14 varieties of mangoes on one tree, a feat achieved by a Gujarat farmer
अर्सला खान/नई दिल्ली
गुजरात के अमरेली जिले के दितला गांव में इन दिनों एक खास आम का पेड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहली नजर में यह पेड़ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही इसकी शाखाओं पर नजर पड़ती है, लोग हैरान रह जाते हैं। इस एक पेड़ पर 14 अलग-अलग किस्मों के आम लगे हुए हैं।
कहीं केसर आम दिखाई देता है, तो कहीं अल्फांसो, लंगड़ा, दशहरी और अम्रपाली जैसी लोकप्रिय किस्में नजर आती हैं। हर शाखा पर अलग रंग, आकार और स्वाद वाले आम लटकते दिखाई देते हैं। यह अनोखा प्रयोग गांव के किसान उकाभाई भट्टी ने करीब 25 वर्षों की मेहनत और धैर्य से संभव किया है।
उकाभाई भट्टी अमरेली जिले के धारी तालुका के दितला गांव के रहने वाले एक प्रगतिशील किसान हैं। खेती और बागवानी में उनकी हमेशा से गहरी रुचि रही है।
उन्होंने आम की अलग-अलग किस्मों को एक ही पेड़ पर उगाने का सपना देखा और इसे सच करने के लिए लगातार प्रयोग शुरू किए। शुरुआत में लोगों को उनका यह विचार अजीब लगा, लेकिन उकाभाई ने हार नहीं मानी।
उन्होंने पारंपरिक ग्राफ्टिंग तकनीक “खुटा कलम” का सहारा लिया। इस तकनीक में अलग-अलग पेड़ों की शाखाओं को एक मजबूत देशी पेड़ से जोड़ा जाता है, ताकि वे उसी पेड़ का हिस्सा बन जाएं।
धीरे-धीरे उनका प्रयोग सफल होने लगा। कई सालों की मेहनत के बाद अब उसी पेड़ पर 14 तरह के आम उग रहे हैं। इनमें केसर, अम्रपाली, लंगड़ा, बादामी, गुलाबी, रसबरी, जमादार, काला जमादार, हापुस और टोटापुरी जैसी किस्में शामिल हैं। खास बात यह है कि हर आम का स्वाद और खुशबू बिल्कुल अलग है। कुछ किस्में ऐसी हैं जो अब बहुत कम देखने को मिलती हैं और कभी नवाबी दौर में काफी लोकप्रिय मानी जाती थीं।
जब आम का मौसम आता है तो यह पेड़ किसी प्राकृतिक प्रदर्शनी से कम नहीं लगता। एक ही पेड़ पर अलग-अलग रंगों के आम दिखाई देते हैं। कुछ आम छोटे और गोल होते हैं तो कुछ लंबे और बड़े आकार के। यही वजह है कि इस पेड़ को देखने के लिए दूर-दूर से किसान, बागवानी विशेषज्ञ और आम लोग गांव पहुंच रहे हैं। लोग इस अनोखे प्रयोग को देखकर हैरानी भी जताते हैं और उकाभाई की मेहनत की सराहना भी करते हैं।
उकाभाई का कहना है कि यह काम आसान नहीं था। हर शाखा को सही तरीके से जोड़ना, उसकी नियमित देखभाल करना और मौसम के अनुसार पेड़ को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। कई बार शाखाएं सूख जाती थीं, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। लगातार प्रयास करते रहने के बाद उन्हें सफलता मिली। उनका मानना है कि खेती में नई तकनीकों और प्रयोगों को अपनाकर किसान बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राफ्टिंग तकनीक खेती के क्षेत्र में बेहद उपयोगी मानी जाती है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि दुर्लभ और खत्म होती जा रही फलों की किस्मों को भी बचाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो एक ही पेड़ पर दर्जनों किस्मों के फल उगाए जा सकते हैं।
उकाभाई भट्टी की यह कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता नहीं है, बल्कि यह मेहनत, धैर्य और नई सोच की मिसाल भी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान कुछ अलग करने की ठान ले तो खेती जैसे पारंपरिक क्षेत्र में भी नए चमत्कार किए जा सकते हैं। आज उनका यह पेड़ केवल आम का पेड़ नहीं, बल्कि कृषि नवाचार और भारतीय किसानों की प्रतिभा का प्रतीक बन चुका है।