लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हमले की भारत ने की निंदा, निष्पक्ष जांच की मांग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 05-06-2026
India Condemns Attack on UN Peacekeepers in Lebanon, Demands Impartial Investigation
India Condemns Attack on UN Peacekeepers in Lebanon, Demands Impartial Investigation

 

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली:

भारत ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत तैनात शांति सैनिकों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। भारत ने इस हमले में जान गंवाने वाले सर्बियाई शांति सैनिक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायल कर्मियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा तथा उनकी गरिमा का सम्मान किया जाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने सभी पक्षों से अपील की कि वे संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जनादेश के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। भारत ने इस हमले की तत्काल, निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने पर जोर दिया।

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब यूएनआईएफआईएल ने गुरुवार को घोषणा की कि दक्षिण-पूर्वी लेबनान के मरजायून क्षेत्र के निकट मोर्टार गोले गिरने से गंभीर रूप से घायल हुए एक शांति सैनिक की मौत हो गई। हमले में दो अन्य शांति सैनिक भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार यूएनआईएफआईएल के चिकित्सा केंद्र में चल रहा है।

यूएनआईएफआईएल ने एक बयान में कहा कि घटना की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। मिशन ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और संयुक्त राष्ट्र कर्मियों एवं संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

बयान में कहा गया कि शांति सैनिकों को खतरे में डालने वाली किसी भी कार्रवाई से बचना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। यूएनआईएफआईएल ने स्पष्ट किया कि शांति सैनिकों पर जानबूझकर किए गए हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का गंभीर उल्लंघन हैं तथा इन्हें युद्ध अपराध की श्रेणी में भी रखा जा सकता है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मार्च से क्षेत्र में बढ़े संघर्ष के बाद से अब तक यूएनआईएफआईएल के सात शांति सैनिकों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

गुटेरेस ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शांति सैनिक संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान और इजरायल सीमा पर लगातार बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हालिया हमला क्षेत्र की नाजुक सुरक्षा स्थिति को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा रहा है।

भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में तैनात कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसे हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।