भक्ति चालक, पुणे
इंसानियत का कोई मज़हब नहीं होता। मुसीबत के वक्त मदद के लिए दौड़कर आने वाले लोग ही असल में खुदा का सच्चा रूप होते हैं। इसी बात का एहसास हाल ही में पुणे के वाघोली इलाके में हुआ। महज़ 14 महीने की छोटी सी बच्ची गार्गी जाधव की ज़िंदगी बचाने की जंग के बीच, वाघोली की जामा मस्जिद ने बेहद ही संवेदनशील और शानदार पहल की है।
10 करोड़ रुपये का चैलेंज
आज के दौर में मेडिकल साइंस के सामने कई दुर्लभ बीमारियों की बड़ी चुनौती खड़ी है। इन गंभीर बीमारियों का शिकार सबसे ज़्यादा छोटे बच्चे ही होते हैं। इन बीमारियों के इलाज के लिए अधूरी मशीनरी, सरकार की कमज़ोर पॉलिसी और दवा बनाने वाली कुछ ही कंपनियां होने की वजह से इन दवाओं की कीमत आम इंसान की पहुंच से बहुत दूर होती है। इन्हीं सब वजहों से मरीज़ के परिवार को बहुत ही मुश्किल हालात का सामना करना पड़ता है।
पुणे के वाघोली इलाके में रहने वाला जाधव परिवार इन दिनों ऐसी ही एक भयानक मुसीबत से गुज़र रहा है। उनकी 14 महीने की प्यारी सी बच्ची गार्गी फिलहाल ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 1’ (SMA Type 1) नाम की एक बहुत ही रेयर बीमारी से लड़ रही है। गार्गी की इस मुश्किल लड़ाई की खबर मिलते ही वाघोली के मुस्लिम समाज ने तुरंत मदद का हाथ आगे बढ़ाया।
वाघोली मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन और जामा मस्जिद के ट्रस्टियों ने इस मासूम बच्ची की जान बचाने के लिए पहल की। जुमे की नमाज़ के वक्त मस्जिद में आए सैकड़ों नमाज़ियों से गार्गी के इलाज के लिए माली मदद करने और उसकी लंबी उम्र के लिए दुआ मांगने की अपील की गई।
समाज के प्रति इसी ज़िम्मेदारी के बारे में बात करते हुए जामा मस्जिद के चेयरमैन जानमोहम्मद पठान (रिटायर एसीपी) ने 'आवाज़-द-वॉयस' के सामने अपना नज़रिया रखा। उन्होंने कहा, “हमारी संस्था कई सालों से जात-पात देखे बिना काम कर रही है। चाहे ज़रूरतमंद छात्रों की मदद हो या रक्तदान, हम हमेशा आगे रहते हैं।”
गार्गी की मदद के बारे में वे आगे कहते हैं, “गार्गी की बीमारी के बारे में पता चलने पर हमने सोचा कि एक मासूम बच्ची की जान बचाना ही इंसान का असल फर्ज़ है, इसी नाते हमने यह पहल की। जुमे की नमाज़ के लिए आने वाले हर भाई से मदद करने और अल्लाह से गार्गी के लिए दुआ मांगने की अपील की गई।”
मदद की रकम के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “हमारे सभी भाइयों के सहयोग से हमने 35 हज़ार रुपये इकट्ठा करके उसके इलाज में अपनी छोटी सी गिलहरी वाली भूमिका निभाई है।”

मासूम गार्गी की मुश्किल लड़ाई
मूल रूप से अहमदनगर के रहने वाले और फिलहाल पुणे के वाघोली में आईवी एस्टेट इलाके में रहने वाले संदीप जाधव की गार्गी इकलौती बेटी है। इस दुर्लभ बीमारी में शरीर का एक अहम जीन (Gene) गायब होता है।
इसकी वजह से शरीर के हिलने-डुलने के लिए ज़रूरी प्रोटीन नहीं बन पाता। नतीजे के तौर पर बच्चे के शरीर का हिलना-डुलना पूरी तरह बंद हो जाता है, वह अपनी गर्दन नहीं संभाल पाती और सारी मांसपेशियां बेजान हो जाती हैं।
गार्गी की यह हालत देखकर उसके माता-पिता ने तुरंत मुंबई के मशहूर हिंदुजा अस्पताल की नामी डॉक्टर नीलू देसाई से संपर्क किया। डॉक्टर ने जांच के बाद इस बीमारी के लिए जोल्गेन्स्मा (Zolgensma) नाम का एक बेहद महंगा इंजेक्शन देने की सलाह दी। सिर्फ इस एक इंजेक्शन की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये है।
इतनी बड़ी रकम जुटाना किसी भी आम परिवार के लिए नामुमकिन है। इसलिए जाधव परिवार ने क्राउड फंडिंग के ज़रिए पैसा इकट्ठा करना शुरू किया।मदद करने वालों के सहयोग से अब तक साढ़े पांच करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। बाकी के साढ़े चार करोड़ रुपये जमा करने के लिए यह परिवार अभी भी दिन-रात जद्दोजहद कर रहा है।
जामा मस्जिद की पहल पर पिता ने जताया आभार
मस्जिद में एक साथ मिलकर मुसलमानों द्वारा गार्गी के लिए मांगी गई दुआ और दी गई माली मदद को देखकर गार्गी के पिता संदीप जाधव ‘आवाज़-द-वॉयस’ से बात करते हुए बेहद भावुक हो गए।
अपने जज़्बात ज़ाहिर करते हुए संदीप जाधव ने कहा, “सुबह वाघोली की जामा मस्जिद का वह वीडियो देखा और मेरा दिल भर आया। मैं मस्जिद के सभी मुस्लिम भाइयों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। अगर महाराष्ट्र का हर मंदिर, मस्जिद या चर्च इसी तरह मदद का हाथ आगे बढ़ाए, तो मेरी बेटी के लिए यह बहुत बड़ी मदद होगी।”
एक तरफ जहां इलाज के भारी-भरकम खर्च और सरकारी नीतियों की खामियों से आम नागरिक परेशान हैं, वहीं इस तरह आम लोगों का एक साथ आकर एक-दूसरे का सहारा बनना ही समाज की असली रीढ़ है।