोनी, बनारस कॉलोनी, धोके चौधरीयन, मुमताज़ कॉलोनी, नय्यर कॉलोनी, चकलाला, धोके मुंशी और आस-पास की कई बस्तियों में पानी की सप्लाई बाधित हो गई है। पानी की कमी बढ़ने पर लोगों को पानी की तलाश में बर्तन लिए घूमते देखा गया।
इस संकट के कारण प्राइवेट पानी के टैंकरों की कीमत में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, छोटे टैंकर अब 2,500 पाकिस्तानी रुपये में और बड़े टैंकर 3,500 पाकिस्तानी रुपये में बिक रहे हैं, जिससे पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय समाजसेवियों ने चंदा इकट्ठा करके मुफ़्त पानी के टैंकरों का इंतज़ाम करना शुरू किया है, जबकि निवासियों का आरोप है कि संकट के समय वॉटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (WASA) और ज़िला प्रशासन ज़्यादातर नदारद रहे।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, CDA ने WASA द्वारा चलाए जा रहे 15 ट्यूबवेल के NOC भी रद्द कर दिए और समुदाय द्वारा चलाए जा रहे चार कुओं को भी बंद कर दिया। ये कुएं पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोगियों की मदद से बनाए गए थे। निवासियों का दावा है कि इन सुविधाओं से दशकों तक सस्ता पानी मिलता रहा, लेकिन अधिकारियों ने बिना किसी वैकल्पिक सप्लाई का इंतज़ाम किए इनके उपकरण ज़ब्त कर लिए और परमिट रद्द कर दिए।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटे के भीतर पानी की सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो वे कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और WASA के दफ़्तरों के बाहर धरना देंगे। निवासियों ने प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से तुरंत दखल देने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकारी एजेंसियां नागरिकों की बुनियादी ज़रूरत तक पहुंच सुनिश्चित करने में नाकाम रही हैं।