डॉ. फ़िरदौस ख़ान
रमज़ान में पढ़ी जाने वाली तरावीह नमाज़ की रकअत कितनी हैं ? तरावीह 8रकअत हैं, 10रकअत हैं या फिर 20रकअत हैं ? ये सवाल भी हर साल उठता है। कुछ लोग 8रकअत पढ़ते हैं, कुछ लोग 10रकअत पढ़ते हैं और कुछ लोग 20रकअत पढ़ते हैं। जो लोग जितनी रकअत पढ़ते हैं, उन्हें ख़ुद से कम या ज़्यादा रकअत पढ़ने वाले लोग ग़लत लगते हैं।

इस्लाम के सिरमौर देश सऊदी अरब की बात करें, तो यहां साल 2021से तरावीह नमाज़ की 10रकअत पढ़ी जा रही हैं। सऊदी अरब के शाही फ़रमान और मस्जिद प्रशासन के फ़ैसले के मुताबिक़ मक्का की मस्जिद-अल-हरम और मदीने की मस्जिद-अल-नबवी में कोरोना काल से रमज़ान में तरावीह की नमाज़ 10रकअत पढ़ी जा रही हैं।
इसके बाद तीन रकअत वित्र नमाज़ पढ़ी जाती है। इस तरह कुल 13रकअत नमाज़ अदा की जाती है। पिछले साल 2025में भी तरावीह की नमाज़ 10रकअत ही पढ़ी गई थी। इस बार भी 10रकअत ही पढ़ी जाएगी। तरावीह और तहज्जुद की नमाज़ के लिए इमाम नियुक्त कर दिए गये हैं।
हालांकि इससे पहले तरावीह की नमाज़ 20रकअत पढ़ी जाती थी। इसमें दो-दो रकअत करके कुल 10सलाम के साथ नमाज़ मुकम्मल की जाती थी और आख़िर में तीन रकअत वित्र पढ़े जाते थे। अमूमन 20रकअत को दो अलग-अलग इमाम पढ़ाते थे। पहले इमाम 10रकअत पढ़ाते थे, और फिर दूसरे इमाम बाक़ी की 10रकअत और वित्र की नमाज़ पूरी करवाते थे।
इस दौरान 10रकअत होने के बाद क़ुरआन को मुकम्मल किया जाता था। रमज़ान के आख़िरी 10दिनों में आधी रात के बाद अलग से तहज्जुद की नमाज़ भी जमात के साथ पढ़ी जाती थी, जिसमें लम्बी तिलावत होती थी।
अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान से रिवायत है कि उन्होंने आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से पूछा- रमज़ान के दौरान अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नमाज़ कैसी थी?’ तो उन्होंने फ़रमाया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान के महीने या किसी अन्य महीने में ग्यारह रकअत से ज़्यादा नहीं पढ़ते थे।

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चार रकअत पढ़ते थे, तो लम्बी क़िरात के साथ उसकी ख़ूबसूरती और ज़्यादा बढ़ जाती। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चार रकअत पढ़ते थे, तो लम्बी क़िरात के साथ उसकी ख़ूबसूरती और ज़्यादा बढ़ जाती। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन रकअत पढ़ते थे। मैंने कहा- हे अल्लाह के रसूल, क्या आप वित्र की नमाज़ अदा करने से पहले सो जाते हैं? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "ऐ आयशा, मेरी आँखें सोती हैं लेकिन मेरा दिल नहीं सोता है।”(सहीह बुख़ारी : 2013, सहीह मुस्लिम : 738)
इन हदीसों से पता चलता है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान में और अन्य महीनों में अपनी रात की नमाज़ में मुसलसल ऐसा ही करते थे।इस्लामी विद्वान मानते हैं कि तरावीह की आठ रकअत पढ़ना सुन्नत हो सकता है, लेकिन फ़र्ज़ नहीं है। वैसे भी तरावीह नफ़िल नमाज़ है।
हज़रत अबू ज़र अल ग़फ़्फ़ारी से रिवायत है कि हमने अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रोज़ा रखा, इसलिए उन्होंने महीने की सात रातें बाक़ी रहने तक हमारे साथ रात की नमाज़ नहीं पढ़ी। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रात के एक तिहाई हिस्से तक हमें नमाज़ पढ़ाई, फिर छठी रात को आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें नमाज़ नहीं पढ़ाई।
फिर पांचवीं रात को आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें आधी रात तक नमाज़ पढ़ाई। हमने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा- 'ऐ अल्लाह के रसूल! क्या आप हमें रात के बाक़ी हिस्से में नमाज़ नहीं पढाएंगे?' आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “बेशक, जो कोई इमाम के साथ नमाज़ पूरी होने तक खड़ा रहता है, तो उसके लिए यह दर्ज किया जाता है कि उसने पूरी रात नमाज़ पढ़ी।“ फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने महीने की तीन रातें बाक़ी रहने तक हमें नमाज़ नहीं पढ़ाई। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीसरी रात को हमें नमाज़ पढ़ाई और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने घर की औरतों को हमारे साथ नमाज़ पढ़ने के लिए बुलाया, यहां तक कि हमें फ़ाला छूट जाने का डर सताने लगा। मैंने ज़ुबैर बिन नुफ़ैर से पूछा, 'फ़ाला’ क्या है?' उन्होंने कहा- सुबह।(जामा तिर्मिज़ी : 806)

हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया “जो कोई रमज़ान में ईमान और सवाब की नीयत से क़ियाम की नमाज़ पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।”(सुनन नसाई : 1603)
हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि एक बार किसी ने अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रात की नमाज़ के बारे में पूछा। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "रात की नमाज़ दो रकअत के बाद दो रकअत और इसी तरह पढ़ी जाती है। और अगर किसी को सुबह यानी फ़ज्र की नमाज़ का वक़्त होने का डर हो, तो वह एक रकअत पढ़ ले, जो उसकी पहले पढ़ी गई रकअतों को वित्र बना देगी।"(सहीह बुख़ारी : 990, सहीह मुस्लिम : 749)
इस हदीस के मुताबिक़ अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रात की नमाज़ की रकअतों की तादाद नहीं बताई। हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “तुम इसी तरह नमाज़ पढ़ो, जिस तरह मुझे नमाज़ अदा करते हुए देखते हो।“(सहीह बुख़ारी : 631)

20 रकअत तरावीह कब शुरू हुई
हज़रत अलाउद्दीन अली अल-मुत्तक़ी की किताब कंज़ुल उम्माल के मुताबिक़ हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु के दौरे ख़िलाफ़त के कुछ अरसे बाद माहे रमज़ान उल मुबारक में आप मस्जिद में तशरीफ़ लाए, तो देखा कुछ लोग बैठे हैं और कुछ लोग पढ़ रहे हैं, तो आपने फ़रमाया- क्यों न अच्छा हो कि इन्हें एक इमाम के पीछे खड़ा कर दूं। हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने 20रकअत तरावीह पढ़ने का हुक्म फ़रमाया।
हज़रत अबी बिन काब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने उन्हें हुक्म दिया कि रमज़ान में रात को नमाज़ पढ़ें। आपने फ़रमाया कि लोग दिन में रोज़ा रखते हैं, इसलिए रात को अच्छी तरह से तिलावत नहीं कर सकते, लिहाज़ा नमाज़ पढ़ें।
हज़रत अबी बिन काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा- “इस तरह की नमाज़ का तो पहले वजूद नहीं था.” हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया- “जी हाँ, मैं जानता हूं, लेकिन ये बहुत अच्छा तरीक़ा है।“चुनांचे हज़रत अबी बिन काब रज़ियल्लाहु अन्हु लोगों को 20रकाअत नमाज़ पढ़ाने लगे।(कंज़ुल उम्माल जिल्द 8सफ़ा 409)
जिस किसी ने अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीक़े के मुताबिक़ आठ यानी वित्र समेत ग्यारह रकअत नमाज़ पढ़ी, उसने अच्छा किया और सुन्नत अदा की। बेशक अल्लाह नीयत देखता है। अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “हर अमल का नतीजा हर किसी को उसकी नीयत के मुताबिक़ मिलेगा।“ (सही बुख़ारी : 01)बेशक अल्लाह जिसे जैसी हिदायत देता है, वह उसी के मुताबिक़ अमल करता है।
(लेखिका आलिमा हैं और उन्होंने फ़हम अल क़ुरआन लिखा है)