राजस्थान में शिक्षा और समाज सुधार की मिसाल: मंसूरी पंचायत

Story by  फरहान इसराइली | Published by  [email protected] | Date 14-05-2026
A Beacon of Education and Social Reform in Rajasthan: The Mansuri Panchayat
A Beacon of Education and Social Reform in Rajasthan: The Mansuri Panchayat

 

फरहान इसराइली/जयपुर

राजस्थान की मरुधरा अपनी वीरता और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। इसी मिट्टी में बदलाव की एक ऐसी इबादत लिखी जा रही है जो खामोश है मगर बहुत असरदार है। जयपुर के करबला मैदान स्थित हज हाउस में जब सैकड़ों बच्चों के चेहरों पर मुस्कान खिली तो वह सिर्फ एक पुरस्कार मिलने की खुशी नहीं थी। वह गवाही थी उस पच्चीस साल के सफर की जिसे मंसूरी पंचायत संस्था ने अपने खून-पसीने से सींचा है। समाज में तालीम की अलख जगाने का यह मिशन अब एक कारवां बन चुका है।

d

जब हम समाज सुधार की बात करते हैं तो अक्सर बड़े-बड़े वादों और कागजी योजनाओं का जिक्र होता है। लेकिन जयपुर की जमीन पर एक संस्था ऐसी भी है जिसने बिना किसी शोर-शराबे के शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। मंसूरी पंचायत संस्था राजस्थान ने हाल ही में अपना 25वां सिल्वर जुबली प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया।

यह आयोजन महज एक रस्म नहीं थी बल्कि उन बच्चों के सपनों को उड़ान देने का मंच था जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। इस खास मौके पर आरको ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज एंड सोशल सर्विसेज ने अपना पूरा सहयोग देकर इस मुहिम को और मजबूती प्रदान की।

समारोह के दौरान नजारा देखने लायक था। एक तरफ वे बच्चे थे जिन्होंने राजस्थान बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में झंडे गाड़े थे। दूसरी तरफ वे मासूम थे जिन्होंने कुरआन को अपने सीने में महफूज किया यानी हाफिज-ए-कुरआन बने। इस बार कुल 251 विद्यार्थियों और 40 हाफिजों को सम्मानित किया गया।

d

यह संख्या बताती है कि समाज अब अपनी प्राथमिकताएं बदल रहा है। बारहवीं कक्षा में 96 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले होनहारों को जब दस-दस हजार रुपये और मेडल दिए गए तो उनकी आंखों में चमक देखते ही बनती थी। इसी तरह दसवीं में 95 प्रतिशत से ऊपर रहने वाले बच्चों को चार-चार हजार रुपये और प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया गया।

इस पूरे अभियान के पीछे अब्दुल लतीफ आरको का अटूट विश्वास और मेहनत छिपी है। संस्था के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने साल 2001 में एक छोटा सा बीज बोया था। उस समय साल भर में महज 40 से 50 बच्चों को सम्मानित किया जाता था। आज पच्चीस साल बाद यह संख्या 300 के करीब पहुंच गई है।

अब तक करीब छह हजार प्रतिभावान बच्चों को इस मंच से प्रोत्साहन मिल चुका है। अब्दुल लतीफ आरको का मानना है कि शिक्षा ही वह इकलौता रास्ता है जो गरीबी और पिछड़ेपन की बेड़ियों को काट सकता है। उनका संदेश बहुत साफ और सीधा है कि शादियों में फिजूलखर्ची करने के बजाय वह पैसा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करें।

संस्था का काम सिर्फ मेडल बांटने तक सीमित नहीं है। समाज के भीतर पैठी दहेज जैसी कुप्रथा पर भी इन्होंने कड़ा प्रहार किया है। मंसूरी पंचायत अब तक 22 से अधिक सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित कर चुकी है। इन सम्मेलनों के जरिए दो हजार से अधिक जोड़ों का निकाह सादगी के साथ मुकम्मल कराया गया।

ff

लॉकडाउन तक यह सिलसिला लगातार चलता रहा। आज भी संस्था एक निशुल्क मैरिज ब्यूरो चलाती है। यहाँ बिना किसी तामझाम के लोग अपने बच्चों के लिए बेहतर रिश्ते तलाशते हैं। इसके अलावा परिवारों के बीच होने वाले आपसी विवादों को सुलझाने और जरूरतमंदों को कानूनी मदद दिलाने में भी यह संस्था ढाल बनकर खड़ी रहती है।

शिक्षा के क्षेत्र में बदलते वक्त के साथ संस्था ने खुद को भी अपडेट किया है। पिछले सात सालों से यहाँ निशुल्क कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। आज के दौर में अंग्रेजी बोलना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

मंसूरी पंचायत ने अनीस सर जैसे शिक्षकों के माध्यम से बच्चों को इंग्लिश स्पीकिंग की बारीकियां सिखाईं। इस समारोह में इन कोचिंग सेंटर्स के बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी नवाजा गया। यह कोशिश बताती है कि संस्था बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि दुनिया से लड़ने के लिए जरूरी कौशल भी दे रही है।

कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए राजनीति और समाज के कई बड़े चेहरे वहाँ मौजूद थे। पूर्व शिक्षा मंत्री ब्रज किशोर शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तो वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विधायक रफीक खान, अमीन कागजी और रूबी खान जैसे प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने बच्चों के उत्साह को दोगुना कर दिया।

fff

मंच पर मौजूद तमाम दिग्गजों ने एक सुर में कहा कि समाज की तरक्की का रास्ता मदरसों और स्कूलों से होकर गुजरता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही विचारधाराओं के नेताओं का एक मंच पर होना यह बताता है कि बच्चों का भविष्य राजनीति से ऊपर है।

अब्दुल लतीफ आरको ने अपनी बातचीत में एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा सम्मानित होकर मंच से नीचे उतरता है तो उसके मन में आगे बढ़ने की जो ललक पैदा होती है वही हमारी असली कमाई है।

समाज में जब हम एक बच्चे को शिक्षित करते हैं तो दरअसल हम आने वाली कई पीढ़ियों को रास्ता दिखाते हैं। उनकी यह पहल अब महज एक सालाना जलसा नहीं रह गई है। यह एक सांस्कृतिक आंदोलन बन चुका है जो राजस्थान के मुस्लिम समाज को नई दिशा दे रहा है।

सिल्वर जुबली का यह साल मंसूरी पंचायत के लिए मील का पत्थर है। पच्चीस साल पहले शुरू हुआ यह सफर आज एक वटवृक्ष बन चुका है जिसकी छाया में हजारों छात्र अपना भविष्य संवार रहे हैं। करबला मैदान का वह मंजर गवाह था कि अगर इरादे नेक हों और कोशिशें ईमानदार तो बदलाव को आने से कोई नहीं रोक सकता।

dd

यह कहानी उन सभी के लिए एक सबक है जो समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं। मंसूरी पंचायत ने साबित कर दिया है कि खामोशी से किया गया काम ही सबसे ज्यादा शोर मचाता है।