भारत-यूएई की बढ़ती नजदीकी से बौखलाए विरोधी, छेड़ी डिजिटल जंग

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 15-05-2026
rattled by the growing closeness between India and the UAE, adversaries launch a digital war. AI immage Hashmi
rattled by the growing closeness between India and the UAE, adversaries launch a digital war. AI immage Hashmi

 

मलिक असगर हाशमी, नई दिल्ली

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 मई 2026 से शुरू होने वाली पांच देशों की यात्रा ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस दौरे का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई है। जैसे ही यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें "अनमोल रत्न" बताया, सोशल मीडिया पर एक अलग ही युद्ध छिड़ गया। यह विवाद केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहा बल्कि व्यक्तिगत हमलों और गहरे दुष्प्रचार तक जा पहुंचा है। भारत विरोधियों को यह बात हजम नहीं हो रही कि जब खाड़ी देशों में इजरायल, अमेरिका और ईरान के संघर्ष को लेकर ध्रुवीकरण हो रहा है, तब भारत और यूएई की दोस्ती इतनी गहरी कैसे हो रही है।

रीम अल हाशिमी ने दोहा में दिए अपने बयान में बड़े उत्साह के साथ कहा था कि यूएई पीएम मोदी की यात्रा का इंतजार कर रहा है। उन्होंने इस रिश्ते को एक लंबी साझेदारी और गहरी दोस्ती का प्रतीक बताया। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के पदभार संभालने के बाद से दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा है।

इस साल की शुरुआत में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद भारत आए थे। फिर फरवरी में वहां के क्राउन प्रिंस एआई शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे थे। कूटनीतिक नजरिए से देखें तो यह दौरा व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और हरित विकास के क्षेत्रों में भारत की पकड़ को मजबूत करने वाला है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने इस यात्रा को बहुत महत्वपूर्ण माना है। उनके अनुसार यह दौरा एक ऐसे नाजुक समय पर हो रहा है जब वैश्विक सप्लाई चेन बदल रही है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए इंजीनियरिंग, फार्मा और डिजिटल व्यापार के नए दरवाजे खुलेंगे। यूएई भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार रहा है और मध्य पूर्व के बाजारों तक पहुंचने का सबसे बड़ा रास्ता भी है।

हालांकि इस रणनीतिक सफलता के बीच सोशल मीडिया पर जो तस्वीर दिख रही है वह काफी चिंताजनक है। रीम अल हाशिमी के बयान के आते ही भारत विरोधियों और ट्रोलर्स की फौज सक्रिय हो गई। इन लोगों ने न केवल कूटनीति पर सवाल उठाए बल्कि निजी हमले करने में भी कसर नहीं छोड़ी। कुछ अकाउंट्स से रीम अल हाशिमी के परिवार को बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्हें विवादित 'एपिस्टीन फाइल्स' से जोड़ने के झूठे दावे किए गए। यह सब एक सोची समझी साजिश का हिस्सा लगता है।

सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन हमलों में भारत और यूएई को इजरायल का सहयोगी बताकर निशाना बनाया जा रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि गाजा में जारी संघर्ष और वहां हुई मौतों के लिए ये देश जिम्मेदार हैं। मजहर जेडी और मीडिया एक्स जैसे कुछ हैंडल्स ने तो इसे "नरसंहार में शामिल लोगों की मुलाकात" तक कह दिया। कुछ ट्रोलर्स ने रीम अल हाशिमी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। ताज्जुब की बात यह है कि इन दावों का कोई आधार नहीं है। फिर भी सोशल मीडिया पर इसे सच की तरह फैलाया जा रहा है।

हकीकत यह है कि भारत ने हमेशा से ही वैश्विक संघर्षों पर संतुलित रुख अपनाया है। गाजा के मामले में भी भारत ने कभी हिंसा का समर्थन नहीं किया बल्कि हमेशा बातचीत और शांति की वकालत की। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान भी भारत पूरी तरह तटस्थ रहा है।

भारत के रिश्ते ईरान से भी उतने ही मजबूत हैं जितने यूएई से। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इस समय ईरान के विदेश मंत्री अराघची खुद नई दिल्ली के दौरे पर हैं। अगर भारत विरोधी होता तो ईरान के शीर्ष राजनयिक आज भारत में न होते।

सोशल मीडिया पर चल रहे इस दुष्प्रचार के पीछे की मंशा को समझना मुश्किल नहीं है। यदि आप इन विवादित पोस्ट करने वाले हैंडल्स की जांच करेंगे तो पाएंगे कि इनमें से ज्यादातर नए बनाए गए हैं। इनके फॉलोअर्स की संख्या बहुत कम है। कई हैंडल्स पर पाकिस्तान का झंडा लगा है या उनकी भाषा स्पष्ट रूप से भारत विरोधी है। यह एक सुनियोजित 'टूलकिट' की तरह काम कर रहा है जिसका मकसद पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाना है।

भारत के भीतर से भी कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं जो इस विदेशी दुष्प्रचार को हवा दे रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान करना और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना समय की मांग है। यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है बल्कि देश की छवि के खिलाफ एक डिजिटल हमला है। भारत और यूएई की दोस्ती आज से नहीं बल्कि दशकों पुरानी है। पीएम मोदी के कार्यकाल में इस रिश्ते को जो नई ऊंचाई मिली है वह उन लोगों को परेशान कर रही है जो मुस्लिम जगत और भारत के बीच दूरियां देखना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यह पांच देशों की यात्रा केवल यूएई तक सीमित नहीं है। वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी जाएंगे। यूरोप और खाड़ी देशों के साथ भारत का यह बढ़ता जुड़ाव भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहा है।

यही वजह है कि विरोधी खेमे में बेचैनी है। वे जानते हैं कि आर्थिक और रणनीतिक रूप से भारत को रोकना अब मुमकिन नहीं है इसलिए वे व्यक्तिगत कीचड़ उछालने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का रास्ता अपना रहे हैं।

 

अंततः यह यात्रा भारत की बढ़ती ताकत का अहसास कराती है। सोशल मीडिया का यह शोर कुछ समय के लिए माहौल खराब कर सकता है लेकिन यह उन मजबूत बुनियादों को नहीं हिला सकता जो भारत और यूएई ने मिलकर तैयार की हैं।

ऊर्जा सुरक्षा से लेकर खाद्य सुरक्षा तक दोनों देश एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। ऐसे में इस तरह के प्रोपेगेंडा का मुकाबला केवल सही तथ्यों और मजबूत कूटनीति से ही किया जा सकता है। पीएम मोदी का यह दौरा भारत के भविष्य के लिए नई उम्मीदें लेकर आ रहा है और इसी से विरोधियों को सबसे ज्यादा डर लग रहा है।