प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति : पैसों की कमी नहीं रोकेगी बच्चों की पढ़ाई

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 06-07-2026
Pre-Matric Scholarship: Lack of funds will not hinder children's education.
Pre-Matric Scholarship: Lack of funds will not hinder children's education.

 

मलिक असगर हाशमी

देश के भीतर हुए कई हालिया अध्ययन एक चिंताजनक हकीकत बयां करते हैं। इन अध्ययनों के मुताबिक हमारे समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों में बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। इसमें भी अल्पसंख्यक और विशेषकर मुस्लिम समुदाय के भीतर स्कूल छोड़ने यानी ड्रॉप आउट की दर काफी अधिक देखी गई है। गरीबी और आर्थिक तंगी के कारण कई होनहार बच्चे अपनी शुरुआती शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते हैं।

कक्षा 10 यानी मैट्रिक के बाद ही किसी भी छात्र के लिए भविष्य के असली दरवाजे खुलते हैं। आगे की उच्च शिक्षा या करियर की दिशा इसी पड़ाव से तय होती है। ऐसे में यदि कोई बच्चा इस मुख्य गेट को पार करने से पहले ही अपना रास्ता बदल ले, तो उसका पूरा भविष्य अंधकार में डूब सकता है।

शिक्षा के बिना वह बच्चा समाज की मुख्यधारा से कट जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को इसी संकट से बचाने के लिए केंद्र सरकार एक बेहद प्रभावी योजना चला रही है। इस योजना का नाम है प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना।

सरकार का मूल उद्देश्य प्री-मैट्रिक स्तर पर ही छात्रवृत्ति प्रदान करना है। इससे बच्चों और उनके अभिभावकों दोनों को एक बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। इस छात्रवृत्ति के जरिए सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के माता-पिता के वित्तीय बोझ को कम करना चाहती है।

जब पढ़ाई का खर्च सरकार उठाती है, तो गरीब माता-पिता भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो जाते हैं। यह योजना न केवल बच्चों की स्कूली शिक्षा को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद करती है, बल्कि उनकी मजबूत शैक्षिक नींव भी रखती है।

शिक्षा के माध्यम से मिलने वाला यह सशक्तिकरण आगे चलकर रोजगार के बाजार में उन्हें समान अवसर दिलाता है, जिससे पूरे समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आ सकता है।

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?

यह छात्रवृत्ति पूरे भारत में लागू है। देश के किसी भी सरकारी या मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में कक्षा 1 से कक्षा 10 तक पढ़ने वाले छात्र इसके लिए पात्र हैं। इसमें सरकार द्वारा पारदर्शी तरीके से चुने गए आवासीय संस्थान भी शामिल हैं।

सरकार ने इस योजना के तहत नए आवेदकों के लिए कुल 30 लाख छात्रवृत्तियों का वितरण करने का लक्ष्य रखा है। रिन्यूअल यानी नवीनीकरण कराने वाले छात्रों को इसके अतिरिक्त लाभ मिलता है।

इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि छात्र अल्पसंख्यक समुदाय से होना चाहिए। दूसरी शर्त छात्र के प्रदर्शन से जुड़ी है।

आवेदन करने वाले छात्र ने अपनी पिछली वार्षिक परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूर हासिल किए हों। पहली कक्षा के बच्चों पर यह न्यूनतम अंकों वाली शर्त लागू नहीं होती है। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर है। छात्र के माता-पिता या अभिभावक की सभी स्रोतों से होने वाली कुल वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि एक परिवार के केवल दो बच्चों को ही इस छात्रवृत्ति का लाभ मिल सकता है। यदि कोई छात्र पहले से ही केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य छात्रवृत्ति योजना का लाभ ले रहा है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।

स्कूल में अनुशासन बनाए रखना भी अनिवार्य है। अनुशासनहीनता या गलत जानकारी देकर छात्रवृत्ति पाने की कोशिश करने पर इसे तुरंत रद्द कर दिया जाता है।

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कितनी मिलती है आर्थिक मदद?

प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रों को विभिन्न श्रेणियों में सीधे तौर पर वित्तीय सहायता दी जाती है। कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के छात्रों के लिए प्रवेश शुल्क के रूप में ₹ 500 प्रति वर्ष की वास्तविक राशि दी जाती है।

यह राशि हॉस्टल में रहने वाले आवासीय छात्रों और रोज स्कूल आने-जाने वाले डे-स्कॉलर्स दोनों को मिलती है। इसके अलावा कक्षा 6 से 10वीं तक के बच्चों को ₹ 350 प्रति माह की दर से ट्यूशन फीस का भुगतान भी किया जाता है।

पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के भरण-पोषण के लिए भी भरण-पोषण भत्ता दिया जाता है। कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के डे-स्कॉलर छात्रों को ₹ 100 प्रति माह मिलता है। वहीं कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को ₹ 600 प्रति माह और डे-स्कॉलर छात्रों को ₹ 100 प्रति माह का भत्ता दिया जाता है। यह सभी मासिक भत्ते एक शैक्षणिक वर्ष में अधिकतम 10 महीनों की अवधि के लिए देय होते हैं।

इसके समानांतर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी छात्रों के लिए भी ऐसी ही एक प्री-मैट्रिक योजना चलाई जाती है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के मूल निवासी छात्रों को, जिनके परिवार की आय ₹ 2 लाख तक है, उन्हें अधिकतम 10 महीनों के लिए ₹ 150 प्रति माह और ₹ 750 का वार्षिक तदर्थ अनुदान दिया जाता है। इसमें अधिकतम ₹ 2250 प्रति वर्ष की सहायता मिलती है।

आवेदन की बेहद सरल और डिजिटल प्रक्रिया

केंद्र सरकार की इस अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। अब किसी भी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। इच्छुक अभिभावक और छात्र राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

सबसे पहले आपको नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (scholarships.gov.in) पर जाना होगा। वहां होमपेज पर दिख रहे "नया पंजीकरण" विकल्प पर क्लिक करें। आपके सामने पंजीकरण के जरूरी दिशा-निर्देश खुल जाएंगे। इन शर्तों को ध्यान से पढ़कर अपनी सहमति दें और आगे बढ़ें।

इसके बाद स्क्रीन पर एक पंजीकरण फॉर्म खुलेगा। इसमें छात्र का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल और बैंक खाते का विवरण जैसी अनिवार्य जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होंगी। फॉर्म सबमिट करते ही आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक एप्लीकेशन आईडी और पासवर्ड का एसएमएस आ जाएगा।

पंजीकरण के बाद आपको इसी पोर्टल पर "लॉगिन टू अप्लाई" वाले विकल्प पर जाना होगा। अपनी आईडी और पासवर्ड दर्ज करके लॉगिन करें। पहली बार लॉगिन करने पर मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, जिसे भरने के बाद आपको नया पासवर्ड बनाने की सुविधा मिलेगी।

नया पासवर्ड सेट करने के बाद आप सीधे अपने छात्र डैशबोर्ड पर पहुंच जाएंगे। यहाँ बाईं तरफ दिए गए "आवेदन पत्र" पर क्लिक करके अपनी विस्तृत शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करें। सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद आप अपने आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट कर सकते हैं।

इन जरूरी दस्तावेजों को रखें तैयार

ऑनलाइन आवेदन करते समय कुछ महत्वपूर्ण कागजात अपने पास रखना अनिवार्य है ताकि प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। आवेदकों को छात्र की एक हालिया पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी होगी। इसके साथ ही सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया अल्पसंख्यक समुदाय का स्व-घोषणा पत्र या प्रमाण पत्र जरूरी है।

आर्थिक पात्रता की जांच के लिए परिवार का वैध आय प्रमाण पत्र और निवास स्थान की पुष्टि के लिए निवास प्रमाण पत्र अपलोड करना होता है। छात्र के पिछले वर्ष की स्व-प्रमाणित मार्कशीट जिसमें न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक दिख रहे हों, उसे भी संलग्न करना होगा।

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इसके अलावा चालू वर्ष की स्कूल की फीस रसीद, संस्थान द्वारा जारी प्रामाणिक छात्र प्रमाणपत्र और बैंक पासबुक की कॉपी लगानी होगी। बैंक खाता चालू स्थिति में होना चाहिए ताकि छात्रवृत्ति की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से बिना किसी बिचौलिये के सीधे खाते में पहुंच सके। शिक्षा के इस अवसर को अपनाकर गरीब परिवार अपने बच्चों के कल को उज्ज्वल बना सकते हैं।