Will Ayatollah Jafar Sobhani lead Ali Khamenei's funeral prayer? Find out more about him.
मलिक असगर हाशमी
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबरों और उनके जनाजे से जुड़ी चर्चाओं के बीच एक नाम सबसे अधिक सामने आ रहा है। यह नाम है ग्रैंड अयातुल्ला जाफर सोभानी (Grand Ayatollah Jafar Sobhani) का। हालांकि ईरानी सरकार या आधिकारिक संस्थानों की ओर से अभी तक यह घोषणा नहीं की गई है कि खामेनेई के जनाजे की नमाज कौन पढ़ाएगा। सुरक्षा कारणों से भी इस तरह की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इसके बावजूद ईरान के धार्मिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि जनाजे की नमाज ग्रैंड अयातुल्ला जाफर सोभानी अदा करा सकते हैं।ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर जाफर सोभानी कौन हैं। उनकी धार्मिक हैसियत क्या है। ईरान और शिया दुनिया में उनका कितना प्रभाव है। आखिर क्यों उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में लिया जा रहा है।
कौन हैं ग्रैंड अयातुल्ला जाफर सोभानी
ग्रैंड अयातुल्ला जाफर सोभानी का जन्म 9 अप्रैल 1929 को ईरान के तबरीज शहर में हुआ था। वे बारह इमामी शिया परंपरा के सबसे वरिष्ठ मरजा ए तकलीद यानी ऐसे धार्मिक विद्वानों में गिने जाते हैं जिनकी धार्मिक राय का दुनिया भर के लाखों शिया मुसलमान अनुसरण करते हैं।
करीब एक सदी का जीवन पूरा कर चुके सोभानी को इस समय ईरान के सबसे सम्मानित इस्लामी विद्वानों में माना जाता है। वे केवल धर्मगुरु ही नहीं बल्कि लेखक, शोधकर्ता, दार्शनिक और इस्लामी इतिहास के गंभीर अध्येता भी हैं।
कुम में मिली उच्च धार्मिक शिक्षा
प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने अरबी भाषा, इस्लामी न्यायशास्त्र और उसूल ए फिक्ह की पढ़ाई की। वर्ष 1946 में वे ईरान के पवित्र शहर कुम पहुंचे। यहीं उन्होंने उस दौर के सबसे बड़े शिया विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की।
उनके प्रमुख शिक्षकों में आयतुल्ला सैयद हुसैन बुरुजेर्दी, आयतुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी और अल्लामा मोहम्मद तबातबाई जैसे बड़े नाम शामिल रहे। लगभग पंद्रह वर्षों तक उन्होंने इन विद्वानों के मार्गदर्शन में फिक्ह, तफ्सीर, दर्शन और इस्लामी विचारधारा का गहन अध्ययन किया।
ईरान की धार्मिक व्यवस्था में बड़ी भूमिका
जाफर सोभानी लंबे समय तक कुम की प्रसिद्ध हौजा ए इल्मिया में अध्यापन करते रहे। उन्होंने इस्लामी न्यायशास्त्र, इतिहास, इल्म उल कलाम और रेजाल जैसे विषयों पर हजारों छात्रों को शिक्षा दी।उन्होंने इमाम सादिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की। यह संस्थान आज भी इस्लामी शोध और उच्च धार्मिक शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
सोभानी पहले सोसाइटी ऑफ सेमिनरी टीचर्स ऑफ कुम के सदस्य भी रह चुके हैं। ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद देश के संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में भी उन्होंने अपनी बौद्धिक भूमिका निभाई थी।
तीन सौ से अधिक किताबें और शोध
ग्रैंड अयातुल्ला सोभानी को समकालीन शिया दुनिया के सबसे अधिक लिखने वाले विद्वानों में गिना जाता है। उन्होंने तीन सौ से अधिक पुस्तकें और शोध ग्रंथ लिखे हैं।उनकी रचनाएं फिक्ह, उसूल ए फिक्ह, कुरआन की तफ्सीर, इस्लामी दर्शन, इल्म उल कलाम, इस्लामी इतिहास और विभिन्न धार्मिक विचारधाराओं पर आधारित हैं।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में डॉक्ट्रिन्स ऑफ शिई इस्लाम, मफाहीमुल कुरआन, मनशूर ए जावीद और हिस्ट्री ऑफ इस्लाम जैसी कृतियां शामिल हैं। उनकी कई किताबों का अंग्रेजी समेत अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
शोध और शिक्षा को दिया नया आयाम
जाफर सोभानी ने केवल किताबें ही नहीं लिखीं बल्कि शोध की नई परंपरा भी विकसित की। उन्होंने आयीन ए पजूहेश नामक शोध पत्रिका की शुरुआत की। यह पत्रिका इस्लामी अध्ययन और अकादमिक शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है।वे हमेशा इस बात पर जोर देते रहे हैं कि धार्मिक शिक्षा केवल परंपरा तक सीमित न रहे बल्कि शोध और तर्क के साथ आगे बढ़े।
विद्वानों के सम्मान को बताया नैतिक जिम्मेदारी
हाल ही में कुम में आयोजित एक कार्यक्रम में ग्रैंड अयातुल्ला सोभानी ने कहा कि विद्वान समाज के लिए ज्ञान के दीपक होते हैं। उनका सम्मान करना केवल परंपरा नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और शोधकर्ता समाज को नई दिशा देते हैं। इसलिए उनके योगदान का सम्मान हर उस व्यक्ति का कर्तव्य है जिसने उनके ज्ञान से लाभ उठाया हो।उन्होंने इमाम हसन अस्करी का एक कथन भी उद्धृत किया। उसमें कहा गया है कि किसी विद्वान को सभा में विशेष सम्मान दिया जाना चाहिए क्योंकि वह ज्ञान के माध्यम से सत्य की रक्षा करता है।
मुस्लिम एकता के पक्षधर
जाफर सोभानी हमेशा शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच एकता की वकालत करते रहे हैं।साल 2017 में रमजान मिशनरियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि मुस्लिम समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतभेदों से ऊपर उठकर उम्मत को एकजुट करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।उनके अनुसार कुरआन का मूल संदेश इंसानों को अच्छाई, न्याय और अल्लाह की आज्ञा का पालन करने के लिए प्रेरित करना है।
क्यों लिया जा रहा है उनका नाम
ईरान में किसी बड़े धार्मिक नेता के जनाजे की नमाज पढ़ाने का सम्मान आमतौर पर ऐसे वरिष्ठ मरजा को मिलता है जिसकी धार्मिक प्रतिष्ठा पूरे शिया जगत में निर्विवाद हो।जाफर सोभानी उम्र, विद्वता, धार्मिक स्वीकार्यता और लंबे सार्वजनिक जीवन के कारण इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। यही वजह है कि खामेनेई के जनाजे की नमाज को लेकर उनका नाम सबसे अधिक चर्चा में है।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक ईरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए उनके नाम को फिलहाल केवल चर्चाओं और अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अंतिम बात
ग्रैंड अयातुल्ला जाफर सोभानी केवल ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरु नहीं हैं। वे शिया इस्लामी चिंतन, शोध और शिक्षा की दुनिया का एक बड़ा नाम हैं। उनकी विद्वता, सैकड़ों पुस्तकें, शोध संस्थानों की स्थापना और मुस्लिम एकता पर उनके विचार उन्हें समकालीन इस्लामी जगत के सबसे प्रभावशाली विद्वानों में शामिल करते हैं।
यदि भविष्य में उन्हें आयतुल्ला अली खामेनेई के जनाजे की नमाज पढ़ाने की जिम्मेदारी मिलती है, तो यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं होगी बल्कि शिया धार्मिक परंपरा में उनकी सर्वोच्च स्वीकार्यता का भी प्रतीक मानी जाएगी। हालांकि अंतिम निर्णय और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार अभी बाकी है।
AEO FAQs
सवाल: ग्रैंड अयातुल्ला जाफर सोभानी कौन हैं?
जवाब: वे ईरान के वरिष्ठ शिया मरजा, धर्मशास्त्री, लेखक और इमाम सादिक इंस्टीट्यूट के संस्थापक हैं।
सवाल: क्या जाफर सोभानी खामेनेई के जनाजे की नमाज पढ़ाएंगे?
जवाब: अभी तक ईरान की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनका नाम केवल चर्चाओं में सामने आया है।
सवाल: जाफर सोभानी ने कितनी किताबें लिखी हैं?
जवाब: उन्होंने फिक्ह, तफ्सीर, दर्शन और इस्लामी इतिहास सहित विभिन्न विषयों पर 300 से अधिक पुस्तकें और शोध प्रकाशित किए हैं।
सवाल: जाफर सोभानी किस विचार के लिए जाने जाते हैं?
जवाब: वे इस्लामी शोध, विद्वानों के सम्मान और शिया सुन्नी एकता पर अपने संतुलित विचारों के लिए प्रसिद्ध हैं।