तीसरे स्थान का मैच तय करेगा कि कौन होगा गोल्डन बूट विजेता, फैसला आज

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-07-2026
The third-place match will decide who becomes the Golden Boot winner.
The third-place match will decide who becomes the Golden Boot winner.

 

आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली

फीफा विश्व कप का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है। टूर्नामेंट में अब सिर्फ दो सबसे बड़े मुकाबले बचे हैं। अगले रविवार को होने वाले फाइनल महामुकाबले में अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें खिताब के लिए आमने-सामने होंगी। लेकिन इस खिताबी भिड़ंत से ठीक एक दिन पहले यानी आज शनिवार को एक और दिलचस्प मैच होना है। यह मैच तीसरे स्थान के लिए फ्रांस और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा।

आमतौर पर तीसरे स्थान के लिए होने वाले मैचों को लेकर टीमें बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होती हैं। इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल के बयानों से भी यह साफ झलकता है। अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल में मिली हार के बाद उन्होंने साफ कहा था कि इस समय हमारी टीम का कोई भी खिलाड़ी यह मैच नहीं खेलना चाहता है। यही स्थिति फ्रांस के खेमे की भी होगी क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना सिर्फ और सिर्फ फाइनल में पहुंचना होता है।

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गोल्डन बूट की रेस में क्यों अहम है यह मैच

भले ही दोनों टीमों के कोच इस मैच को बहुत ज्यादा तवज्जो न दे रहे हों लेकिन फुटबॉल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए यह मैच बेहद खास है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि तीसरे स्थान के मैच में किए गए गोल भी गोल्डन बूट की रेस में गिने जाते हैं।

विश्व कप के सबसे सर्वश्रेष्ठ गोल स्कोरर को मिलने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की दौड़ में इस समय दोनों टीमों के चार दिग्गज खिलाड़ी मजबूती से बने हुए हैं। इनमें फ्रांस के किलियन म्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले शामिल हैं जबकि इंग्लैंड की ओर से हैरी केन और जूड बेलिंघम दावेदार हैं।

अगर मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो किलियन म्बाप्पे आठ गोल के साथ अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेस्सी के साथ शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। हालांकि मेस्सी ने म्बाप्पे के मुकाबले एक असिस्ट अधिक किया है।

इसके कारण मेस्सी इस रेस में अभी थोड़ा आगे चल रहे हैं। तीसरे स्थान के मैच में म्बाप्पे के पास मेस्सी को पीछे छोड़ने का एक सुनहरा मौका होगा। वहीं नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड सात गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन उनकी टीम पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है जिसके कारण उनके आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं है।

इन दिग्गजों के बीच है कड़ी टक्कर

इंग्लैंड की टीम के दो सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी जूड बेलिंगहैम और हैरी केन छह छह गोल करके तीसरे स्थान पर बराबरी पर चल रहे हैं। इनके अलावा फ्रांस के विंगर उस्मान डेम्बेले पांच गोल के साथ रेस में बने हुए हैं।

स्पेन के स्ट्राइकर मिकेल वर्शावल के भी पांच गोल हैं लेकिन उनका मैच रविवार को फाइनल में होगा। ऐसे में शनिवार को होने वाले मुकाबले में फ्रांस और इंग्लैंड अपने किन प्रमुख खिलाड़ियों को मैदान पर उतारते हैं इसी बात से तय होगा कि इस बार गोल्डन बूट की ट्रॉफी किसके हाथ लगेगी।

इतिहास गवाह है कि कई बार तीसरे स्थान के मैचों ने ही गोल्डन बूट का फैसला किया है। साल 2018 के विश्व कप में जब इंग्लैंड का सामना बेल्जियम से हुआ था तो तत्कालीन कोच गैरेथ साउथगेट ने टीम में पांच बड़े बदलाव किए थे। उस समय हैरी केन ने मैच की शुरुआत की थी लेकिन वे गोल करने में नाकाम रहे थे। हालांकि वे उस साल गोल्डन बूट जीतने में सफल रहे थे।

इतिहास के पन्नों में तीसरे स्थान के मैच का महत्व

विश्व कप के इतिहास को देखें तो पिछले सात गोल्डन बूट विजेताओं ने तीसरे स्थान के मैच में गोल दागकर अपनी स्थिति मजबूत की थी। दिलचस्प बात यह है कि उन सात में से चार खिलाड़ियों को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने के लिए उस आखिरी मैच में गोल करना बेहद जरूरी था।

जर्मनी के थॉमस मुलर ने साल 2010 में यही कारनामा किया था। इसके अलावा 1998 में क्रोएशिया के देवोर सुकर और 1990 में इटली के साल्वाटोर शिलैसी ने भी तीसरे स्थान के मैच में गोल करके गोल्डन बूट अपने नाम किया था। साल 1938 में ब्राजील के लियोनिडास को भी इसी मैच में गोल करने का बड़ा फायदा मिला था।

कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे जिन्होंने तीसरे स्थान के मैच में गोल तो किया लेकिन अगर वे गोल नहीं भी करते तब भी वे शीर्ष पर बने रहते। इनमें 1974 में पोलैंड के ग्रेगोइरे लाटो और 1966 में पुर्तगाल के यूसेबियो का नाम शामिल है। साल 1958 में फ्रांस के महान खिलाड़ी जस्ट फॉन्टेन ने भी तीसरे स्थान के मैच में गोल करके इतिहास रचा था।

गोल्डन बूट की मौजूदा स्थिति पर एक नजर

  • लियोनेल मेस्सी (अर्जेंटीना) - आठ गोल, चार असिस्ट
  • किलियन म्बाप्पे (फ्रांस) - आठ गोल, तीन असिस्ट
  • एर्लिंग हालैंड (नॉर्वे) - सात गोल
  • जूड बेलिंघम (इंग्लैंड) - छह गोल, एक असिस्ट
  • हैरी केन (इंग्लैंड) - छह गोल, एक असिस्ट
  • उस्मान डेम्बेले (फ्रांस) - पांच गोल, दो असिस्ट
  • मिकेल वर्ज़ाबल (स्पेन) - पांच गोल, एक असिस्ट

अब शनिवार को होने वाले मैच में पूरी दुनिया की नजरें फ्रांस और इंग्लैंड के स्ट्राइकर्स पर टिकी होंगी। देखना होगा कि म्बाप्पे या केन में से कौन बाजी मारता है।