जामिया को टॉप यूनिवर्सिटी बनाने वाली नजमा अख्तर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-05-2026
Najma Akhtar: The Woman Who Transformed Jamia into a Top University
Najma Akhtar: The Woman Who Transformed Jamia into a Top University

 

शाह ताज खान

इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज ने बदलाव की करवट ली है। उसके पीछे किसी न किसी मज़बूत इरादे और विज़न का हाथ रहा है। भारतीय शिक्षा जगत में जब भी महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों का जिक्र आएगा। प्रोफेसर नजमा अख्तर का नाम सबसे ऊपर की कतार में शामिल होगा। वह केवल एक नाम नहीं हैं। वह एक आंदोलन हैं। एक प्रेरणा हैं। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया की पहली महिला वाइस चांसलर बनकर न सिर्फ एक दीवार तोड़ी। बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नई राहें भी हमवार कीं।

प्रोफेसर नजमा अख्तर का सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है। लेकिन इसमें कोई बनावट नहीं है। इसमें सिर्फ मेहनत, पसीना और खुद को साबित करने की जिद्द है। उनका जन्म 13नवंबर 1953को हुआ था। उनकी शिक्षा की नींव अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रखी गई।

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वहां उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई की बल्कि अपनी मेधा का लोहा भी मनवाया। एएमयू में उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया। यही वह समय था जब उनके भीतर एक शिक्षाविद् ने जन्म लिया। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी पूरी की।

उनके शोध का विषय 'उच्च शिक्षा में पारंपरिक और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन' था। उस समय शिक्षा के इन दो अलग रास्तों को लेकर बहुत कम लोग गंभीर थे। लेकिन नजमा अख्तर ने अपनी रिसर्च से दिखाया कि प्रशासन और मानकों में कहां सुधार की जरूरत है।

उनकी काबिलियत का दायरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपनी सोच को वैश्विक फलक पर तराशा। उन्हें यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में शोध करने का मौका मिला। इसके बाद वह अमेरिका गईं।

वहां उन्होंने मशहूर फुलब्राइट फेलोशिप के तहत शैक्षिक योजना पर काम किया। इतना ही नहीं उन्होंने फ्रांस के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशनल प्लानिंग से खास ट्रेनिंग भी ली। यह वह दौर था जब उन्होंने समझा कि दुनिया भर के टॉप संस्थान कैसे काम करते हैं। यही अनुभव आगे चलकर जामिया मिलिया इस्लामिया के लिए संजीवनी साबित हुआ।

नजमा अख्तर की पेशेवर यात्रा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ही शुरू हुई। वहां उन्होंने कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन और एडमिशन हेड जैसी बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद उन्होंने करीब पंद्रह साल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (नीपा) में गुजारे।

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यहां उन्होंने प्रोफेसर और ट्रेनिंग डिपार्टमेंट की हेड के तौर पर काम किया। उनकी प्रशासनिक क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने प्रयागराज में 'स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल मैनेजमेंट एंड ट्रेनिंग' (SIEMAT) की नींव रखी। वह इसकी संस्थापक निदेशक बनीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनेस्को, यूनिसेफ और डानिडा जैसी बड़ी संस्थाओं ने भी उनके ज्ञान का फायदा उठाया।

लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे ऐतिहासिक मोड़ 11अप्रैल 2019 को आया। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की 16वीं वाइस चांसलर नियुक्त हुईं। यह नियुक्ति सिर्फ एक पद नहीं थी। यह एक ऐतिहासिक पल था। 1920में स्थापित हुई जामिया के सौ साल के इतिहास में कभी कोई महिला इस पद पर नहीं पहुंची थी। इतना ही नहीं वह दिल्ली की किसी भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी की पहली महिला वाइस चांसलर भी बनीं।

जब उन्होंने कार्यभार संभाला तो जामिया के सामने चुनौतियां कम नहीं थीं। लेकिन उनके पास एक विज़न था। उनके कार्यकाल में जामिया ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में लंबी छलांग लगाई। उनके नेतृत्व में ही जामिया को एनआईआरएफ और नैक से सर्वोच्च ए++ ग्रेड मिला। जामिया देश की टॉप तीन यूनिवर्सिटीज में शामिल हो गई। उन्होंने जामिया को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे आधुनिकता और तकनीक से जोड़ा।

जामिया की एक सौ साल पुरानी एक अधूरी हसरत थी। वहां एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना करना। कई वाइस चांसलर आए और गए। लेकिन यह सपना फाइलों में ही दबा रहा। प्रोफेसर नजमा अख्तर ने इसे अपनी व्यक्तिगत जिद्द बना लिया। उन्होंने सरकार के साथ लगातार तालमेल बिठाया। अपनी प्रशासनिक सूझबूझ का परिचय दिया। आखिरकार केंद्र सरकार ने जामिया में मेडिकल कॉलेज के लिए मंजूरी दे दी। इसे जामिया के इतिहास में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

नजमा अख्तर ने जामिया में 30से ज्यादा नए और आधुनिक कोर्स शुरू किए। वह जानती थीं कि आज के दौर में केवल डिग्री काफी नहीं है। छात्र को बाजार की जरूरतों के हिसाब से तैयार होना चाहिए। उन्होंने मेडिकल, तकनीकी क्षेत्र, डिजाइन, इनोवेशन, हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट, डिजिटल लर्निंग और आईओटी जैसे विषयों में भविष्य के कार्यक्रम शुरू किए। उनकी कोशिशों से जामिया एक ऐसा कैंपस बन गया जहां आधुनिकता और परंपरा का संगम था।

उनकी अकादमिक सक्रियता कभी कम नहीं हुई। भले ही उनका प्रशासन में ज्यादा समय बीता। लेकिन उन्होंने लेखन से खुद को दूर नहीं रखा। उन्होंने उर्दू भाषा का हमेशा समर्थन किया। उनकी किताबों और शोध पत्रों ने शिक्षा नीति पर गहरा असर डाला।

उनकी किताब 'रेवोल्यूशनइजिंग एजुकेशन: नेविगेटिंग द एनईपी 2020एरा' राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। वहीं उनकी कॉफी टेबल बुक 'मन की बात: ए मीडियम ऑफ कम्युनिकेशन' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम के सामाजिक और शैक्षिक प्रभाव को बखूबी दर्शाती है। उनकी एक और चर्चित किताब 'हायर एजुकेशन इन इंडिया: इश्यूज एंड चैलेंजेस' उच्च शिक्षा की खामियों और सुधारों पर बेबाक राय रखती है।

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उनके काम और सेवाओं को सरकार ने भी सराहा। साल 2022 में भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से नवाजा। यह जामिया के लिए गौरव का पल था। वह जामिया की पहली वाइस चांसलर बनीं जिन्हें पद पर रहते हुए यह सम्मान मिला।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें इस सम्मान से अलंकृत किया। इसके बाद सम्मानों की झड़ी लग गई। 2023में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। ज़ी मीडिया ग्रुप ने उन्हें नेशनल अचीवर्स अवार्ड दिया। उन्हें एनसीसी की मानद कर्नल कमांडेंट भी बनाया गया।

प्रोफेसर नजमा अख्तर की सफलता के पीछे एक ठहराव और गंभीरता है। उनके करीब रहने वाले लोग बताते हैं कि वह मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी शांत रहती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं है। यह इंसान को बेहतर नागरिक बनाती है। उन्होंने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका मानना है कि जब एक महिला शिक्षित होती है तो वह पूरे समाज का प्रशासन बदल सकती है।

आज जब वह अपनी लंबी पारी खेल चुकी हैं। उनकी विरासत जामिया के गलियारों में साफ महसूस की जा सकती है। उन्होंने एक ऐसा जामिया छोड़कर दिया है जो अब पूरी दुनिया से मुकाबला करने के लिए तैयार है। प्रोफेसर नजमा अख्तर की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत सच्ची हो।

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तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। वह उन करोड़ों लड़कियों के लिए एक जीती जागती मिसाल हैं जो अपनी आंखों में बड़े सपने संजोती हैं। उनका सफर हमें सिखाता है कि नेतृत्व सिर्फ पद से नहीं मिलता। वह काम से मिलता है। ईमानदारी से मिलता है। और लोगों का दिल जीतने से मिलता है। प्रोफेसर