ईमानदारी की मिसाल, खान साहब ने अशोक शर्मा को लौटाए 10 तोले सोने के गहने

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-02-2026
An example of honesty, Khan Sahib returned 10 tolas of gold jewellery to Ashok Sharma.
An example of honesty, Khan Sahib returned 10 tolas of gold jewellery to Ashok Sharma.

 

आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली

दिल्ली से सटे हरियाणा के औ़द्योगिक शहर फरीदाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने लोगों का दिल छू लिया। जब भरोसा कमजोर पड़ने लगता है, तब ऐसे किस्से उम्मीद जगा देते हैं। एक कबाड़ी ने चार महीने बाद करीब 100 ग्राम सोना उसके असली मालिक को लौटा दिया। यह सोना गलती से कबाड़ में चला गया था। परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन ईमानदारी ने आखिरकार रास्ता खोज लिया।

यह कहानी हरियाणा की है। यहां कबाड़ का काम करने वाले खान साहब ने ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा दूर तक हो रही है। उन्होंने करीब 10 तोले सोने के गहने पुलिस स्टेशन में जमा कराए और बाद में सही परिवार को सौंप दिए। उनकी साफ नीयत ने सबका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

घटना की शुरुआत पिछले साल जनवरी से होती है। फरीदाबाद के रहने वाले अशोक शर्मा अपने परिवार के साथ कुंभ मेले की यात्रा पर जाने वाले थे। घर कुछ दिनों के लिए खाली रहने वाला था। चोरी का डर था। परिवार ने सोचा कि कीमती गहनों को किसी ऐसी जगह छिपा दिया जाए जहां किसी का ध्यान न जाए। उन्होंने लगभग 10 तोले सोने के गहने एक पुराने डिब्बे में रखे। उस डिब्बे को कबाड़ के बोरे में छिपा दिया गया। सोच यह थी कि कोई भी चोर कबाड़ में कीमती चीज तलाश नहीं करेगा।

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यात्रा पूरी हुई। समय बीत गया। जिंदगी अपनी रफ्तार से चलती रही। फिर आई दिवाली। घर की सफाई शुरू हुई। पुराने सामान को अलग किया गया। कबाड़ को बेचने की तैयारी हुई। इसी भागदौड़ में वह बोरा भी कबाड़ समझकर अलग कर दिया गया। परिवार भूल चुका था कि उसी बोरे में गहनों का डिब्बा छिपा है। वह बोरा कबाड़ी को बेच दिया गया।

कुछ दिन बाद दिवाली पूजा की तैयारी के दौरान गहनों की जरूरत पड़ी। अलमारी खोली गई। डिब्बा तलाशा गया। लेकिन वह कहीं नहीं मिला। घर में हलचल मच गई। धीरे धीरे सच्चाई सामने आई। सभी को याद आया कि गहने कबाड़ के बोरे में रखे थे। और वही बोरा बेच दिया गया है। परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। करीब 100 ग्राम सोना। जिसकी कीमत लगभग 15 लाख रुपये थी। सब कुछ हाथ से निकल चुका था।

परिवार तुरंत कबाड़ी के पास पहुंचा। उन्होंने अपनी गलती बताई। शक जताया कि शायद गहने कबाड़ में आ गए हों। कबाड़ी ने उस समय गोदाम में ढूंढने की कोशिश की। लेकिन कबाड़ का ढेर बड़ा था। कुछ हाथ नहीं लगा। परिवार मायूस होकर लौट आया। दिन बीतते गए। उम्मीद कम होती गई।

चार महीने गुजर गए। फिर एक दिन गोदाम में सामान की जांच करते हुए खान साहब की नजर एक पुराने डिब्बे पर पड़ी। डिब्बा अलग सा लगा। उन्होंने उसे खोला। अंदर सोने के गहने थे। पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। फिर उन्होंने ध्यान से देखा। यह वही गहने थे जिनकी तलाश में शर्मा परिवार आया था।

खान साहब ने तुरंत समझ लिया कि यह अमानत उनकी नहीं है। यह किसी और की है। और शायद उसी परिवार की है जो महीनों पहले यहां आया था। उन्होंने डिब्बा बंद किया। घर जाकर परिवार को बताया। कहा कि गोदाम में सोना मिला है। और वह उसे लौटाना चाहते हैं। घरवालों ने उनके फैसले का समर्थन किया। किसी ने लालच नहीं दिखाया। सबने कहा कि जो हमारा नहीं है, वह रखना ठीक नहीं।

 

खान साहब का गोदाम  भगत सिंह कॉलोनी के पास खेती फार्म के पास है। वहां कबाड़ का बड़ा ढेर रहता है। इतने महीनों बाद उस डिब्बे का मिलना ही अपने आप में आश्चर्य था। लेकिन उससे भी बड़ी बात थी उसे सही हाथों तक पहुंचाना।

 

खान साहब ने पुलिस से संपर्क किया। मामले की जानकारी दी। बाद में एसीपी जतिश मल्होत्रा की मौजूदगी में गहने अशोक शर्मा और उनके परिवार को सौंप दिए गए। जब परिवार ने अपने गहने वापस देखे तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि चार महीने बाद उनका खोया सोना उन्हें फिर मिल गया है।

खान साहब ने साफ कहा कि हम हराम नहीं खाते। हम मेहनत की कमाई पर भरोसा करते हैं। जो चीज हमारी नहीं है, उसे रखना गलत है। उनके शब्द सरल थे। लेकिन असर गहरा था। उन्होंने यह भी कहा कि असली सुकून इसी में है कि किसी की अमानत उसे लौटा दी जाए।

इस घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। अक्सर खबरें धोखा और लालच की सुनाई देती हैं। ऐसे में यह कहानी अलग है। यहां एक कबाड़ी है। साधारण जिंदगी जीने वाला। लेकिन सिद्धांतों पर अडिग। उसके सामने मौका था। कोई जान भी नहीं पाता। लेकिन उसने सही रास्ता चुना।

शर्मा परिवार ने भी अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने माना कि लापरवाही उनकी थी। लेकिन उन्हें यह भी लगा कि दुनिया में अब भी अच्छे लोग हैं। जिन्होंने उनका भरोसा टूटने नहीं दिया।

आज इस घटना की चर्चा हर तरफ हो रही है। लोग खान साहब की तारीफ कर रहे हैं। यह सिर्फ सोना लौटाने की कहानी नहीं है। यह भरोसे की कहानी है। यह इंसानियत की कहानी है। यह बताती है कि ईमानदारी अभी जिंदा है।

छोटी जगहों पर ऐसे बड़े दिल वाले लोग रहते हैं। जिनके पास दौलत कम हो सकती है। लेकिन चरित्र बहुत बड़ा होता है। खान साहब ने जो किया, वह कानून से ज्यादा अपने जमीर की आवाज थी। और यही बात उन्हें खास बनाती है।

कभी कभी जिंदगी हमें परखती है। एक डिब्बा। उसमें रखा सोना। और सामने खड़ा लालच। ऐसे में जो सही फैसला ले, वही असली अमीर होता है। फरीदाबाद की इस घटना ने यही साबित किया है। ईमानदारी अभी भी सबसे कीमती गहना है।