आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र समर्थित मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को कहा कि सूडान के पश्चिमी क्षेत्र दारफुर के एक शहर और उसके आसपास के इलाकों में गैर-अरब समुदायों के खिलाफ सूडानी विद्रोहियों द्वारा अक्टूबर में चलाए गए "अभियान" में "नरसंहार के संकेत" दिखाई देते हैं।
यह देश में जारी विनाशकारी युद्ध को लेकर एक चौंकाने वाला निष्कर्ष है।
सूडान पर एक स्वतंत्र तथ्यान्वेषी मिशन की रिपोर्ट के अनुसार, रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) ने अल-फशेर में 18 महीने की घेराबंदी के बाद बड़े पैमाने पर हत्याएं और अन्य अत्याचार किए। इसके अनुसार, इस दौरान रैपिड सपोर्ट फोर्सेज ने गैर-अरब समुदायों, विशेष रूप से जघावा और फुर समुदायों को नुकसान पहुंचाने के लिए सोची-समझी शर्तें लागू कीं।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि दारफुर में सूडानी सेना के एकमात्र बचे गढ़ अल-फशेर पर आरएसएफ के कब्जे के दौरान कई हजार नागरिक मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि शहर के 260,000 निवासियों में से केवल 40 प्रतिशत ही हमले से बचकर निकलने में कामयाब रहे। उनमें से हजारों घायल हो गए। उन्होंने बताया कि बाकी बचे लोगों का क्या हुआ, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है।
सूडान में अप्रैल 2023 के मध्य में उस समय संघर्ष छिड़ गया, जब राजधानी खार्तूम में सैन्य और अर्धसैनिक नेताओं के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव भड़क उठा और दारफुर सहित अन्य क्षेत्रों में फैल गया।