कश्मीर में बिलाल अहमद की संगीत के जरिए नशे के खिलाफ बड़ी जंग
Story by ओनिका माहेश्वरी | Published by onikamaheshwari | Date 16-05-2026
Away from Drugs, Towards Melodies: Bilal Ahmed's Mission
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले बिलाल अहमद अब सिर्फ़ कलाकार नहीं, बल्कि कश्मीर के युवाओं के लिए नशामुक्ति के अभियान के अग्रणी भी हैं। श्रीनगर डाउनटाउन के इस युवा संगीतकार ने अपनी कला का इस्तेमाल सिर्फ़ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज सुधार और युवाओं को नशे की आदतों से दूर करने के लिए किया है।
मिज़राब एनजीओ और नशा मुक्ति अभियान
बिलाल ने 2008 में मिज़राब एनजीओ की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर लाना और उन्हें सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन देना है। वर्तमान में वे 18 से 24 वर्ष के युवाओं के साथ काम कर रहे हैं, जहां उन्हें संगीत के साथ-साथ शिक्षा और भोजन भी प्रदान किया जाता है। उनका कहना है, “कई बच्चे मुझसे संपर्क कर चुके हैं ताकि मैं उन्हें नशे से हटाकर कला और संगीत की ओर मोड़ सकूं।”
बिलाल अहमद अब सिर्फ़ कश्मीर के जाने-माने संगीतकार नहीं रहे। उन्होंने अपनी कला को एक सामाजिक मिशन में बदल दिया है, और आज वे कश्मीर के युवाओं को संगीत के जरिए नशे से दूर रखने के अभियान के अग्रणी बन चुके हैं। श्रीनगर डाउनटाउन के इस युवा कलाकार का मानना है, “संगीत केवल मनोरंजन का जरिया नहीं है, यह समाज सुधार का सबसे ताकतवर माध्यम भी हो सकता है।”
2000 के दशक की शुरुआत में कश्मीर के दो गायकों इरफान नबी और बिलाल अहमद अपनी मधुर आवाज़ और लोकप्रिय गीतों जैसे “Zamaane Pok Na Humdum”, “Toti Kiya Gao” और “Tamas Gayi Zulf Brahm” के लिए जाने गए, और लोग उन्हें अक्सर इरफान-बिलाल के नाम से जानते थे, जैसे वे एक ही व्यक्ति हों। लेकिन प्रसिद्धि के बावजूद, दोनों हमेशा जमीन से जुड़े रहे। उस समय उन्होंने बच्चों के लिए संगीत सीखने का एक केंद्र खोला था, जिसे राजनीतिक संकट के कारण बंद करना पड़ा, लेकिन आज 17 साल बाद वे फिर से बच्चों को संगीत सिखा रहे हैं और उन्हें नशे से दूर रखने का मिशन निभा रहे हैं।
2020 में बेमिना में खोले गए अपने नए संस्थान Mezrab में वे न केवल संगीत सिखाते हैं बल्कि बच्चों को जीवन की कठिनाइयों का सामना करना और सही रास्ता चुनना भी सिखाते हैं। संस्थान में अब 120 से अधिक बच्चे शामिल हैं, जिनमें महिलाएं भी अच्छी संख्या में हैं, और सबसे छोटा छात्र केवल तीन साल का है जबकि सबसे बड़ा 80 साल से अधिक का है। बिलाल और इरफान बच्चों को यह बताते हैं कि प्रतिभा शुरूआत है, लेकिन मेहनत ही सफलता की असली चाबी है, और पारंपरिक संगीत सीखना भी महत्वपूर्ण है।
वे पटियाला घराने से ताल्लुक रखते हैं और सूफी संगीत पर लगातार काम कर रहे हैं, ताकि कश्मीर में संगीत की सांस्कृतिक धरोहर जीवित रहे। संस्थान में आने वाले बच्चे न केवल संगीत सीखते हैं बल्कि वाद्यों का इतिहास और उनकी सांस्कृतिक महत्ता भी समझते हैं, जिससे उनका ज्ञान बढ़ता है और वे नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहते हैं। इस तरह, इरफान और बिलाल का मिशन बच्चों को सिर्फ संगीत सिखाना नहीं बल्कि उन्हें जीवन में सही दिशा और नशा-मुक्त भविष्य प्रदान करना भी है।
सरकारी समर्थन और कठोर कदम
जम्मू-कश्मीर में युवाओं में नशे की समस्या गंभीर बनी हुई थी, जिसके मद्देनज़र सरकार ने बिलाल से संपर्क किया। उन्हें पूरा समर्थन प्राप्त है. केंद्र और राज्य सरकार, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, और रक्षा मंत्री तक ने उनके अभियान की सराहना की है। सरकार ने नशे के मामलों में कठोर कार्रवाई की, जिसमें संपत्ति जब्त करना, नशे वाले फसलों पर पाबंदी और पुलिस को स्पष्ट निर्देश देना शामिल है।
मेरे यारो, मेरे प्यारो,
नशा मुक्त जम्मू कश्मीर बनाओ।
नशा मुक्त हिंदुस्तान बनाओ।
-बिलाल अहमद
100 दिन का पैडल पद यात्रा अभियान
बिलाल अहमद का ‘100 दिन का पैडल पद यात्रा’ अभियान युवाओं को नशे से दूर करने और नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने का एक अनोखा प्रयास है। अब इस अभियान को लद्दाख में भी शुरू किया जाएगा। उनका संदेश सरल है “संगीत में उठो, संभलो, नशे से दूर रहो।”
शिक्षा और संगीत की यात्रा
बिलाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में पूरी की और संगीत की उच्च शिक्षा मुंबई में उस्ताद सज्जाद अली खान से हासिल की। उन्होंने हारमोनियम, माउथ ऑर्गन और अन्य वायु वाद्य सीखें। वहीं उनके साथी इरफान ने स्ट्रिंग वाद्य जैसे गिटार आदि सीखे। दोनों ने मिलकर दुनियाभर में कई कंसर्ट्स दिए, जिसमें अमेरिका की सात शहरों की यात्रा, मलेशिया, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।
युवाओं में संगीत के माध्यम से बदलाव
बिलाल और इरफान ने कश्मीर में इंडो-वेस्टर्न संगीत की शुरुआत की। उन्होंने पारंपरिक संगीत के साथ आधुनिक गिटार और अन्य वाद्यों को मिलाकर युवाओं को आकर्षित किया। उन्होंने कश्मीर में कई बैंड स्थापित किए हैं और अब गर्ल बैंड लॉन्च करने की तैयारी में हैं। उनके 1000 से अधिक कंसर्ट्स युवाओं को नशे से दूर करने में मददगार साबित हुए हैं।
महाकुंभ और सामाजिक संदेश
कश्मीर में अगले साल 40-50 वर्षों बाद महाकुंभ आयोजित होने जा रहा है। बिलाल अहमद इसके लिए गीत रच रहे हैं, ताकि युवाओं में जागरूकता और सामाजिक संदेश फैलाया जा सके। उनका कहना है कि 2003 में जब वे कश्मीर आए थे, तो कई चुनौतियाँ थीं, लेकिन अब केवल संगीत ही एक ऐसा माध्यम है जो युवाओं को जोड़ता है और उन्हें सकारात्मक जीवन की राह दिखाता है।
कला, संगीत और समाज की तीनहरी मिशाल
बिलाल का संगीत अकादमी न सिर्फ़ कला सिखाती है, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें जीवन में मार्गदर्शन देने का कार्य भी करती है। उनका मानना है कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को सुधारने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। “कई बच्चे मुझसे मिलते हैं और कहते हैं कि संगीत ने उनके जीवन को बदल दिया,” बिलाल कहते हैं। उनके साथ अब 12 सदस्य इस सामाजिक मिशन में सक्रिय हैं।
वैश्विक पहचान
बिलाल अहमद ने कश्मीर की पारंपरिक सूफी संगीत को वैश्विक मंच पर भी पेश किया है। वे विश्व स्तर पर कंसर्ट्स में कलाकारों के साथ प्रदर्शन करते हैं और युवाओं को संगीत के माध्यम से नई दिशा देने का कार्य जारी रखते हैं।
संगीत से लेकर समाज सेवा तक का यह सफर बिलाल अहमद के लिए सिर्फ़ कला का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह युवाओं के जीवन में बदलाव लाने और कश्मीर को नशामुक्त और सकारात्मक दिशा में ले जाने का मिशन बन गया है। उनके प्रयास न सिर्फ़ कश्मीर में बल्कि पूरे विश्व में युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
बिलाल अहमद का यह सफर केवल संगीत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं के जीवन में बदलाव लाने और कश्मीर को नशामुक्त और सकारात्मक दिशा में ले जाने का मिशन बन गया है। उनका प्रयास न सिर्फ कश्मीर में बल्कि पूरी दुनिया के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है। बिलाल कहते हैं “संगीत की ताकत से हम सिर्फ गीत नहीं गाते, हम भविष्य बदलते हैं.”