A Hindu youth demanded the removal of nighttime shop closures during Ramzan.
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
भारत में विविधता के बीच एकता का संदेश देने वाली घटनाएं हमेशा समाज को जोड़ने का काम करती हैं। जैसे हाल ही में उत्तराखंड के कोटद्वार में दीपक कुमार ने शरारती तत्वों के खिलाफ खड़ा होकर धार्मिक एकता और समरसता का प्रतीक बनकर अपना नाम मोहम्मद दीपक "सेक्युलर भारत के आइकॉन" के तौर पर स्थापित किया था, ठीक उसी तरह एक नया मामला सामने आया है, जिसमें हिंदू युवक रोहित प्रकाश ने रमज़ान के दौरान मुस्लिम दुकानदारों के लिए देर रात तक दुकानें खोलने की अनुमति देने के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा क्षेत्र में एक हिंदू युवक, रोहित प्रकाश ने एक ऐसा कदम उठाया, जो धार्मिक समरसता और भाईचारे की मिसाल बन गया। रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम दुकानदारों के लिए देर रात तक दुकानें खोलने की अनुमति देने की मांग को लेकर रोहित ने प्रशासन से ज्ञापन सौंपा। उनका यह कदम केवल धार्मिक अधिकारों की रक्षा नहीं करता, बल्कि हिंदू-मुसलिम एकता और सामाजिक सद्भावना को भी बढ़ावा देता है। यह घटना यह साबित करती है कि भारत में हर धर्म और समुदाय का सम्मान होना चाहिए और समाज की सच्ची ताकत उसकी विविधता में एकता में निहित है।
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा क्षेत्र में रमज़ान माह के मद्देनज़र एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जो सामाजिक समरसता और धार्मिक सद्भावना की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। बनभूलपुरा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में लागू रात्रिकालीन पाबंदी को हटाने की मांग प्रशासन से की, ताकि मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी धार्मिक गतिविधियों को सहजता से अंजाम दे सकें।
ज्ञापन में कहा गया कि रमज़ान का महीना इबादत और आध्यात्मिक साधना का समय होता है, जिसमें मुस्लिम लोग देर रात तक मस्जिदों में नमाज़ अदा करते हैं, तरावीह पढ़ते हैं, और सहरी की तैयारी करते हैं। इस दौरान, बनभूलपुरा में बाजारों और दुकानों पर रात के समय सीमित गतिविधियां होती हैं, जिससे कोई कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं होती। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि क्षेत्र के लोग हमेशा शांति और भाईचारे के साथ रमज़ान का पर्व मनाते हैं और कानून का पालन करते हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि रात्रि पाबंदी के कारण लोगों को सहरी और धार्मिक गतिविधियों में अनावश्यक कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जो उनके धार्मिक अधिकारों के साथ न्याय नहीं करता। इसलिए, उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान विशेष राहत दी जाए और रात की पाबंदी को हटा लिया जाए, ताकि लोग अपनी धार्मिक गतिविधियों को बिना किसी परेशानी के पूरा कर सकें।
यह कदम न केवल स्थानीय समुदाय के धार्मिक अधिकारों को सम्मानित करता है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है। रोहित शर्मा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने यह कदम उठाकर यह साबित किया कि हिंदू-मुसलिम एकता और भाईचारा भारत की असली ताकत है। प्रशासन से उम्मीद जताई गई कि वे सकारात्मक निर्णय लेकर बनभूलपुरा क्षेत्रवासियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करेंगे और उनकी सुविधा सुनिश्चित करेंगे। यह घटना यह दर्शाती है कि धार्मिक और सामाजिक समरसता का रास्ता हमेशा खुले विचार, आपसी सम्मान और सहयोग से गुजरता है।
रोहित शर्मा का यह कदम न केवल स्थानीय मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत में सांप्रदायिक सद्भावना और धार्मिक एकता की परंपरा आज भी जीवित है। इस पहल ने एक सशक्त संदेश दिया है कि समाज की ताकत उसकी विविधता में एकता से होती है।
जब हम एक-दूसरे की भावनाओं और धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करते हैं, तो हम न केवल अपने समाज को मजबूत बनाते हैं, बल्कि देश को एकजुट करने में भी मदद करते हैं। प्रशासन से उम्मीद है कि वे इस पहल को सकारात्मक रूप से स्वीकार करेंगे और बनभूलपुरा क्षेत्रवासियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए आवश्यक राहत प्रदान करेंगे, ताकि धार्मिक गतिविधियों में कोई रुकावट न आए। इस प्रकार की पहलें ही भारत की सामाजिक समरसता और सामूहिकता की असली ताकत को प्रदर्शित करती हैं।