ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 09-09-2026
Iran fired missiles at US bases in Jordan.
Iran fired missiles at US bases in Jordan.

 

वॉशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। ईरानी सरकारी मीडिया ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की नई कड़ी है। पिछले दो दिनों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की ओर से अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट करने का दावा किया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड से जब जॉर्डन स्थित एयरबेस पर हुए हमले के बारे में पूछा गया तो उसने फिलहाल कोई जानकारी देने से इनकार किया।

अमेरिकी सेना के मुताबिक जिन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, उनमें किविक, चारमीनार, होराइजन 1 और रिस्को शामिल हैं। ये टैंकर ओमान की खाड़ी में मौजूद थे। इसके अलावा डेर्या नाम के एक अन्य जहाज को भी अमेरिकी सेना ने निशाना बनाया। यह जहाज खार्ग द्वीप के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि हमले से पहले इन सभी पांच जहाजों के चालक दल को जहाज छोड़ने की चेतावनी दी गई थी।

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी अमेरिकी हमलों की पुष्टि की। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने दक्षिणी बंदरगाह जास्क और फारस की खाड़ी में खार्ग द्वीप के आसपास कम से कम तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इन जहाजों पर मौजूद कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

ईरान के हमलों का जवाब दिया जाएगा: मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा है कि ईरान के हमलों को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाएगा। मंगलवार को कोलंबिया की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिशों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि जब भी ईरान अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश करेगा, अमेरिका उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा। रुबियो ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भी इस तरह की सैन्य कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

इस बीच ईरान मामलों के विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविच ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी जवाबी हमलों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई दोनों देशों को और गंभीर सैन्य टकराव की ओर ले जा सकती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं है। उनके मुताबिक हर सैन्य कार्रवाई वॉशिंगटन और तेहरान को ऐसी स्थिति के करीब ले जा सकती है, जिसे बाद में नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।

जास्क के पास फिर तेल टैंकर पर हमला

ईरानी सरकारी टेलीविजन के एक पत्रकार ने जास्क से बताया कि यकबेनी के तट के पास एक ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। इलाके में एक और धमाका भी सुना गया, हालांकि तत्काल यह स्पष्ट नहीं हो सका कि धमाका कहां और किस कारण से हुआ।

बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि जास्क के समुद्री क्षेत्र के पास एक दूसरे तेल टैंकर को भी अमेरिकी सेना ने निशाना बनाया। दोनों जहाजों के चालक दल को लाइफबोट के जरिए जास्क तट की ओर ले जाया जा रहा था।

इसी दौरान खार्ग द्वीप के एंकरज क्षेत्र में एक अन्य ईरानी तेल टैंकर पर भी हमले की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, हमले के तुरंत बाद उसके चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

इन घटनाओं ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुवैत और बहरीन के पास जहाजों को चेतावनी

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना ने मंगलवार को कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के आसपास मौजूद तेल टैंकरों के चालक दल को तत्काल जहाज खाली करने की चेतावनी दी।

ईरानी पक्ष ने कहा कि अमेरिकी हमलों के जवाब में इन जहाजों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरान ने कुवैत और बहरीन पर अमेरिकी सेनाओं को अपने क्षेत्र में जगह देने और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में मदद करने का आरोप लगाया है।

इससे पहले शनिवार को अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि उसने तीन ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिका के अनुसार, यह कार्रवाई उस समय की गई जब अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की गई।

अमेरिकी सेना ने उस समय चेतावनी दी थी कि जरूरत पड़ने पर वह ईरान के सीमित और असुरक्षित तेल बेड़े को नष्ट कर सकती है।

इसके जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास एक नया “बहिष्करण क्षेत्र” घोषित करने की योजना की बात कही थी। ईरान के अनुसार, इस क्षेत्र का उद्देश्य उन जहाजों को नियंत्रित करना होगा जो जलडमरूमध्य से होकर गुजरना चाहते हैं।

ट्रंप की रणनीति में सैन्य और आर्थिक दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सैन्य दबाव के साथ आर्थिक प्रतिबंधों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

ईरान के साथ छह महीने से अधिक समय से जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़ी कई नई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए।

इन प्रतिबंधों के दायरे में दो दर्जन से अधिक वाणिज्यिक और निजी एयरलाइंस तथा विदेशी कार्गो सेवा प्रदाता शामिल हैं। अमेरिका का उद्देश्य ईरान को उसके बचे हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों से अलग करना और उसकी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है।

हालांकि, सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ने के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दुनिया की नजर

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता था।

यही कारण है कि यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 99.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी ने उसके तेल निर्यात को प्रभावित किया है। दूसरी ओर अमेरिकी सेना ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाले कुछ जहाजों की आवाजाही में मदद कर रही है।

तेहरान चाहता है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज उसके बताए मार्ग का इस्तेमाल करें। युद्ध से पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था।

अब अमेरिकी और ईरानी सैन्य गतिविधियों के कारण यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में शामिल हो गया है। ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले और अमेरिका की ओर से ईरानी तेल टैंकरों पर कार्रवाई के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है।

विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, समुद्री व्यापार में बाधा और क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।