रूढ़ियां तोड़कर IVF एक्सपर्ट बनीं डॉ. शाहिदा नगमा

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  [email protected] | Date 16-09-2026
Dr. Shahida Nagma breaks stereotypes to become an IVF expert.
Dr. Shahida Nagma breaks stereotypes to become an IVF expert.

 

ओनिका माहेश्वरी / नई दिल्ली

झारखंड के धनबाद से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली में अपनी मेहनत और लगन से एक अलग पहचान बनाने वाली स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तथा आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. शाहिदा नगमा आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनकी यह सफलता सिर्फ एक डॉक्टर बनने की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह उन तमाम रूढ़ियों को तोड़ने की दास्तान है जो महिलाओं को घरों में बांधकर रखना चाहती थीं।

आज डॉ. शाहिदा अपने पूरे परिवार के लिए एक ऐसा प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं, जिन्हें देखकर उनके खानदान की कई अन्य युवतियों ने अपने छोटे शहरों से बाहर निकलकर इंजीनियरिंग, डॉक्टर और फाइन आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमाई है। वे आज दिल्ली जैसे महानगर में रहकर अपने हुनर का लोहा मनवा रही हैं और अनगिनत परिवारों में खुशियां बांट रही हैं।

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डॉ. शाहिदा नगमा (33) के इस शानदार सफर की नींव उनके परिवार के मजबूत संस्कारों और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण भाव पर टिकी है। उनकी मां शबाना कमर ने हमेशा बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया और उनके पिता खुर्शीद अहमद, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद बैंक ऑफ इंडिया में बैंक मैनेजर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, ने अपनी बेटी के हर सपने को पूरा करने में पूरा साथ दिया।

डॉ. शाहिदा का एक छोटा भाई भी है जो खुद एक डॉक्टर है और उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में अपनी मेडिकल प्रैक्टिस कर रहा है। शुरुआती दौर में डॉ. शाहिदा ने कॉन्वेंट स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित आर्मी पब्लिक स्कूल, धौला कुआं से अपनी सीनियर सेकेंडरी की शिक्षा हासिल की।

चिकित्सा के क्षेत्र में उनके कदम मजबूती के साथ तब आगे बढ़े जब उन्होंने दिल्ली कैंट स्थित आर्मी कॉलेज आफ मेडिकल साइंसेस यानी एसीएमएस से एमबीबीएस की डिग्री और अपनी इंटर्नशिप पूरी की।

इसके बाद उन्होंने देश के सबसे जाने-माने और बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली से ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी यानी प्रसूति एवं स्त्री रोग में एमएस की पोस्ट-ग्रैजुएशन डिग्री हासिल की।

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सफदरजंग अस्पताल में उन्होंने लगभग तीन साल तक बतौर सीनियर रेजिडेंट अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने बेहद जटिल सर्जिकल मामलों को अपने शांत स्वभाव और बेहतरीन कौशल से संभाला, जिससे उनके अनुभव में और ज्यादा निखार आया।

इसके बाद उन्होंने देश के नामचीन सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली में प्रसिद्ध डॉक्टर आभा मजूमदार के मार्गदर्शन में रिप्रोडक्टिव मेडिसिन यानी आईवीएफ में अपनी फेलोशिप पूरी की और इस आधुनिक तकनीक की बारीकियों को बहुत करीब से समझा।

डॉक्टर बनने का यह सपना उनके मन में बचपन से ही पल रहा था। इसके पीछे उनके नानाजी का बहुत बड़ा हाथ था, जिन्हें पूरा परिवार प्यार से 'डॉक्टर नाना' कहकर पुकारता था। वे यूनाइटेड किंगडम में एक बेहद जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ यानी पीडियाट्रिशियन थे।

जब भी वे छुट्टियों में भारत आते थे, छोटी शाहिदा उनके पास बैठकर घंटों उनकी बातें सुनती थीं। मरीजों की सेवा करने का उनका अंदाज और उनका शांत व मिलनसार स्वभाव नन्हीं शाहिदा के कोमल मन पर गहरी छाप छोड़ गया था।

तभी उन्होंने ठान लिया था कि उन्हें बड़े होकर लोगों की सेवा करनी है और डॉक्टर बनना है। उनके इस सफर में उनके माता-पिता ने कभी कोई बाधा नहीं आने दी और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।

आज के समय में बदलती हुई जीवनशैली लोगों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डाल रही है। इसी का नतीजा है कि आज कम उम्र के दंपत्तियों में भी इनफर्टिलिटी यानी निसंतानता की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है।

इस गंभीर विषय पर बात करते हुए डॉ. शाहिदा नगमा बताती हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक की नौकरी का तनाव और अत्यधिक मानसिक दबाव इसके सबसे बड़े कारण हैं।

जब इंसान लगातार तनाव में रहता है तो उसके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ हार्मोन हमारे शरीर के जरूरी रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, एफएसएच और एलएच के पूरे संतुलन को बिगाड़ कर रख देता है।

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आॅपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा के साथ डाॅ शाहिद

इसके अलावा आज के खान-पान में मिलावट का जहर घुल चुका है, पीने का पानी दूषित हो रहा है और बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण सीधे तौर पर हमारी प्रजनन क्षमता को कमजोर कर रहा है।

इन तमाम समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए आईवीएफ तकनीक एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो रही है। इस तकनीक पर प्रकाश डालते हुए वे समझाती हैं कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ एक ऐसी आधुनिक कृत्रिम तकनीक है जो उन पति-पत्नी की मदद करती है जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असफल रहते हैं।

इस प्रक्रिया के जरिए लैब में अंडे और स्पर्म को मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भ में स्थापित किया जाता है।डॉक्टर के रूप में काम करते0 हुए कई बार ऐसे पल आते हैं जो इंसान को अंदर तक झकझोर देते हैं।

अपने करियर का एक ऐसा ही बेहद भावुक और यादगार अनुभव साझा करते हुए डॉ. शाहिदा बताती हैं कि एक बार एक ग्रामीण पृष्ठभूमि का सीधा-साधा दंपत्ति अपनी ग्यारह साल की बेटी के साथ उनके क्लिनिक में आया था।

उनकी वह छोटी सी बेटी अपने घर में किसी भाई या बहन के आने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक थी। लेकिन जांच करने पर पता चला कि उस महिला के गर्भाशय के अंदर काफी ज्यादा चिपकाहट यानी एडिशन्स की समस्या थी।

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डॉ. शाहिदा ने हिस्ट्रोस्कोपी प्रक्रिया के जरिए उस जटिल समस्या को सफलतापूर्वक ठीक किया और गर्भाशय की परत को मजबूत बनाने के लिए पहली बार पीआरपी तकनीक का इस्तेमाल किया।

उनकी यह मेहनत रंग लाई और पहले ही आईवीएफ प्रयास में उस महिला ने गर्भधारण कर लिया। जब अल्ट्रासाउंड के दौरान उस बच्चे की पहली दिल की धड़कन सुनी गई, तो वह पल केवल उस परिवार के लिए ही नहीं बल्कि खुद डॉ. शाहिदा के लिए भी आंखों में खुशी के आंसू लाने वाला और हमेशा के लिए यादगार बन गया।

वर्तमान समय में डॉ. शाहिदा नगमा अपनी बेहतरीन सेवाएं देने के लिए छतरपुर मेन रोड पर स्थित 'रेडियंस लाइफलाइन एंड फर्टिलिटी क्लिनिक' से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा वे ईस्ट ऑफ कैलाश, नई दिल्ली में स्थित मशहूर 'क्लाउडनाइन अस्पताल' में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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इससे पहले वे देश के जाने-माने 'बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ' संस्थान के साथ भी काम कर चुकी हैं। निसंतानता की समस्या से परेशान और मानसिक तनाव झेल रहे दंपत्तियों को एक बहुत ही प्यारा संदेश देते हुए डॉ. शाहिदा कहती हैं कि माता-पिता बनने का यह सफर हर इंसान के लिए अलग और अनूठा होता है।

इस मुश्किल दौर में एक-दूसरे पर दोष मढ़ने या समाज के लोगों के ताने सुनकर खुद को कमजोर समझने के बजाय सही समय पर किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। वे हमेशा यही सलाह देती हैं कि हमेशा तनाव से दूर रहें, सकारात्मक सोच रखें और किसी अच्छे विशेषज्ञ के सही मार्गदर्शन में आगे बढ़ें ताकि आपकी यह माता-पिता बनने की यात्रा बेहद सुखद और खुशहाल बन सके।