मलिक असगर हाशमी
आज के समय में मैट्रिक यानी दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद ही कोई भी छात्र अपने भविष्य की योजनाओं पर काम शुरू करता है। इसके बाद ही छात्र डॉक्टर या इंजीनियर जैसे बेहतरीन करियर का चुनाव करते हैं। आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए सही मार्गदर्शन और आर्थिक मदद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हमारे देश में बहुत से अल्पसंख्यक परिवारों को पता ही नहीं है कि केंद्र सरकार उनके बच्चों के लिए विशेष आर्थिक सहायता योजनाएं चलाती है। इसी वजह से कई होनहार बच्चे पैसों की कमी के चलते बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाता है। इनमें सबसे प्रमुख योजना पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति यानी स्कॉलरशिप स्कीम है।केंद्र सरकार ने पिछले कुछ सालों में अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए मुख्य रूप से तीन प्रकार की स्कॉलरशिप योजनाएं लागू की हैं।
इनमें प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप, पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप और योग्यता-सह-साधन यानी मेरिट-कम-मीन्स आधारित छात्रवृत्ति शामिल हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम २००९ के तहत सरकार हर बच्चे को कक्षा एक से आठ तक मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देती है। इसी वजह से सरकार ने बजट आवंटन को ज्यादा व्यावहारिक और तर्कसंगत बनाया है। अब तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी इस मंत्रालय की पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति के दायरे में लाया गया है।
उच्च शिक्षा के स्तर पर कोर्सेस के वितरण को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। देश के चुनिंदा शीर्ष संस्थानों को छोड़कर बाकी सभी अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के तकनीकी या व्यावसायिक कोर्सेस को अब पोस्ट-मैट्रिक योजना के तहत शामिल किया गया है। वहीं दूसरी तरफ योग्यता-सह-साधन आधारित छात्रवृत्ति में केवल सरकार द्वारा लिस्टेड शीर्ष शिक्षण संस्थानों को ही शामिल किया जाता है।
फेलोशिप योजनाओं में भी सरकार ने कुछ जरूरी बदलाव किए हैं। भारत सरकार ने पहले यूजीसी और सीएसआईआर की जेआरएफ योजना की तर्ज पर मौलाना आजाद राष्ट्रीय फेलोशिप यानी एमएएनएफ योजना शुरू की थी। यूजीसी और सीएसआईआर की फेलोशिप योजनाएं अल्पसंख्यकों सहित सभी सामाजिक श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए हमेशा खुली रहती हैं।
इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही फेलोशिप योजनाओं का लाभ भी मिलता है। इन सभी योजनाओं के आपस में ओवरलैप होने के कारण सरकार ने साल २०२२-२३ से एमएएनएफ योजना को बंद करने का फैसला लिया था। हालांकि पुराने फेलो को उनका कार्यकाल पूरा होने तक राशि मिलती रहेगी।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की इस पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना की पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। प्रधानमंत्री के अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए नए १५ सूत्री कार्यक्रम की घोषणा जून २००६ में की गई थी। इसी कार्यक्रम के तहत तय हुआ था कि अल्पसंख्यक समुदायों के मेधावी छात्रों के लिए एक विशेष पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना लागू की जाएगी।
इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को आर्थिक मदद देना है। इससे गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलते हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में उनकी उपस्थिति बढ़ती है और आगे चलकर उनके लिए नौकरी पाने के अवसर भी मजबूत होते हैं।
यह स्कॉलरशिप योजना पूरे भारत में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए लागू होती है। छात्र किसी भी सरकारी या मान्यता प्राप्त प्राइवेट हायर सेकेंडरी स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हो तो वह इसके लिए आवेदन कर सकता है। राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा अधिसूचित आवासीय संस्थान और प्राइवेट संस्थान भी इसके दायरे में आते हैं।

इसके साथ ही नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग यानी एनसीवीटी से संबद्ध औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई और पॉलिटेक्निक कोर्सेस के कक्षा ११ और १२ स्तर के तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी इसमें कवर किया जाता है। ध्यान रहे कि एक साल से कम अवधि वाले किसी भी कोर्स या सर्टिफिकेट कोर्स पर यह योजना लागू नहीं होती है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता के कुछ कड़े नियम तय किए गए हैं। छात्रवृत्ति केवल उन छात्रों को दी जाती है जिन्होंने अपनी पिछली अंतिम परीक्षा में कम से कम ५० प्रतिशत अंक या उसके समकक्ष ग्रेड हासिल किया हो। इसके साथ ही सबसे जरूरी शर्त यह है कि छात्र के माता-पिता या अभिभावक की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय २ लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इस योजना के तहत मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय को अल्पसंख्यक माना गया है। हर साल पूरे देश में करीब ५ लाख नई स्कॉलरशिप बांटने का लक्ष्य रखा जाता है। इसके अलावा पुराने छात्रों को रिन्यूअल स्कॉलरशिप भी दी जाती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच इस छात्रवृत्ति का वितरण वहां की अल्पसंख्यक आबादी के अनुपात में किया जाता है।
इस छात्रवृत्ति योजना के साथ कुछ विशेष शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। योजना के तहत परिवार के केवल दो बच्चों को ही स्कॉलरशिप मिल सकती है। छात्र को अपनी पढ़ाई में नियमित रहना होगा। स्कूल या संस्थान के नियमों के मुताबिक उसकी अटेंडेंस पूरी होनी चाहिए।
अगर कोई छात्र स्कूल के अनुशासन का उल्लंघन करता है या छात्रवृत्ति के नियमों को तोड़ता है तो उसकी स्कॉलरशिप को सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है। यदि कोई छात्र गलत जानकारी देकर या फर्जी दस्तावेज लगाकर स्कॉलरशिप हासिल करता है तो उसका आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। सरकार उससे दी गई राशि की वसूली भी करेगी।
पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी मोड का इस्तेमाल करती है। स्कॉलरशिप की पूरी राशि सीधे छात्र के बैंक खाते में जमा की जाती है। इस योजना का लाभ लेने वाला छात्र किसी दूसरी योजना से आर्थिक लाभ नहीं ले सकता है। एक बार छात्रवृत्ति मिलने के बाद अगले शैक्षणिक वर्ष में इसका रिन्यूअल कराना होता है। रिन्यूअल के लिए भी पिछली कक्षा में ५० प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है।
Hurry Up! The National Scholarship Portal (NSP) is officially open for the ST Pre-Matric Scholarship (Classes IX & X) for AY 2026-27.
— Tribal Welfare Department, Govt. of Tripura (@twdtripura) June 4, 2026
All eligible ST students are requested to submit their applications within the given timelines to avoid any last-minute hassle.
📅 Application… pic.twitter.com/dwVCMqsZRx
इस योजना के लिए आवेदन करने का तरीका पूरी तरह से डिजिटल है। यह योजना नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल यानी एनएसपी के माध्यम से चलाई जाती है। सभी इच्छुक छात्रों के लिए वेबसाइट www.scholarships.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है।
ऑनलाइन फॉर्म भरते समय बैंक खाते की जानकारी बहुत सावधानी से भरनी चाहिए। छात्रों को ड्रॉप डाउन लिस्ट से अपने बैंक और ब्रांच का नाम चुनना होता है। इसके बाद पूरा अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड बिल्कुल सही दर्ज करना चाहिए।
अगर बैंक डिटेल्स गलत पाई जाती हैं तो आवेदन मंजूर होने के बाद भी पैसा ट्रांसफर नहीं होगा। खाताधारकों को अपने बैंक में जाकर केवाईसी स्टेटस जरूर चेक कर लेना चाहिए ताकि ट्रांजैक्शन में कोई दिक्कत न आए। स्कॉलरशिप की राशि आने तक बैंक अकाउंट पूरी तरह एक्टिव होना जरूरी है।