भिश्ती समाज के हक की लड़ाई का चेहरा बने सईद मानव

Story by  फरहान इसराइली | Published by  [email protected] | Date 10-06-2026
Saeed Manav has become the face of the fight for the rights of the Bhishti community.
Saeed Manav has become the face of the fight for the rights of the Bhishti community.

 

फरहान इसराइली | जयपुर

राजस्थान के इतिहास में ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक पद या सरकारी ताकत के समाज में गहरा असर छोड़ा। भिश्ती समाज के लिए मोहम्मद सईद मानव ऐसा ही एक नाम हैं। पिछले चार दशक से अधिक समय से वह उस समुदाय की आवाज बने हुए हैं जिसकी पहचान आधुनिक दौर में धीरे धीरे धुंधली पड़ती जा रही थी।

आज राजस्थान में भिश्ती समाज, ओबीसी आरक्षण, सामाजिक अधिकार, शिक्षा और सामुदायिक संगठन की बात होती है तो सईद मानव का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने केवल अपने समाज के लिए ही नहीं बल्कि इंसानियत के आधार पर हर जरूरतमंद की मदद को अपना मिशन बनाया।

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सईद मानव

अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चमड़े की मशक में पानी ले जाते भिश्ती आज भी दिखाई दे जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह समाज कभी पूरे उत्तर भारत की जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था। फारसी शब्द बहिश्त से निकला भिश्ती शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता था जो लोगों तक पानी पहुंचाते थे। कई क्षेत्रों में इन्हें सक्का और अब्बासी भी कहा जाता है।

जब नल, पाइपलाइन और आधुनिक जल आपूर्ति व्यवस्था नहीं थी तब भिश्ती समाज ही महलों, किलों, सैनिक छावनियों और बस्तियों तक पानी पहुंचाता था। भैंस या बकरे की खाल से बनी मशक उनके पेशे की पहचान थी। राजाओं और नवाबों के दौर में उन्हें सम्मान और विशेष दर्जा प्राप्त था।

लेकिन समय बदला और आधुनिक तकनीक ने सदियों पुराने इस पेशे को लगभग खत्म कर दिया। इसके साथ ही समाज की पहचान भी कमजोर पड़ने लगी।ऐसे समय में सईद मानव ने इस समुदाय के इतिहास और अस्तित्व को बचाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई।

जयपुर के घाटगेट क्षेत्र में रहने वाले सईद मानव का मूल नाम मोहम्मद सईद है। मानव उपनाम उन्हें किसी संस्था या सरकार ने नहीं दिया। यह पहचान उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के कारण मिली। वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी विजय कुमार शर्मा मानव आचार्य तथा समाजसेवी श्रीचंद जैन ने उनके काम को देखकर उन्हें मानव नाम से संबोधित किया। धीरे धीरे यह नाम उनकी स्थायी पहचान बन गया।

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भिश्ती समाज का शिजरा

सईद मानव कहते हैं कि उन्हें जीवन में कई सम्मान मिले लेकिन मानव नाम उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है क्योंकि यह इंसानियत का प्रतीक है।

समाज सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने पिता हाजी नूर मोहम्मद से मिली। हाजी नूर मोहम्मद भिश्ती समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। सत्तर के दशक में उन्होंने समाज को संगठित करने के लिए महत्वपूर्ण काम किया। बचपन से ही सईद अपने पिता के साथ बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों में जाते थे। यहीं से उनके भीतर नेतृत्व और जनसेवा की भावना विकसित हुई।

नब्बे के दशक में भिश्ती समाज पहचान के संकट से गुजर रहा था। समाज के विभिन्न संगठन अलग अलग नामों से काम कर रहे थे। कहीं सक्का समाज लिखा जाता था तो कहीं अब्बासी समाज। इससे समुदाय की मूल पहचान कमजोर हो रही थी। इसी दौरान राजस्थान में भिश्ती समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की मांग तेज हुई।

जब समाज के प्रतिनिधि राजस्थान पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष पहुंचे तो आयोग ने उनसे ऐतिहासिक और सामाजिक प्रमाण मांगे। यही वह क्षण था जिसने सईद मानव की सोच बदल दी। उन्होंने महसूस किया कि अधिकारों की लड़ाई केवल भावनाओं से नहीं बल्कि दस्तावेजों और तथ्यों से जीती जाती है।

इसके बाद उन्होंने राजस्थान भर में भिश्ती समाज के इतिहास की खोज शुरू की। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, टोंक, भरतपुर और कई अन्य जिलों में जाकर उन्होंने पुराने रिकॉर्ड, वंशावलियां, मस्जिदों के दस्तावेज, ताजियों के रिकॉर्ड और ऐतिहासिक प्रमाण जुटाए। कई दस्तावेजों को खोजने में महीनों लग गए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

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राजस्थान के तत्तकालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलौत के समक्ष समाज की समस्याएं रखते सईद मानव और समाज के दूसरे लोग

वर्ष 1994 में राजस्थान भिश्ती समाज सुधार समिति का गठन हुआ। सईद मानव इसके संस्थापक प्रदेशाध्यक्ष बने। यह संगठन आगे चलकर पूरे आंदोलन का केंद्र बना। लंबे संघर्ष और व्यापक सर्वेक्षण के बाद वर्ष 2000 में भिश्ती समाज को राजस्थान की ओबीसी सूची में शामिल कर लिया गया।

सईद मानव मानते हैं कि यह केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं थी बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा फैसला था। इससे शिक्षा, छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरियों और सामाजिक अवसरों के नए रास्ते खुले।

उनका नाम एक और वजह से चर्चा में रहा। वर्ष 2005 में जयपुर में आयोजित एक धरने के दौरान उन्होंने हाजी हबीब मियां को सार्वजनिक रूप से सामने लाया। हबीब मियां को उस समय दुनिया के सबसे बुजुर्ग लोगों में गिना जाता था। उनकी उम्र को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में व्यापक चर्चा हुई।

सईद मानव ने हबीब मियां के जन्म, सेवा और पेंशन से जुड़े दस्तावेज जुटाकर उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ। आज भी सईद मानव हबीब मियां की स्मृति में स्मारक और सार्वजनिक स्थल बनाए जाने की मांग करते हैं।

घाटगेट स्थित भिश्तियों की बड़ी मस्जिद से भी उनका गहरा जुड़ाव है। वह वर्षों से इसकी प्रबंधन व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मस्जिद की देखरेख और सामाजिक गतिविधियों को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए हैं।

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शिक्षा को लेकर भी उनकी विशेष रुचि रही है। राजस्थान भिश्ती समाज सुधार समिति और अन्य सामाजिक संगठनों के सहयोग से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाता है। सामूहिक विवाह सम्मेलन उनके सामाजिक अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 2004 से शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक लगभग पांच सौ जोड़ों के विवाह और निकाह संपन्न कराए जा चुके हैं।

जनहित के मुद्दों पर भी उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। फॉगिंग कांड, गंदे पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में उन्होंने प्रभावित लोगों की आवाज उठाई। कई मामलों में प्रशासनिक स्तर से लेकर न्यायालय तक संघर्ष किया।

कोरोना महामारी के दौरान भी वे राहत कार्यों और समाजसेवियों के सम्मान कार्यक्रमों में सक्रिय रहे। राजस्थान के अनेक शहरों में उन्हें सामाजिक और शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है।

आज तीन बेटों और छह बेटियों के पिता सईद मानव का सबसे बड़ा सपना भिश्ती समाज के लिए एक स्थायी समाज भवन बनाना है। वह चाहते हैं कि वहां शिक्षा, रोजगार प्रशिक्षण, सामूहिक विवाह, शोध और युवा मार्गदर्शन के कार्यक्रम संचालित हों।

चार दशक से अधिक लंबे उनके सामाजिक सफर को देखें तो यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं लगती। यह उस समाज की कहानी है जिसने अपनी खोती हुई पहचान को फिर से हासिल किया। सईद मानव का संघर्ष इस बात का उदाहरण है कि इतिहास, पहचान और अधिकारों की लड़ाई अगर दृढ़ संकल्प के साथ लड़ी जाए तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदला जा सकता है।

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भिश्ती समाज की पहचान बचाने वाले सईद मानव

AEO Summary

कौन हैं सईद मानव?
राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता सईद मानव पिछले चार दशकों से भिश्ती समाज के इतिहास, पहचान, शिक्षा, आरक्षण और सामाजिक अधिकारों के लिए काम कर रहे हैं।

भिश्ती समाज क्या है?
भिश्ती समाज पारंपरिक रूप से पानी पहुंचाने का काम करता था। यह समाज मशक में पानी भरकर लोगों, सेनाओं और नगरों तक जल आपूर्ति करता था।

सईद मानव की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
ऐतिहासिक दस्तावेज जुटाकर और सामाजिक अभियान चलाकर भिश्ती समाज को राजस्थान में ओबीसी श्रेणी में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।

भिश्ती समाज के लिए उनका सपना क्या है?
एक स्थायी समाज भवन की स्थापना, जहां शिक्षा, रोजगार, सामूहिक विवाह और युवा मार्गदर्शन कार्यक्रम संचालित हो सकें।