जयपुर में जुटीं नामचीन हस्तियाँ, हकीम अजमल खाँ की विरासत और यूनानी पद्धति पर मंथन

Story by  फरहान इसराइली | Published by  [email protected] | Date 20-02-2026
Renowned personalities gathered in Jaipur to discuss the legacy of Hakim Ajmal Khan and the Unani system.
Renowned personalities gathered in Jaipur to discuss the legacy of Hakim Ajmal Khan and the Unani system.

 

फरहान इसराइली / जयपुर

जयपुर के राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स में एक दिन यूनानी चिकित्सा पद्धति के नाम रहा। ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस की राजस्थान इकाई द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी किसी बड़े उत्सव से कम नहीं थी। इसमें राजस्थान के कोने-कोने से आए हकीमों, डॉक्टरों और प्रोफेसरों ने शिरकत की। यह पूरा आयोजन यूनानी चिकित्सा जगत के बेताज बादशाह हकीम अजमल खाँ की याद में समर्पित था। कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज़ मुहम्मद इमरान ने कुरआन की तिलावत से की। इसके बाद पूरे सभागार में यूनानी चिकित्सा के सुनहरे इतिहास और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर गहन मंथन शुरू हुआ।
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संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रोफेसर वैद्य गोविंद सहाय शुक्ल ने बहुत ही सरल और स्पष्ट शब्दों में यूनानी पद्धति की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि यूनानी तिब्ब कोई किताबी इलाज नहीं है बल्कि यह कुदरत की गोद से निकली एक असरदार पद्धति है।
 
आज के दौर में जब लोग रसायनों वाले इलाज से ऊब रहे हैं, तब यूनानी जैसी प्राकृतिक पद्धतियों की अहमियत और बढ़ जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ज्ञान विहार विश्वविद्यालय के चांसलर सुनील शर्मा ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति को जीवित रखने के लिए उसमें शोध और नए जमाने के हिसाब से बदलाव जरूरी हैं। उन्होंने यूनानी जगत से जुड़े लोगों से अपील की कि वे रिसर्च पर ज्यादा ध्यान दें ताकि इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक मान्यता मिल सके।
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इस मौके पर हकीम अजमल खाँ की महान शख्सियत को शिद्दत से याद किया गया। वक्ताओं ने बड़े गर्व से बताया कि हकीम साहब केवल एक चिकित्सक नहीं थे। वे भारत की आजादी की लड़ाई के एक महान सिपाही और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का पैगाम दिया।
 
दिल्ली के करोल बाग में स्थित आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बिया कॉलेज उनकी ही देन है। सबसे गौरव की बात यह है कि इस कॉलेज की नींव खुद महात्मा गांधी ने रखी थी। यह संस्थान आज भी देश में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के साझा विकास का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। संगोष्ठी में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि हकीम अजमल खाँ का जीवन हमें सिखाता है कि चिकित्सा सेवा केवल पैसा कमाने का जरिया नहीं बल्कि इंसानियत की सेवा का माध्यम है।
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ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महमूद हसन सिद्दीकी ने सभी मेहमानों का इस्तकबाल किया। उन्होंने संगठन की गतिविधियों के बारे में बताया कि कैसे वे राजस्थान के दूरदराज के इलाकों में यूनानी चिकित्सा को पहुँचाने का काम कर रहे हैं।
 
डीन प्रो. एम. आज़म अंसारी और सचिव डॉ. परवेज़ अख़्तर वारसी ने यूनानी शिक्षा के मौजूदा हालात पर चिंता भी जताई और समाधान भी सुझाए। उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी के डॉक्टरों को यूनानी की मूल आत्मा से जोड़े रखना बहुत जरूरी है। वक्ताओं का मानना था कि अगर युवा डॉक्टर इस पुरानी विधा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएंगे, तो यूनानी चिकित्सा का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।
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जयपुर के इस कार्यक्रम में अजमेर, जोधपुर, टोंक और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में चिकित्सक पहुँचे थे। आयोजन समिति ने यूनानी सेवा में लगे पुराने हकीमों और शिक्षकों को सम्मानित भी किया। पूरे कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. सैयद अब्दुल मुजीब ने अपने बेहद ही रोचक और प्रभावशाली अंदाज में किया। कार्यक्रम के अंत में नई नस्ल को इस तालीम की तरफ आकर्षित करने का संकल्प लिया गया। संगोष्ठी का समापन मुल्क में अमन-चैन की दुआ और शुक्रिया अदा करने के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल हकीम अजमल खाँ को एक सच्ची श्रद्धांजलि था बल्कि इसने जयपुर में यूनानी चिकित्सा के प्रचार-प्रसार और साझी विरासत को एक नई ऊर्जा दी।