मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर प्रकाश आंबेडकर ने रखी नई सोच

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-05-2026
Prakash Ambedkar Presents a New Perspective on the Muslim-Dalit Alliance
Prakash Ambedkar Presents a New Perspective on the Muslim-Dalit Alliance

 

आवाज मराठी ब्यूरो, मुंबई

भारतीय संविधान के मूल्यों पर आधारित एक तरक्कीपसंद और सबको साथ लेकर चलने वाला समाज बनाने के लिए मुस्लिम, दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज को एकजुट होकर 'नए सियासी समीकरणों' की बुनियाद रखने का वक्त आ गया है। ऐसा बेहद उम्मीद भरा और पॉज़िटिव सुर मुंबई में आयोजित एक किताब के विमोचन समारोह में गूंजा। 'प्रबुद्ध भारत' पब्लिकेशन की तरफ से सियासी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता फारूक अहमद की लिखी किताब 'खौफ और नफरत के दौर में मुसलमानों का सियासी एजेंडा' का हाल ही में विमोचन किया गया।

मुंबई के ऐतिहासिक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर भवन में आयोजित इस प्रोग्राम में एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर, सीनियर पत्रकार अरफा खानम शेरवानी, स्मिता पानसरे,  पूर्व आईपीएस अफसर अब्दुल रहमान और इतिहासकार सरफराज अहमद मौजूद थे। इस पूरे प्रोग्राम में भविष्य के 'पॉज़िटिव सियासी एजेंडे' और 'तरक्की के नए समीकरणों' पर ही खास वक्ताओं ने ज़ोर दिया।

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सत्ता हासिल करने के लिए नया सियासी समीकरण बनाएं: एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर

इस किताब के विमोचन समारोह में एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने बेहद बेबाक विचार रखते हुए समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कहा, "मुस्लिम समाज को मुल्ला-मौलवियों के चंगुल से खुद को आज़ाद करना चाहिए। दलित, मुस्लिम, आदिवासी और ओबीसी समाज को सत्ता हासिल करने के लिए एकजुट होना चाहिए। संविधान के दायरे में रहकर जब ये सभी शोषित तबके एक साथ आएंगे, तब देश में एक 'नया सियासी समीकरण' तैयार होगा। यही नई सियासी ताकत भारत को सही मायनों में एक तरक्कीपसंद और लोकतांत्रिक देश बनाएगी। हमारी एकजुटता ही सुनहरे मुस्तकबिल की शुरुआत है।"

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरे एतमाद के साथ शामिल हों: अरफा खानम शेरवानी

सीनियर पत्रकार अरफा खानम शेरवानी ने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में यकीन के साथ आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा, "मुस्लिम समाज को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरे आत्मविश्वास और सक्रियता के साथ शामिल होना चाहिए।

जब हम अपने सियासी मकसद को बहुजन समाज के मकसद के साथ जोड़ते हैं, तब हम सिर्फ अपने हक हासिल नहीं कर रहे होते, बल्कि भारत के लोकतंत्र और 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' को और भी मज़बूत कर रहे होते हैं। बराबरी और तरक्की का यह साझा सफर देश को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।"

तरक्कीपसंद ख्यालात पर आधारित नए समीकरण: स्मिता पानसरे

तरक्कीपसंद विचारक और नेता स्मिता पानसरे ने संविधान की ताकत पर यकीन ज़ाहिर किया। उन्होंने साफ किया कि, "तरक्कीपसंद ख्यालात और भारतीय संविधान की कदरें ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। मुस्लिम और दलित समाज का साझा सामाजिक और सियासी गठजोड़ एक नए, सूझबूझ वाले और बराबरी पर आधारित समाज की निर्माण करेगा। हम सभी को मिलकर एक तरक्कीपसंद भारत बनाने के लिए कदम आगे बढ़ाना चाहिए।"

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के ख्यालात में 'साझा मकसद'

इतिहासकार सरफराज अहमद ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के ख्यालात का बहुत ही बेहतरीन हवाला दिया। उन्होंने कहा, "डॉ. आंबेडकर ने साफ तौर पर कहा था कि हिंदू समाज के कई शोषित तबकों और मुस्लिम समाज की आर्थिक, सियासी और सामाजिक ज़रूरतें बिल्कुल एक जैसी हैं।

इसलिए मुस्लिम समाज को समाज के दलित, ओबीसी और आदिवासी भाइयों के साथ एक 'कॉमन कॉज़' कायम करने की ज़रूरत है। मज़हबी पहचान से ऊपर उठकर आर्थिक और सामाजिक तरक्की के लिए एकजुट होना ही असल नया सियासी समीकरण है।"

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मुख्य धारा में आकर संविधान का राज कायम करें

पिछले कुछ दशकों के पुराने सियासी तजुर्बों को पीछे छोड़कर अब एक नए और कामयाब तजुर्बे की ज़रूरत होने की बात साबिक आईपीएस अफसर अब्दुल रहमान ने साफ की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि, "देश की आबादी में एक बड़ा हिस्सा होने के बावजूद संसद में हमारी नुमाइंदगी कम है, इसे बढ़ाने के लिए समाज को पॉज़िटिव कदम उठाने चाहिए। हमारा सियासी एजेंडा 'भारतीय संविधान के मुताबिक एक तरक्कीपसंद समाज बनाने का एजेंडा' होना चाहिए।"

इस किताब के विमोचन समारोह में राज्य भर से दलित-मुस्लिम समाज के कार्यकर्ता और आवाम बड़ी तादाद में मौजूद थी।