इमरान खान की बहन की अवमानना याचिका पर 16 सितंबर को सुनवाई

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 26-08-2026
Hearing on Imran Khan's sister's contempt petition on September 16.
Hearing on Imran Khan's sister's contempt petition on September 16.

 

इस्लामाबाद

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की बहन उजमा खान की अवमानना याचिका पर सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने उनकी जल्द सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया।

उजमा खान ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के उस आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें इमरान खान को अदियाला जेल से निकालकर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

रजिस्ट्रार कार्यालय ने कहा कि अवमानना याचिका की सुनवाई 16 सितंबर को उसी मुख्य मामले के साथ की जाएगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को यह निर्देश जारी किया था।

इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ करेगी। इसमें न्यायमूर्ति शाहिद वहीद, न्यायमूर्ति नईम अख्तर अफगान और न्यायमूर्ति इश्तियाक इब्राहिम शामिल हैं।

जल्द सुनवाई की मांग क्यों खारिज हुई?

उजमा खान ने अपनी याचिका की जल्द सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, रजिस्ट्रार कार्यालय ने बताया कि इसी श्रेणी की 94 आपराधिक मूल याचिकाएं पहले से अदालत में लंबित हैं और उजमा की याचिका इस श्रेणी में सबसे बाद में दाखिल की गई है।

आदेश में कहा गया कि मामलों की सुनवाई तय करने की नीति के अनुसार संबंधित श्रेणी में मामलों को उनकी बारी के आधार पर सूचीबद्ध किया जाता है। इसलिए उजमा की याचिका की बारी जल्द आने की संभावना कम थी।

हालांकि, चूंकि जिस मुख्य मामले में 18 अगस्त का आदेश दिया गया था, वह पहले से 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध है, इसलिए अवमानना याचिका को भी उसी दिन मुख्य मामले के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का फैसला किया गया।

इमरान की बिगड़ती सेहत का दिया हवाला

इससे पहले मंगलवार को रजिस्ट्रार कार्यालय ने उजमा की अवमानना याचिका पर कुछ आपत्तियां उठाई थीं, जिन्हें उसी दिन दूर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने मौजूदा सप्ताह में ही याचिका पर सुनवाई कराने के लिए आवेदन दिया।

उजमा ने अपनी अर्जी में दावा किया कि इमरान खान की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और मामले में देरी से उन्हें अपूरणीय नुकसान हो सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश की अवहेलना की है। उस आदेश में इमरान खान को दो दिनों के भीतर अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

याचिका में कहा गया कि यदि सरकार को अदालत के आदेश को लेकर किसी तरह का स्पष्टीकरण चाहिए था, तो उसे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए था, न कि आदेश के अनुपालन से पीछे हटना चाहिए था।

उजमा की ओर से यह भी दलील दी गई कि जब तक अदालत की ओर से आदेश पर रोक नहीं लगाई गई थी, तब तक उसके पालन को रोकने या आदेश के अनुपालन की समीक्षा मांगने का कोई औचित्य नहीं था।

PTI ने भी जल्द सुनवाई के लिए किया प्रयास

इस बीच PTI के वकील भी अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई कराने की कोशिश कर रहे हैं। PTI के अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर खान और वरिष्ठ वकील सरदार लतीफ खोसा ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश याह्या अफरीदी से मुलाकात कर याचिका की जल्द सुनवाई कराने का अनुरोध करने की कोशिश की, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी।

इसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, गोहर खान गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के बाहर मीडिया से बातचीत में गोहर खान ने कहा कि PTI चाहती है कि 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू किया जाए और इसी वजह से अवमानना याचिका की जल्द सुनवाई की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती थी कि उसी पीठ का गठन तुरंत किया जाए, ताकि मामले की सुनवाई गुरुवार को हो सके। गोहर खान ने इमरान खान की सेहत को महत्वपूर्ण बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री को उनके परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति देने की भी मांग की।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश को चुनौती देते हुए रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। सरकार ने इमरान खान को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश पर गंभीर आपत्ति जताई है और इसे “भेदभावपूर्ण प्रकृति” का आदेश बताया है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस आदेश में संशोधन करने की मांग की है।

अब 16 सितंबर की सुनवाई में इमरान खान की सेहत से जुड़े मूल मामले और सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिका—दोनों पर एक ही तीन सदस्यीय पीठ के सामने सुनवाई होगी।

स्रोत: द एक्सप्रेस ट्रिब्यून