नई नस्ल में वैज्ञानिक सोच जरूरी: डॉ. शम्स इकबाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 09-09-2026
Scientific mindset essential in the new generation: Dr. Shams Iqbal
Scientific mindset essential in the new generation: Dr. Shams Iqbal

 

आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली।

नई पीढ़ी को विज्ञान से जोड़ना और उसके भीतर वैज्ञानिक सोच विकसित करना आज की बड़ी शैक्षिक जरूरत है। बच्चों और युवाओं को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सवाल पूछने, प्रयोग करने और अपने आसपास की घटनाओं को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का अवसर देना जरूरी है। यही सोच भविष्य की मजबूत और ज्ञान आधारित पीढ़ी तैयार कर सकती है।

राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद यानी NCPUL की ओर से आयोजित युवा विज्ञान कार्यक्रम में यह बात सामने आई। कार्यक्रम में विज्ञान शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नई पीढ़ी में जिज्ञासा पैदा करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

परिषद के अनुसार, देश के 24 जिलों से करीब 250 छात्र और छात्राएं इस पहल से जुड़े। इनमें 74 छात्र ऐसे भी थे, जिन्हें विज्ञान केंद्रों और उससे जुड़े कार्यक्रमों को करीब से देखने का अवसर मिला।

नई पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच पर जोर

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना था। इसके साथ ही छात्रों को वैज्ञानिक गतिविधियों और प्रयोगों से परिचित कराया गया। आयोजकों का मानना है कि विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम का विषय मानने से बच्चों में उसकी वास्तविक समझ विकसित नहीं होती।

विज्ञान तब ज्यादा प्रभावी बनता है, जब छात्र खुद सवाल पूछते हैं। वे किसी घटना के पीछे का कारण जानने की कोशिश करते हैं। वे प्रयोग करते हैं और उसके परिणाम को समझते हैं। इस तरह की प्रक्रिया बच्चों के भीतर सोचने और समस्या का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करती है।

कार्यक्रम में इसी तरह के अनुभवों पर जोर दिया गया। छात्रों को विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया। उन्हें यह समझने का मौका मिला कि विज्ञान केवल परीक्षा में अंक हासिल करने का विषय नहीं है। यह रोजमर्रा की जिंदगी को समझने का एक तरीका भी है।

शिक्षा में बदलाव की जरूरत

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं होना चाहिए। बच्चों में तर्क करने और सवाल पूछने की आदत भी विकसित होनी चाहिए। वैज्ञानिक सोच इसी प्रक्रिया से आगे बढ़ती है।

डॉ. शम्स इकबाल ने अपने संबोधन में नई नस्ल में वैज्ञानिक मानसिकता विकसित करने को महत्वपूर्ण शैक्षिक जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तेजी से बदलती दुनिया को समझने के लिए युवाओं का विज्ञान से जुड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे अवसर मिलने चाहिए, जहां वह विज्ञान को सिर्फ पढ़े नहीं बल्कि उसे महसूस भी करे। प्रयोगशालाओं, विज्ञान केंद्रों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में विज्ञान के प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा की जा सकती है।

यह पहल खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें अपने आसपास विज्ञान से जुड़े संसाधनों और प्रयोगों को देखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।

विज्ञान केंद्रों का अनुभव छात्रों के लिए अहम

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को विज्ञान से संबंधित गतिविधियों में शामिल किया गया। इसका मकसद उन्हें व्यावहारिक अनुभव देना था।अक्सर स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई किताबों और निर्धारित पाठ्यक्रम तक सीमित रह जाती है। छात्र किसी सिद्धांत को पढ़ लेते हैं, लेकिन उसके वास्तविक उपयोग को समझ नहीं पाते। ऐसे में विज्ञान केंद्रों की यात्रा और प्रयोग आधारित गतिविधियां उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।

इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को यह समझने में मदद करते हैं कि विज्ञान उनके जीवन से किस तरह जुड़ा हुआ है। मोबाइल फोन से लेकर स्वास्थ्य, कृषि, मौसम और संचार तक विज्ञान का असर हर जगह दिखाई देता है।

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि बच्चों को कम उम्र से ही वैज्ञानिक गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। इससे उनमें जिज्ञासा बनी रहती है। वे सवाल पूछने से नहीं डरते। यही आदत आगे चलकर शोध और नवाचार की नींव बन सकती है।

उर्दू भाषा में विज्ञान की जानकारी

NCPUL का यह कार्यक्रम एक और वजह से महत्वपूर्ण है। परिषद उर्दू भाषा के माध्यम से ज्ञान और विज्ञान की जानकारी को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम करती है।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उर्दू में आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिक विषयों से जुड़ी सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। इससे उर्दू माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों को आधुनिक ज्ञान से जुड़ने में आसानी होगी।

आज इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों ने ज्ञान तक पहुंच आसान कर दी है। इसके बावजूद भाषा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि विज्ञान से जुड़ी अच्छी सामग्री अलग अलग भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो, तो ज्यादा छात्र उसका लाभ उठा सकते हैं।

उर्दू में विज्ञान लेखन को बढ़ावा देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे छात्रों को अपनी भाषा में विज्ञान समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे आगे चलकर अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं में उपलब्ध वैज्ञानिक सामग्री को भी ज्यादा आसानी से समझ सकेंगे।

छात्रों में सवाल पूछने की आदत जरूरी

कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि वैज्ञानिक सोच का पहला कदम सवाल पूछना है। किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करना चाहिए कि वह लंबे समय से कही जा रही है।

छात्रों को सवाल पूछने और जवाब तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। गलती होने पर उन्हें सीखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

विज्ञान इसी प्रक्रिया से आगे बढ़ता है। किसी प्रयोग का असफल होना भी एक तरह की जानकारी देता है। इससे छात्र यह समझता है कि किसी समस्या को दूसरे तरीके से देखने की जरूरत है।ऐसी शिक्षा बच्चों में आत्मविश्वास भी पैदा करती है। वे समस्याओं से घबराने के बजाय उनके समाधान के बारे में सोचते हैं।

2020 की शिक्षा नीति से जुड़ा व्यापक संदर्भ

कार्यक्रम में नई शिक्षा व्यवस्था और वैज्ञानिक सोच की जरूरत पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी छात्रों के समग्र विकास, आलोचनात्मक सोच और सीखने की क्षमता को महत्व दिया गया है। NCPUL के कार्यक्रम को इसी व्यापक शैक्षिक जरूरत के संदर्भ में देखा जा सकता है।

आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। तकनीक का इस्तेमाल स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल शिक्षा और नई वैज्ञानिक खोजों ने सीखने के तरीके को बदल दिया है।

ऐसे समय में छात्रों को केवल पुरानी जानकारी याद कराने से काम नहीं चलेगा। उन्हें नई जानकारी समझने और उसका विश्लेषण करने की क्षमता भी देनी होगी।

विज्ञान और समाज के बीच मजबूत संबंध

वैज्ञानिक सोच का महत्व केवल छात्रों या वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध समाज से भी है।स्वास्थ्य से जुड़े फैसले हों या पर्यावरण से जुड़े सवाल, वैज्ञानिक जानकारी लोगों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है। अफवाहों और गलत सूचनाओं के दौर में वैज्ञानिक नजरिया और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

युवा अगर तथ्य और प्रमाण के आधार पर चीजों को समझना सीखेंगे तो वे समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। इससे शिक्षा का उद्देश्य भी व्यापक होता है।

कार्यक्रम में विज्ञान को युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश इसी दिशा में दिखाई दी। आयोजकों ने छात्रों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करने और उनमें सीखने की इच्छा को मजबूत करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में कई गतिविधियां हुईं

NCPUL की ओर से आयोजित इस पहल में विज्ञान से जुड़े अलग अलग सत्र और गतिविधियां रखी गईं। छात्रों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला।कार्यक्रम के अलग अलग सत्रों में विज्ञान, प्रयोग और वैज्ञानिक सोच से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई। छात्रों की भागीदारी ने यह दिखाया कि युवाओं में विज्ञान को लेकर रुचि पैदा की जा सकती है, बशर्ते उन्हें सीखने का व्यावहारिक माहौल मिले।

समापन सत्र में कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों, शिक्षकों और अन्य अतिथियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

आगे की राह

नई पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच विकसित करना किसी एक कार्यक्रम से संभव नहीं है। इसके लिए लगातार प्रयास की जरूरत है। स्कूलों, कॉलेजों, विज्ञान केंद्रों और शैक्षिक संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

बच्चों को विज्ञान से डराने के बजाय उससे जोड़ना होगा। किताबों के साथ प्रयोग जरूरी हैं। जानकारी के साथ जिज्ञासा जरूरी है। परीक्षा के साथ समझ जरूरी है।NCPUL की यह पहल इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आती है। 24 जिलों के करीब 250 विद्यार्थियों की भागीदारी बताती है कि ऐसे कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने की गुंजाइश है।

अगर वैज्ञानिक सोच को शिक्षा का नियमित हिस्सा बनाया जाए तो इसका लाभ केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर परिवार, समाज और देश की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।