फ़ारस से हिंदुस्तान तक: सेवइयों की दिलचस्प दास्तान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 19-02-2026
From Persia to Hindustan: The fascinating story of vermicelli
From Persia to Hindustan: The fascinating story of vermicelli

 

-डॉ. फ़िरदौस ख़ान

सेवइयां सिर्फ़ एक व्यंजन ही नहीं हैं, बल्कि ये हमारे त्यौहारों और परम्पराओं का एक अटूट हिस्सा भी हैं। हिन्दुस्तान, ईरान और पड़ौसी देश चीन से लेकर इटली तक इसके कई रूप और कहानियां प्रचलित हैं। जितने देश, उतनी ही कहानियां और उतने ही ज़ायक़े इनसे जुड़े हुए हैं।

d

सेवइयों का इतिहास   

सेवइयों का इतिहास छह सदी से भी ज़्यादा पुराना माना जाता है। इसके इतिहास को लेकर दो मान्यतायें प्रचलित हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसे बनाने की शुरुआत फ़ारस यानी ईरान में हुई। फिर मुग़ल काल में ये भारत आ गईं। शीर ख़ुरमा के रूप में ये उनके दस्तरख़्वान का एक अहम हिस्सा हुआ करती थीं। शाही दरबार से फिर ये नवाबों के दस्तरख़्वान होती हुई जनमानस तक पहुंच गईं। इस सफ़र में ये कब ईद का एक ख़ास व्यंजन बन गईं, पता ही नहीं चला। इनकी वजह से ही ईद-उल-फ़ितर को मीठी ईद भी कहा जाता है।

दूसरी मान्यता के मुताबिक़ कई इतिहासकारों का मानना है कि सेवइयों की शुरुआत नूडल्स के रूप में चीन में हुई थी, जहां से ये व्यापारिक मार्गों के ज़रिये भारत और अरब देशों तक पहुंचीं। चीन में सेवइयां नूडल्स के रूप में मुख्य भोजन में शामिल हैं।

ये वहां का हज़ारों साल पुराना एक पारम्परिक व्यंजन हैं। उत्तरी चीन में गेहूं के नूडल्स और दक्षिणी चीन में चावल के नूडल्स प्रचलित हैं। इन्हें विभिन्न विधियों से पकाया जाता है जैसे शोरबे में सूप के रूप में और फ़्राई चाऊमिन के रूप में। लोंगकोऊ सेलोफ़ेन पारदर्शी नूडल्स हैं, जो फ़लियों और मटर के साथ बनाए जाते हैं। ये व्यंजन वेज और नॉनवेज दोनों ही तरह के होते हैं।

मान्यता है कि भूमध्य सागरीय इलाक़े में पास्ता के आने से बहुत पहले से ही चीन और एशिया में नूडल्स मौजूद थे। साल 2005में चीन के लाजिया में दुनिया के सबसे पुराने नूडल्स पाए गये थे। ज़र्द रंग के पतले नूडल्स एक उल्टे बर्तन में मिले थे। रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला है कि ये तक़रीबन चार हज़ार साल पुराने हैं। ये इस बात का प्रमाण है कि चीन में हज़ारों साल पहले से नूडल्स खाये जाते हैं।  

कहा जाता है कि तेरहवीं सदी में मार्को पोलो पास्ता को चीन से इटली लाए थे। इटली में सेवइयां पास्ता के तौर पर एक पारम्परिक और लोकप्रिय व्यंजन हैं। भारत में पारम्परिक मीठी और नमकीन सेवइयों के साथ-साथ चाऊमिन, पास्ता और मैगी का चलन बहुत बढ़ गया है। क़ाबिले ग़ौर ये भी है कि सेवइयों के मुक़ाबले नूडल्स मोटे और लम्बे होते हैं, लेकिन इनका परिवार तो एक ही है। 

d          

सेवइयों की क़िस्में

सामग्री, आकार और बनाने के आधार पर सेवइयां कई प्रकार की होती हैं। सामग्री के आधार पर गेहूं, चावल और रागी आदि से बनी सेवइयां प्रमुख हैं। पारम्परिक सेवइयां मैदे से बनी होती हैं। ये बहुत लोकप्रिय हैं। आकार के आधार पर सेवइयां महीन, लम्बी, मोटी और छोटी होती हैं। इनमें मशीन से बनी महीन, मोटी और छोटी सेवइयां और हाथ से बनी मोटी और छोटी सेवइयां भी शामिल हैं। हाथ की सेवइयां गेहूं के आटे और मैदे को हाथ से खींचकर बनाई जाती हैं। अब इनका चलन बहुत कम हो गया है। स्वच्छता के लिहाज़ से भी लोग अब मशीन से बनी सेवइयां लेना ज़्यादा पसंद करते हैं।

बनाने के आधार पर सेवइयों की कई क़िस्में हैं। क़िमामी सेवइयां बहुत बारीक होती हैं। इन्हें घी में भूनकर दूध या चाशनी में पकाया जाता है। इनमें सूखे मेवे भी डाले जाते हैं। चाशनी वाली सेवइयों में मावा डालकर भी बनाया जाता है। कुछ लोग इसे बर्फ़ी की तरह तश्तरी में जमाकर बनाते हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसी सेवइयां बहुत बनाई जाती हैं।

लच्छा सेवइयां यानी फैनी दूध में डालते ही घुल जाती है। देसी घी की फैनी बहुत मशहूर है। ये बहुत कम वक़्त में बन जाती है। गर्म ढूध में डालते ही ये खाने के लिए तैयार हो जाती है। ये सहरी का मुख्य व्यंजन है।        प्रसंस्करण के आधार पर सेवइयां बिना भुनी और भुनी हुई दोनों ही तरह की होती हैं। भुनी सेवइयों को बनाते वक़्त भूनना नहीं पड़ता और वक़्त की बचत होती है, जबकि बिना भुनी सेवइयों को अपने हिसाब से भूना जाता है।

पकाने के आधार पर सेवइयां कई प्रकार की होती हैं। प्रमुख रूप से मीठी सेवइयां और नमकीन सेवइयां। मीठी सेवइयां चीनी, दूध और मेवों से बनाई जाती हैं। ये उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। नमकीन सेवइयां मसालों और सब्ज़ियों के साथ बनाई जाती हैं। ये दक्षिण भारत में बहुत प्रचलित हैं।

यहां चावल की भाप में बनी मीठी और नमकीन सेवइयां पारम्परिक व्यंजन हैं। इन्हें भिन्न-भिन्न व्यंजनों के रूप में पकाया जाता है। इडियप्पम के रूप में इसे नारियल की चटनी और सांभर के साथ खाया जाता है। पायसम के रूप में इसे नारियल के दूध और गुड़ के साथ पकाया जाता है।

s

शीर ख़ुरमा बनाने की विधि

सामग्री

दूध : एक लिटर

सेवइयां : 100 ग्राम

घी : एक बड़ा चम्मच

चीनी : स्वाद अनुसार

ख़शख़श : एक छोटा चम्मच

हरी इलायची : पांच-छह      

मेवे (कटे हुए) : पसंद अनुसार

खजूर कटे हुए : स्वाद अनुसार   

चाँदी का वर्क़  : पसंद अनुसार

d

बनाने का तरीक़ा

एक बर्तन में घी गर्म करें और उसमें मेवे भून लें।

फिर बचे हुए घी में हरी इलायची के दाने डालकर हल्का भूनें।

फिर इसमें सेवइयां डालकर भून लें।

एक दूसरे बर्तन में दूध धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक पकायें।

फिर इसमें चीनी डालकर कुछ देर और पकायें।      

फिर इसमें भुनी हुई सेवइयां, ख़शख़श और कुछ मेवे डालकर पका लें।

फिर इसे ठंडा करके परोसें और सूखे मेवों, खजूर व चाँदी के वर्क़ से गार्निश करें।  

d

कहां की सेवइयां प्रसिद्ध हैं 

यूं तो सेवइयां पूरे भारत में खाई जाती हैं और हर जगह की अपनी ख़ासियत है। लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं, जो सेवइयों के लिए जानी जाती हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, कानपुर और गोरखपुर आदि शहरों की सेवइयां बहुत प्रसिद्ध हैं। इसी तरह पटना और हैदराबाद की सेवइयां भी बहुत प्रसिद्ध हैं। राजस्थान के झालावाड़ की हाथ से बनी सेवइयां भी बहुत प्रसिद्ध हैं।   

सेवइयों का जलवा ये है कि इन पर शायरी भी ख़ूब की जाती है। बानगी देखें-    

घी की ख़ुशबू और सेवइयों का निखार

प्यार से बनें तो और बढ़े स्वाद अपार

ईद हो या कोई और तीज-त्यौहार

मीठी सेवइयां लाती हैं ख़ुशियां हज़ार...

(लेखिका शायरा, कहानीकार व पत्रकार हैं)