तिरुवन्नामलाई (तमिलनाडु)
दक्षिण भारत के प्रसिद्ध Arunachaleswarar Temple में महाशिवरात्रि का पर्व गहरी आस्था, वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। रविवार को आयोजित इस विशेष अवसर पर हजारों श्रद्धालु भगवान अरुणाचलेश्वर (अन्नामलैयार) के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर परिसर में एकत्र हुए।
तिरुपत्तूर, वेल्लोर और रानीपेट सहित आसपास के जिलों के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान अन्नामलैयार और देवी उन्नामुलाई अम्मन के विशेष अभिषेक में भाग लिया। दूध, दही, हल्दी, कुमकुम, घी और शहद जैसे पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया गया। इसके बाद देवताओं को रंग-बिरंगे फूलों और आभूषणों से अलंकृत किया गया, जिससे मंदिर परिसर दिव्य आभा से जगमगा उठा।
धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत भगवान की प्रतिमाओं को मंदिर के प्राकार में भव्य शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। इस दौरान श्रद्धालु “अरोगरा, अरोगरा” के जयघोष के साथ भक्ति में लीन दिखाई दिए। अरुणगिरि योगेश्वरर मंडपम में विशेष दीपाराधना का आयोजन हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
रात्रि में पारंपरिक ‘नालु काला’ (चार काल) शिवरात्रि पूजाएं संपन्न हुईं। हर चरण में पुनः विशेष अभिषेक, पुष्प सज्जा और रजत आभूषणों से साज-सज्जा की गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों ने पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इन अनुष्ठानों में भाग लिया।
हैदराबाद से आए श्रद्धालु अमर ने बताया कि इस पावन अवसर पर पूजा में शामिल होकर उन्हें आध्यात्मिक संतोष की अनुभूति हुई। आंध्र प्रदेश की शावन्नी ने कहा कि वर्षों से महाशिवरात्रि के दिन तिरुवन्नामलाई आने की उनकी इच्छा थी, जो इस बार पूरी हुई। सुधरानी ने भी भव्य अनुष्ठानों को दिव्य अनुभव बताया।
मंदिर प्रशासन ने भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। सुरक्षा, जलपान, दर्शन व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए गए, जिससे उत्सव शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
महाशिवरात्रि के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर तिरुवन्नामलाई को आध्यात्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया, जहां श्रद्धा, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।




