What is Khamenei's connection with the eighth Imam of the Shias?
अर्सला खान
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। कार्यक्रम के अनुसार 4 और 5 जुलाई को तेहरान में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी और नमाज-ए-जनाजा अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद स्थित शियाओं के आठवें इमाम हज़रत इमाम अली रज़ा (अ.स.) के रौज़े में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ऐसे में यह जानना अहम है कि इमाम रज़ा कौन थे और उनका मकबरा शिया मुसलमानों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।
खामेनेई को कहाँ दफनाया जाएगा?
अयातुल्लाह अली खामेनेई को ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में स्थित इमाम रज़ा के पवित्र रौज़े (मस्जिद-ए-गौहरशाद, संग्रहालय और पुस्तकालय) में दफनाया जाएगा। यह स्थान दुनिया भर के शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर वर्ष लाखों जायरीन यहां हाजिरी देते हैं। इसी परिसर में ईरान के कई प्रमुख धार्मिक विद्वानों और पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को भी सुपुर्द-ए-खाक किया गया था।
कौन थे शियाओं के आठवें इमाम?
हज़रत इमाम अली रज़ा (अ.स.) शिया मुसलमानों के बारह इमामों में आठवें इमाम माने जाते हैं। उनका जन्म 148 हिजरी (765 ईस्वी) में मदीना में हुआ था। वे पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के वंशज थे और अपने गहरे ज्ञान, उदार स्वभाव तथा विभिन्न धर्मों के विद्वानों के साथ संवाद के लिए प्रसिद्ध थे।
अब्बासी खलीफा अल-मामून ने वर्ष 201 हिजरी में राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें अपने दरबार में बुलाया और अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। हालांकि, समय के साथ इमाम रज़ा का प्रभाव बढ़ने लगा, जिससे खलीफा चिंतित हो गया। माना जाता है कि 203 हिजरी (818 ईस्वी) में उन्हें ज़हर देकर शहीद कर दिया गया। उनकी शहादत तूस में हुई, जो आज का मशहद है। बाद में यही स्थान उनका पवित्र रौज़ा बना, जो आज दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक परिसरों में से एक है।
मशहद क्यों है इतना खास?
ईरान का मशहद शहर शिया इस्लाम की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है। यहां स्थित इमाम रज़ा का रौज़ा अपनी भव्य वास्तुकला, सुनहरे गुंबद, शानदार मस्जिदों, पुस्तकालयों, संग्रहालयों और मदरसों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ईरान की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ मशहद अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर के कारण भी विशेष पहचान रखता है।
केसर, साहित्य और संस्कृति का केंद्र
मशहद केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह ईरान के खोरासान प्रांत का प्रमुख शहर भी है, जो दुनिया में उच्च गुणवत्ता वाले केसर के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां उत्पादित केसर का निर्यात अनेक देशों में किया जाता है।
यह शहर महान फारसी कवि फिरदौसी से भी जुड़ा हुआ है। 'शाहनामा' के रचयिता फिरदौसी का मकबरा मशहद के निकट स्थित तूस में है, जो फारसी साहित्य के प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।
खानपान और हस्तशिल्प की भी है अलग पहचान
मशहद अपने पारंपरिक फारसी व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की मशहूर डिश 'शोलेह मशहदी' स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके अलावा हाथ से बुने हुए फारसी कालीन, सूखे मेवे और पारंपरिक हस्तशिल्प भी मशहद की खास पहचान हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दफन?
अयातुल्लाह अली खामेनेई को इमाम रज़ा के पवित्र रौज़े में दफनाया जाना केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि शिया धार्मिक परंपरा और ईरान की आध्यात्मिक विरासत से उनके गहरे जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है। शिया समुदाय के लिए इमाम रज़ा का रौज़ा आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है और वहीं सुपुर्द-ए-खाक होना अत्यंत सम्मान की बात मानी जाती है।