गुलाम कादिर
हज और उमराह के दौरान मक्का और मदीना पहुंचने वाले हर जायरीन का मुख्य उद्देश्य अल्लाह की इबादत होता है। इस पवित्र यात्रा के धार्मिक फर्ज पूरे करने के बाद हर किसी की दिली ख्वाहिश होती है कि वह कुछ ऐसी ऐतिहासिक जगहों का दीदार करे जो इस्लामी इतिहास और आस्था के लिहाज से बेहद खास हों। मदीना में मौजूद एक ऐसी ही बेमिसाल जगह है किंग फहद गौरवशाली कुरान मुद्रण परिसर।
इसे आम बोलचाल में मदीना कुरान फैक्ट्री भी कहा जाता है। यह पवित्र शहर मदीना के बाहरी इलाके में स्थित है। लगभग ढाई लाख वर्ग मीटर में फैला यह परिसर आधुनिक तकनीक और इस्लामी सभ्यता का एक अनोखा संगम है। यह सिर्फ एक छपाई का कारखाना नहीं है बल्कि अल्लाह के पाक कलाम को सहेजने और उसे दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का सबसे बड़ा जरिया है।

एक महान सोच की शुरुआत
इस विशाल परिसर की नींव साल 1985में शाह फहद बिन अब्दुलअजीज के शासनकाल के दौरान रखी गई थी। उनका सपना एक ऐसा केंद्र बनाने का था जो पूरी दुनिया में पवित्र कुरान के शुद्ध और प्रामाणिक प्रकाशन के लिए समर्पित हो। आज यह केंद्र दुनिया में कुरान छापने वाला सबसे बड़ा संस्थान बन चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के मुसलमानों तक बिना किसी शुल्क के और बेहतरीन गुणवत्ता के साथ कुरान की प्रतियां पहुंचाना है।
यह स्थान मदीना आने वाले तीर्थयात्रियों के सफर का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। इस परिसर के आसपास का माहौल बेहद शांत और सुकून देने वाला है जो यहां आने वाले लोगों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव से भर देता है। पवित्र शहर मदीना वैसे भी अपने ऐतिहासिक और रूहानी स्थलों के लिए मशहूर है। ऐसे में इस फैक्ट्री को देखना हर जायरीन के लिए बेहद खास बन जाता है।

परंपरा और आधुनिक तकनीक का तालमेल
मदीना की इस कुरान फैक्ट्री में छपाई के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। प्री-प्रेस डिजिटल प्रोसेसिंग से लेकर ऑटोमैटिक बाइंडिंग तक हर कदम पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि पवित्र कुरान की पवित्रता और उसकी लिखावट की खूबसूरती में जरा सी भी कमी न आए। यहां तेज गति से काम करने वाली आधुनिक मशीनों और पारंपरिक अरबी कैलीग्राफी का एक ऐसा तालमेल देखने को मिलता है जो किसी को भी हैरान कर सकता है।
इस परिसर की सबसे बड़ी खूबी यहां का कड़ा क्वालिटी कंट्रोल है। कारखाने के भीतर शुद्धता के मानकों का स्तर बेहद ऊंचा है। छपाई के बाद हर एक प्रति की बारीकी से जांच की जाती है। इसमें टेक्स्ट की शुद्धता और छपाई की क्वालिटी दोनों शामिल हैं। इस काम के लिए देश-विदेश के जाने-माने कैलीग्राफर्स और इस्लामिक विद्वान चौबीसों घंटे इंजीनियरों और तकनीशियनों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि अंतिम उत्पाद में एक भी शब्द या मात्रा की गलती न रह जाए।

करोड़ों प्रतियों का सालाना प्रकाशन
किंग फहद कुरान परिसर से हर साल करीब एक करोड़ यानी दस मिलियन से ज्यादा कुरान की प्रतियां छापी जाती हैं। इन प्रतियों को दुनिया भर की मस्जिदों, इस्लामिक केंद्रों और जरूरतमंद लोगों को बिल्कुल मुफ्त में बांटा जाता है। अपनी स्थापना से लेकर अब तक यह संस्थान 30करोड़ से अधिक कुरान की प्रतियां प्रकाशित कर चुका है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसके उत्पादन की क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
यह कारखाना सिर्फ अरबी भाषा में पूरी कुरान ही नहीं छापता बल्कि यहां कई अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियां भी तैयार होती हैं। इनमें कुरान के अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद, ऑडियो टेप, दृष्टिहीन लोगों के लिए ब्रेल लिपि में तैयार कुरान और चुनिंदा सूरतों वाली छोटी पॉकेट बुकलेट्स भी शामिल हैं।
इस संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है कुरान का दुनिया की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करना। अब तक 70से ज्यादा भाषाओं में कुरान का अनुवाद यहां से प्रकाशित किया जा चुका है। इसकी वजह से अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के लोग भी अल्लाह के संदेश को आसानी से समझ पा रहे हैं।

विद्वानों और कैलीग्राफर्स का अहम योगदान
इस पूरे परिसर को सुचारू रूप से चलाने में इस्लामी विद्वानों की एक बहुत बड़ी टीम काम करती है। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि कुरान का हर संस्करण पूरी तरह से प्रामाणिक और त्रुटिहीन हो। उनके साथ ही पारंपरिक अरबी कैलीग्राफी के उस्ताद भी यहां अपनी सेवाएं देते हैं। ये कलाकार अपनी बारीक कला के जरिए कुरान की लिखावट की सदियों पुरानी खूबसूरती को जिंदा रखे हुए हैं।
फैक्ट्री का सबसे बड़ा सिद्धांत यह है कि पवित्र पुस्तक की पहुंच हर इंसान तक हो। अपने इसी सामाजिक और धार्मिक दायित्व को निभाते हुए यह संस्थान दुनिया के हर महाद्वीप में मुफ्त प्रतियां भेजता है। दुनिया भर की मस्जिदों और संस्थाओं से आने वाली मांगों की पहले समीक्षा की जाती है। इसके बाद उनकी जरूरत और जगह के हिसाब से कूरियर के जरिए खेप भेजी जाती है।

शोध और शिक्षा का बड़ा केंद्र
यह परिसर सिर्फ छपाई तक सीमित नहीं है बल्कि यह कुरान से जुड़े विज्ञान और शोध का भी एक बड़ा केंद्र है। यहां के शिक्षाविद और शोधकर्ता प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और कैलीग्राफी के इतिहास पर लगातार रिसर्च करते हैं। नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ने के लिए समय-समय पर वर्कशॉप भी आयोजित की जाती हैं जहां छात्र कैलीग्राफी के गुर सीखते हैं।
आम लोगों और पर्यटकों के लिए भी यह जगह हमेशा खुली रहती है। मदीना आने वाले जायरीन और शैक्षणिक समूह यहां आकर पूरी छपाई प्रक्रिया को अपनी आंखों से देख सकते हैं। इसके लिए बकायदा गाइडेड टूर की व्यवस्था होती है।
गाइड आगंतुकों को डिजिटल कंपोजिंग से लेकर बाइंडिंग और पैकेजिंग तक का पूरा सफर दिखाते हैं। यहां काम करने का तरीका और वहां का आध्यात्मिक माहौल लोगों को गहराई से प्रभावित करता है। मदीना की जियारत पर आने वाले लोग अपने सफरनामे में इस जगह को शामिल करना कभी नहीं भूलते।

वैश्विक प्रभाव और डिजिटल बदलाव
किंग फहद परिसर का असर आज पूरी दुनिया में देखा जा सकता है। इसके जरिए सऊदी अरब दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी एक खास पहचान बनाए हुए है। यह पहचान किसी राजनीतिक वजह से नहीं बल्कि पवित्र ग्रंथ की निस्वार्थ सेवा की वजह से है। समय के साथ बदलते हुए इस संस्थान ने अब डिजिटल दुनिया में भी कदम रख दिया है।
हाल के दिनों में परिसर ने अपने आधिकारिक ऐप्स और ऑनलाइन पीडीएफ प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। अब दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति अपने स्मार्टफोन पर कुरान को पढ़ और सुन सकता है। यह बदलाव दिखाता है कि संस्थान अपनी परंपराओं का सम्मान करने के साथ-साथ आधुनिक जीवनशैली की जरूरतों को भी बखुदा समझता है।
इसके अलावा पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अब यहां रिसाइकिल होने वाले कागज और इको-फ्रेंडली स्याही का इस्तेमाल भी शुरू किया गया है ताकि धरती को नुकसान पहुंचाए बिना यह नेक काम जारी रहे। मदीना की यह कुरान फैक्ट्री सिर्फ मशीनों का एक समूह नहीं है बल्कि इसमें एक रूह बसती है।
यहां काम करने वाला हर कर्मचारी अपनी ड्यूटी को सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि अल्लाह की इबादत और खिदमत मानता है। छपाई के शांत हॉलों से लेकर पैकिंग की मेजों तक हर जगह एक अजीब सा रूहानी सुकून महसूस होता है।
भविष्य की योजनाओं को देखते हुए इसका और विस्तार किया जा रहा है ताकि आने वाले समय में दुनिया के हर व्यक्ति तक अल्लाह का पैगाम बेहद आसानी से पहुंच सके। मदीना आने वाले हर मुसाफिर के लिए यह यात्रा आस्था, शुद्धता और समर्पण की एक कभी न भूलने वाली दास्तान बन जाती है।