आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली
राजधानी नई दिल्ली में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक बहुत ही अहम बैठक हुई। आगामी 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में बिम्सटेक देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक का सफल आयोजन किया गया। इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजितडोभाल ने की।
इस खास बैठक में बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। बैठक में बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के सुरक्षा प्रमुख एक साथ एक मंच पर नजर आए। सभी देशों ने मिलकर बदलते वैश्विक परिवेश में क्षेत्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने पर अपनी सहमति जताई।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बहुत तेजी से बदल रही हैं। बिम्सटेक संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक बहुत मजबूत पुल की तरह काम करता है। ये दोनों ही क्षेत्र हिंद महासागर के सबसे महत्वपूर्ण और जीवंत हिस्सों में गिने जाते हैं।
पिछले कुछ सालों में इस संगठन ने क्षेत्रीय सुरक्षा के मामले में बहुत बेहतरीन काम किया है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन, परिवहन, व्यापार संपर्क, तकनीकी सहयोग और आपसी जनसंपर्क बढ़ाने में भी इस संगठन ने बहुत अहम भूमिका निभाई है। आज की बैठक ने इस सहयोग को एक नए स्तर पर पहुँचाने का काम किया है।
सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा
बैठक की शुरुआत में बिम्सटेक के महासचिव ने सुरक्षा क्षेत्र में चल रहे सहयोग की वर्तमान स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने सभी सदस्य देशों को विभिन्न क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सुरक्षा प्रमुखों ने इस बात पर संतोष जताया कि सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने की दिशा में अच्छा काम हो रहा है। इसके साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में इन प्रयासों को और अधिक व्यावहारिक कैसे बनाया जाए ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 16, 2026
आतंकवाद और साइबर खतरों पर रणनीतिक चर्चा
इस बैठक का सबसे मुख्य एजेंडा आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटना रहा। सभी देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने आतंकवाद के खिलाफ व्यावहारिक और परिणाम उन्मुख समाधान खोजने पर बहुत गहराई से चर्चा की।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आज के समय में आतंकवाद सिर्फ जमीनी खतरा नहीं रह गया है बल्कि यह डिजिटल स्पेस में भी पैर पसार रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा डोमेन में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक साझा रणनीति बनाने पर सहमति बनी।
सुरक्षा प्रमुखों ने नए और उभरते हुए खतरों से निपटने के तरीकों पर भी अपने विचार साझा किए। इसमें यह तय किया गया कि सभी देश तकनीकी स्तर पर एक दूसरे की मदद करेंगे। साइबर हमलों को रोकने के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने की बात भी कही गई।
इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार होने वाले संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए आपसी तालमेल को और ज्यादा मजबूत करने का फैसला लिया गया।
समुद्री सहयोग और आपदा प्रबंधन के नए नियम
इस बैठक में दो बहुत ही महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई है जो आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को बदल देंगे। पहला फैसला मानवीय सहायता और आपदा राहत के समुद्री घटक के लिए दिशा-निर्देशों को अपनाना रहा।
इन नए नियमों की मदद से बिम्सटेक के सदस्य देश किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय बहुत ही तेज गति से राहत और बचाव कार्य शुरू कर सकेंगे। अक्सर देखा गया है कि प्रक्रियाओं में देरी के कारण आपदा के समय नुकसान ज्यादा होता है लेकिन ये नए नियम इस देरी को पूरी तरह से खत्म कर देंगे।
इसके साथ ही सुरक्षा प्रमुखों ने समुद्र में बातचीत के दौरान समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आचरण पर मार्गदर्शक सिद्धांतों के एक सेट को भी मंजूरी दी। ये सिद्धांत सदस्य देशों के बीच समुद्री संपर्कों के दौरान सुरक्षा को बढ़ावा देने और दूरदर्शिता बढ़ाने में मदद करेंगे। इससे समुद्र में गश्त के दौरान विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और आपसी भरोसा बढ़ेगा।
— Sidhant Sibal (@sidhant) July 16, 2026
भविष्य की राह और एकजुटता का संकल्प
अगले साल बिम्सटेक संगठन अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। इस ऐतिहासिक पड़ाव से ठीक पहले हुई यह बैठक बहुत मायने रखती है। बैठक के अंत में सभी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपना संकल्प दोहराया। सभी ने एक सुर में कहा कि वे विभिन्न सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सहयोग और ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया को और तेज करेंगे।
संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने और एक लचीला सुरक्षा तंत्र बनाने के लिए सभी देश मिलकर काम करते रहेंगे। नई दिल्ली में हुई यह बैठक साबित करती है कि दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के देश अपने साझा भविष्य और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं। यह आयोजन आने वाले समय में पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।