आवाज द वॉयस/ लंदन
ईरान और तुर्की के बाद अब इजरायल और ब्रिटेन के रिश्तों में भी गंभीर तनाव देखने को मिल रहा है। इस बढ़ते विवाद का असर अब राजनयिक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। इजरायल ने कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को 30 दिनों के भीतर बंद करने का आदेश दिया है।
इजरायली सार्वजनिक प्रसारक कान (KAN) की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया है कि उसे एक महीने के भीतर अपना कामकाज बंद करना होगा। इसके बाद वहां तैनात ब्रिटिश राजनयिकों की मान्यता भी समाप्त कर दी जाएगी।
यह कदम ब्रिटेन द्वारा कब्जे वाले पश्चिमी तट में स्थित इजरायली बस्तियों के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की घोषणा के तुरंत बाद उठाया गया है।
ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने मंगलवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की कि सरकार पश्चिमी तट में बनी अवैध इजरायली बस्तियों से आने वाले उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाएगी। इसके साथ ही उन कंपनियों और व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो बस्तियों के विस्तार में मदद कर रहे हैं।
मिलिबैंड ने यह भी कहा कि ब्रिटेन उन चरमपंथी इजरायली बसने वालों के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई करेगा जिन पर फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने या उसका समर्थन करने के आरोप हैं।
ब्रिटिश विदेश सचिव ने घोषणा की कि उनकी सरकार ऐसे किसी भी नए हथियार निर्यात लाइसेंस को मंजूरी नहीं देगी जो कब्जे वाली फिलिस्तीनी भूमि पर इजरायली नियंत्रण को मजबूत करने में योगदान दे सकते हों। साथ ही पहले से निलंबित 30 हथियार लाइसेंसों पर रोक भी जारी रहेगी।
हाउस ऑफ कॉमन्स में अपने संबोधन के दौरान मिलिबैंड ने कहा कि ब्रिटिश सरकार इस बात से सहमत है कि कब्जे वाले पश्चिमी तट में फिलिस्तीनियों को व्यवस्थित रूप से विस्थापित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया कट्टरपंथी इजरायली बसने वालों द्वारा संचालित की जा रही है।
इजरायल के भीतर भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों को लेकर आलोचना तेज हो रही है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि नेतन्याहू की सरकार गाजा युद्ध और बस्तियों के विस्तार की नीति के कारण देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रही है।
खुद नेतन्याहू भी करीब एक वर्ष पहले यह स्वीकार कर चुके हैं कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय अलगाव की स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
फिलिस्तीनी आंकड़ों के अनुसार, 2022 के अंत में सत्ता में आने के बाद नेतन्याहू सरकार ने पश्चिमी तट में 104 नई बस्तियों को मंजूरी दी है। इसके अलावा 160 कृषि चौकियां और नए ठिकाने भी स्थापित किए गए हैं।
फिलिस्तीनी उपनिवेशीकरण एवं दीवार प्रतिरोध आयोग के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में इजरायली बसने वालों ने पश्चिमी तट में 3,488 हमले किए। इन घटनाओं में 17 फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जबकि 26 बेदुइन और पशुपालक समुदायों को पूरी तरह या आंशिक रूप से अपने घर छोड़ने पड़े।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि इसी अवधि में 42 नई अवैध चौकियां स्थापित की गईं।
फिलिस्तीनी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 7.5 लाख इजरायली बसने वाले पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में फैली 194 बस्तियों तथा 400 से अधिक चौकियों में रह रहे हैं।
इजरायल ने 1967 के युद्ध के बाद से पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर रखा है। संयुक्त राष्ट्र समेत अधिकांश अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इन क्षेत्रों में बनी इजरायली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानती हैं। हालांकि इजरायल इस व्याख्या को स्वीकार नहीं करता।
ब्रिटेन के हालिया कदम और उसके बाद इजरायल की प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के संबंधों में नई खटास पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव आगे बढ़ता है तो इजरायल और उसके पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों के बीच दूरी और बढ़ सकती है।