मलिक असगर हाशमी
भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीति का हिस्सा नहीं हैं। इन दोनों देशों के बीच दो हजार साल पुराने गहरे सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते रहे हैं। अपने-अपने स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक-दूसरे का भरपूर समर्थन किया। भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो ने एशियाई और अफ्रीकी देशों की आजादी की आवाज बुलंद की थी। इन दोनों नेताओं ने साल उन्नीस सौ पचपन के बांडुंग सम्मेलन में ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) और अफ्रो-एशियाई आंदोलन की मजबूत नींव रखी थी।
साल उन्नीस सौ dynamic इक्यानबे में जब भारत ने अपनी 'लुक ईस्ट पॉलिसी' अपनाई, तब से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मोड़ आया। इसके बाद से राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, वाणिज्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में तेजी से विकास देखा गया है। साल दो हजार पांच में राष्ट्रपति सुसीलो बामबांग युधोयोनो की भारत यात्रा के दौरान 'रणनीतिक साझेदारी की स्थापना पर संयुक्त घोषणा' पर हस्ताक्षर किए गए। इस कदम ने दोनों लोकतांत्रिक देशों के बहुआयामी संबंधों को एक नई गति प्रदान की।

शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बढ़ते संपर्क
साल दो हजार के बाद से दोनों तरफ से आठ से अधिक राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के दौरे हो चुके हैं। यह सिलसिला दोनों देशों के बीच बढ़ते आपसी विश्वास और कूटनीतिक गहराई को साफ तौर पर दर्शाता है। इंडोनेशिया की ओर से राष्ट्रपति अब्दुर्रहमान वाहिद, राष्ट्रपति मेगावती सुकर्णोपुत्री और राष्ट्रपति सुसीलो बामबांग युधोयोनो ने अलग-अलग समय पर भारत की आधिकारिक यात्राएं कीं। वहीं भारत की ओर से भी प्रधानमंत्री ने बाली में आयोजित भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और बांडुंग सम्मेलन की पचासवीं वर्षगांठ में हिस्सा लिया। बांडुंग में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री को पूरे एशिया की ओर से बोलने का एक विशेष सम्मान दिया था।
साल दो हजार आठ में भारत के राष्ट्रपति ने इंडोनेशिया का राजकीय दौरा किया था। उस दौरान कृषि सहयोग और युवा मामलों पर दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद साल दो हजार ग्यारह में राष्ट्रपति युधोयोनो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की सह-अध्यक्षता में एक संयुक्त आयोग की प्रक्रिया भी नियमित रूप से काम कर रही है।
गणतंत्र दिवस यात्रा और पंद्रह अरब डॉलर के व्यापारिक समझौते
साल दो हजार ग्यारह में राष्ट्रपति युधोयोनो की भारत यात्रा कूटनीतिक रूप से बेहद ऐतिहासिक साबित हुई। इस दौरान दोनों सरकारों के बीच कुल सोलह द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें प्रत्यर्पण संधि, पारस्परिक कानूनी सहायता संधि और मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने की प्रणाली शामिल थी।
इसके अलावा तेल, प्राकृतिक गैस, यूरिया निर्माण, मौसम विज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए कई समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। इसी यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) के लिए बातचीत शुरू करने पर भी सहमति जताई। भारत ने इंडोनेशिया के नागरिकों के लिए 'टूरिस्ट वीजा ऑन अराइवल' की सुविधा देने की बड़ी घोषणा भी इसी समय की थी।
आर्थिक मोर्चे पर इस यात्रा के दौरान कुल पंद्रह अरब डॉलर मूल्य के अठारह बड़े व्यापारिक सौदों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के तहत भारतीय कंपनियों को इंडोनेशिया में हवाई अड्डे, बंदरगाह, रेलवे लाइन, टोल रोड और बिजली संयंत्र बनाने या संचालित करने की बड़ी परियोजनाएं मिलीं। सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निजी निवेश की राह खुली।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भागीदारी
भारत और इंडोनेशिया ने साल दो हजार एक में एक रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों की नौसेनाएं मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने पर नियमित रूप से संयुक्त समन्वित गश्त (CORPAT) का आयोजन करती हैं। दोनों देशों के सैन्य अधिकारी एक-दूसरे के स्टाफ कॉलेजों में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं।
भारतीय नौसेना के जहाजों और तटरक्षक बलों के जहाजों का नियमित रूप से इंडोनेशियाई बंदरगाहों पर जाना दोनों देशों के बीच मजबूत होते सैन्य संबंधों का सबूत है। साल दो हजार बारह में भारतीय रक्षा मंत्री ने द्विपक्षीय रक्षा वार्ता के तहत जकार्ता का दौरा किया था।
इस दौरान संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की तीसरी बैठक का भी सफल आयोजन किया गया था। दोनों देशों के बीच कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए विशेष रूप से एक 'ऊर्जा मंच' और संयुक्त कार्य समूहों (JWG) का गठन किया गया है।
मजबूत आर्थिक रिश्ते और तेजी से बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार
इंडोनेशिया वर्तमान समय में आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार साल दो हजार सात आठ के छह दशमलव नौ अरब डॉलर से तेजी से बढ़कर साल दो हजार ग्यारह बारह में इक्कीस दशमलव तीन अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत इंडोनेशिया से बड़े पैमाने पर कच्चे पाम ऑयल, कोयला, खनिज, रबर और हाइड्रोकार्बन का आयात करता है। वहीं भारत से इंडोनेशिया को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, मक्का, वाणिज्यिक वाहन, दूरसंचार उपकरण, स्टील और दवाइयां निर्यात की जाती हैं।
ऑटोमोटिव घटकों, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में व्यापार विस्तार की भारी संभावनाएं मौजूद हैं। टाटा पावर, रिलायंस, अडानी, एलएंडटी, जीएमआर, जीवीके, आदित्य बिड़ला और एसबीआई जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां या संयुक्त उद्यम स्थापित किए हैं। बुनियादी ढांचा विकास में अडानी समूह और अनिल अंबानी समूह सुमात्रा प्रांत में रेलवे लाइनों और बंदरगाहों के निर्माण के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं।
शिक्षा, मानवीय सहायता और सांस्कृतिक संबंधों का ताना-बाना
शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने एक विशेष समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इंडोनेशिया के छात्र भारत सरकार की आईटीईसी (ITEC) और कोलंबो योजना के तहत मिलने वाली छात्रवृत्तियों का बड़े पैमाने पर लाभ उठाते हैं।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) हर साल इंडोनेशियाई छात्रों को भारत के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियां प्रदान करती है। भारत ने जकार्ता और आचे में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित किए हैं। साल दो हजार चार की विनाशकारी सुनामी और साल दो हजार पांच व छह के भूकंप के दौरान भारत ने इंडोनेशिया को तुरंत लाखों डॉलर की राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता भेजी थी, जिसे इंडोनेशियाई जनता आज भी याद करती है।
🇮🇳 PM Modi’s Indonesia Visit Set To Open New Cooperation Areas, Indian Ambassador to Indonesia Sandeep Chakravarty Says
— RT_India (@RT_India_news) July 5, 2026
Ahead of the July 6 to 8 trip, Chakravarty said the visit will deepen India-Indonesia ties and bring greater economic engagement between the two countries. pic.twitter.com/3bUlCn9XnF
दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध भी बेहद मजबूत हैं। बाली और जकार्ता में स्थित भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से दोनों देशों की जनता के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी गाजाह माडा में भारतीय अध्ययन पर एक रोटेशनल चेयर की स्थापना की गई है। इसके अलावा बोरोबुदुर मंदिर में रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा स्थापित की गई है। जकार्ता में 'इंडिया कल्चरल फोरम' की शुरुआत की गई है जो दोनों देशों के सामाजिक सांस्कृतिक समूहों को एक साझा मंच प्रदान करता है।
भारतीय समुदाय की स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
इंडोनेशिया में भारतीय मूल के लगभग एक लाख लोग रहते हैं जो मुख्य रूप से जकार्ता, मेदान, सुरबाया और बांडुंग जैसे बड़े शहरों में केंद्रित हैं। ये लोग ज्यादातर कपड़ा और खेलकूद के सामानों के व्यापार से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा लगभग दस हजार भारतीय नागरिक पेशेवर के रूप में इंडोनेशिया में काम कर रहे हैं जिनमें इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और बैंकर शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर भारतीय समुदाय को बेहद सम्मानजनक और समृद्ध माना जाता है।
PM @narendramodi's visit to Indonesia, beginning tomorrow, will give impetus to the existing relationship between both countries and will also open up new areas of cooperation.
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 5, 2026
Sandeep Chakravarty, Indian Ambassador to Indonesia, says that during Prime Minister #NarendraModi's… pic.twitter.com/L44OH7kevR
भौगोलिक दृष्टि से इंडोनेशिया भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी देश है। भारत की तरह ही इंडोनेशिया भी एक अत्यधिक विविधतापूर्ण, बहु-जातीय, बहु-धार्मिक और जीवंत लोकतांत्रिक देश है। भारत की पूर्व की ओर देखो नीति यानी 'लुक ईस्ट पॉलिसी' के संदर्भ में इंडोनेशिया आसियान का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली सदस्य है। जैसे-जैसे भारत इस पूरे क्षेत्र के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे इंडोनेशिया की भूमिका और उसका रणनीतिक समर्थन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता जा रहा है।