आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों, सीमा विवाद और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने सीमा विवाद का “निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान” तलाशने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।
चीन और भारत दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले और परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देश हैं। दोनों के बीच हिमालयी क्षेत्र में करीब 3,800 किलोमीटर लंबी ऐसी सीमा है, जिसका कई हिस्सों में स्पष्ट निर्धारण नहीं हुआ है और जिसको लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहा है।
VIDEO | Beijing: NSA Ajit Doval and Chinese Foreign Minister Wang Yi hold Special Representatives’ talks on the border issue and improving bilateral ties.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 25, 2026
NSA Ajit Doval says, "I am very happy to be here for the 25th round of our talks, which are particularly important against… pic.twitter.com/NhZlyZXkyb
मतभेद कम करने और संवाद बढ़ाने पर जोर
चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि वांग यी और एनएसए अजित डोभाल के बीच सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों पर “संक्षिप्त लेकिन व्यापक, गहन, मैत्रीपूर्ण और ईमानदार” बातचीत हुई।
बैठक के दौरान वांग यी ने कहा कि चीन और भारत के संबंध अब केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका व्यापक वैश्विक और रणनीतिक महत्व है। उन्होंने दोनों देशों से संवाद बढ़ाने और मतभेदों को कम करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
वांग यी ने डोवाल से कहा कि दोनों पक्षों को अतीत के अनुभवों से सीखना चाहिए और द्विपक्षीय रिश्तों में सीमा विवाद को उचित स्थान देना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे दोनों देशों के संबंधों को बिना रुकावट, पीछे हटे या भटके आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
2020 के तनाव के बाद धीरे-धीरे सुधरे रिश्ते
भारत और चीन के संबंध जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई घातक सैन्य झड़प के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सीमा पर सैन्य तनाव बना रहा।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में हुए सैन्य वापसी समझौते के बाद सीमा पर चार साल से जारी सैन्य गतिरोध को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई।
पिछले वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब सात साल बाद चीन की यात्रा की थी। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत माना गया था।हालांकि, हाल में सामने आए एक नए सीमा विवाद ने दोनों देशों के बीच फिर से बयानबाजी और राजनयिक तनाव को बढ़ा दिया है।
India and China mull ways to unlock economic ties
— Sputnik India (@Sputnik_India) August 25, 2026
NSA Ajit Doval met with Chinese Vice President Han Zheng in Beijing to discuss ways to strengthen peace and tranquility along the border areas and further improve overall bilateral relations, including economic cooperation. pic.twitter.com/hSvYtRQUTM
2027 में भारत में होगी अगली सीमा वार्ता
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीमा वार्ता का अगला दौर 2027 में भारत में आयोजित किया जाएगा।
ताजा बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब भारत और चीन एक ओर सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक मतभेद भी बने हुए हैं।
स्रोत: रॉयटर्स