जब जिंदगी ने तोड़ा, तब इरम खान ने खुद को फिर से गढ़ा

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 31-05-2026
From Pain to Digital Star: The Inspiring Story of ‘Mom’s Fashion’ Eram Khan
From Pain to Digital Star: The Inspiring Story of ‘Mom’s Fashion’ Eram Khan

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

“ज़िंदगी आपको तोड़ने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन एक मां वही होती है जो हर टूटन के बाद अपने बच्चों के लिए फिर से खड़ी हो जाती है।” आज सोशल मीडिया की दुनिया में लाखों चेहरे मौजूद हैं। हर दिन कोई नया इन्फ्लुएंसर सामने आता है, कोई नया वीडियो वायरल होता है और कोई नया ट्रेंड लोगों का ध्यान खींच लेता है। लेकिन इस भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी कहानी सिर्फ लाइक्स और फॉलोअर्स तक सीमित नहीं रहती। उनकी यात्रा लोगों को सोचने पर मजबूर करती है, प्रेरित करती है और यह एहसास दिलाती है कि असली ताकत चमकती स्क्रीन के पीछे छिपे संघर्षों में होती है।

ऐसी ही एक कहानी है Iram Khan की, जिन्हें आज लाखों लोग ‘मॉम्स फैशन’ के नाम से जानते हैं। इरम खान सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर नहीं हैं। वह उन महिलाओं की प्रतिनिधि हैं जिन्होंने जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया, अपने अकेलेपन को अपनी पहचान में बदला और एक ऐसा सफर तय किया जिसने न सिर्फ उन्हें नई पहचान दी बल्कि हजारों महिलाओं को सपने देखने की हिम्मत भी दी।

एक साधारण लड़की की असाधारण कहानी

लखनऊ की रहने वाली इरम खान हमेशा से महत्वाकांक्षी थीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एचआर प्रोफेशन में अपना करियर बनाया। उनकी जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी—नौकरी, परिवार, सपने और भविष्य की योजनाएं। लेकिन जिंदगी कभी भी सीधी रेखा की तरह नहीं चलती। शादी के बाद वह अपने पति के साथ दमाम चली गईं। एक नया देश, नया माहौल और परिवार से दूरी—यह सब उनके लिए आसान नहीं था। फिर भी उन्होंने खुद को संभाल लिया। लेकिन साल 2016 में उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया।

उन्हें मिसकैरेज का दर्द झेलना पड़ा। यह सिर्फ एक मेडिकल घटना नहीं थी, बल्कि एक भावनात्मक तूफान था जिसने उनकी पूरी दुनिया बदल दी। एक महिला के लिए मां बनने का सपना टूटना सिर्फ एक दुख नहीं होता, वह उसके अस्तित्व को हिला देता है। इरम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दमाम में उनके पास ऐसा कोई नहीं था जिससे वह खुलकर बात कर पातीं। परिवार दूर था, दोस्त कम थे और दिल में एक गहरा खालीपन था। वह खुद को खोती जा रही थीं। लेकिन शायद जिंदगी उन्हें वहीं से एक नई शुरुआत देना चाहती थी।

जब दर्द ने नई राह दिखाई

अपने दुख से बाहर निकलने के लिए इरम ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उस समय इंस्टाग्राम आज जितना बड़ा प्लेटफॉर्म नहीं था। लोग सिर्फ शौकिया तौर पर तस्वीरें और छोटे वीडियो पोस्ट किया करते थे। इरम ने भी एक छोटा-सा पेज बनाया—‘इरम्स कुकिंग जर्नी’। कुकिंग उनका शौक था। उन्होंने सोचा कि क्यों न अपने इस शौक को वक्त बिताने का जरिया बनाया जाए। उन्होंने छोटे-छोटे कुकिंग वीडियो बनाना शुरू किए।

लेकिन यह सिर्फ खाना बनाने का सफर नहीं था। हर वीडियो के साथ वह खुद को फिर से जोड़ रही थीं। कैमरे के सामने मुस्कुराना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कोशिश जारी रखी। धीरे-धीरे सोशल मीडिया उनका “सेफ स्पेस” बन गया। वह जगह जहां वह अपने दुख से कुछ देर के लिए बाहर निकल पाती थीं। जहां लोग उन्हें जज नहीं कर रहे थे, बल्कि उनके काम को पसंद कर रहे थे। इरम आज भी मानती हैं कि अगर उन्होंने उस समय कंटेंट क्रिएशन शुरू नहीं किया होता, तो शायद वह खुद को उस दर्द से बाहर नहीं निकाल पातीं।

पति का साथ बना सबसे बड़ी ताकत

हर सफल महिला की कहानी में एक ऐसा व्यक्ति जरूर होता है जिसने मुश्किल समय में उसका हाथ नहीं छोड़ा। इरम की जिंदगी में वह इंसान उनके पति थे। इरम बताती हैं कि जब उन्होंने कंटेंट बनाना शुरू किया, तब उनके पति ने कभी उन्हें रोका नहीं। उल्टा उन्होंने हमेशा कहा—“जो तुम्हें खुशी दे, वही करो।” जब वह वीडियो शूट करतीं, एडिट करतीं या देर रात तक काम करतीं, तब उनके पति बच्चों का ध्यान रखते। एक मां के लिए यह समर्थन बहुत मायने रखता है। क्योंकि अक्सर महिलाओं के सपने जिम्मेदारियों के नीचे दब जाते हैं। लेकिन इरम के पति ने उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि उनका सपना महत्वहीन है। यही कारण है कि आज भी इरम अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार और खासकर अपने पति को देती हैं।

‘मॉम्स फैशन’ का जन्म

साल 2019 इरम की जिंदगी में नई खुशियां लेकर आया। उनके बेटे का जन्म हुआ। मां बनने के बाद उनकी दुनिया बदल गई। अब उनके वीडियो सिर्फ कुकिंग तक सीमित नहीं रहे। वह अपने मातृत्व के अनुभव साझा करने लगीं—बच्चों की छोटी-छोटी हरकतें, उनकी देखभाल, एक मां की परेशानियां और खुशियां। उसी दौरान उनके मन में एक नया नाम आया—‘मॉम्स फैशन’। यह नाम अचानक आया, लेकिन इसमें उनकी पूरी जिंदगी छिपी थी। एक मां का प्यार, उसका संघर्ष, उसका जुनून और उसकी पहचान, सब कुछ। उन्होंने अपने पेज का नाम बदल दिया। उन्हें नहीं पता था कि एक दिन यही नाम उनकी पहचान बन जाएगा।

कोविड और नई पहचान

फिर आया साल 2020। पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी। लोग घरों में बंद थे और सोशल मीडिया लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका था। इसी दौरान इरम ने लगातार कंटेंट बनाना शुरू किया। कभी डालगोना कॉफी, कभी रमज़ान स्पेशल रेसिपी, कभी बच्चों के साथ छोटे-छोटे मजेदार पल—उनका कंटेंट बेहद सादगी भरा होता था। लेकिन यही सादगी लोगों को पसंद आने लगी।

उनके वीडियो में कोई दिखावा नहीं था। वह बिल्कुल वैसी ही दिखाई देती थीं जैसी एक आम भारतीय मां होती है—घर संभालती हुई, बच्चों के पीछे भागती हुई, कभी थकी हुई तो कभी खुश। लोगों को उनमें अपना अक्स दिखने लगा। धीरे-धीरे उनके फॉलोअर्स बढ़ने लगे। लोग ‘इरम खान’ को नहीं, बल्कि ‘मॉम्स फैशन’ को पहचानने लगे।

संघर्ष खत्म नहीं हुआ था

लेकिन सोशल मीडिया की चमक के पीछे संघर्ष अब भी जारी था। 2020 से 2023 के बीच उनका परिवार लखनऊ में संयुक्त परिवार के साथ रहा। वहां उन्हें प्यार और सहयोग तो मिला, लेकिन कंटेंट क्रिएशन को लेकर कई सीमाएं भी थीं। इसके बाद उनके पति का ट्रांसफर उदयपुर हो गया। उदयपुर खूबसूरत शहर था, लेकिन वहां इरम खुद को सीमित महसूस करने लगीं। उन्हें लगा कि उनके सपने धीरे-धीरे रुक रहे हैं।

एक समय ऐसा आया जब उन्होंने सोच लिया कि अब कंटेंट क्रिएशन छोड़ देना चाहिए। उन्हें लगने लगा कि शायद यह दुनिया उनके लिए नहीं है। लेकिन जिंदगी हमेशा आखिरी मौके के बाद एक नई उम्मीद देती है। इरम ने खुद को टूटने नहीं दिया। उन्होंने दुआ मांगी कि उन्हें ऐसी जगह मिले जहां वह खुद भी आगे बढ़ सकें और उनके बच्चों को भी बेहतर माहौल मिले। कुछ ही महीनों बाद उनके पति का ट्रांसफर दिल्ली हो गया।

दिल्ली बना नई उड़ान का शहर

दिल्ली पहुंचना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। यहां उन्हें नए अवसर मिले, नए लोग मिले और सबसे जरूरी खुद पर फिर से भरोसा मिला। दिल्ली में उन्हें पहला बड़ा पीआर कोलैबोरेशन मिला। वह एक छोटा-सा स्टोर विजिट था, लेकिन उनके लिए वह बहुत बड़ा मौका था। उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि लोग उनके काम को गंभीरता से देख रहे हैं। वहीं से उनकी ग्रोथ का नया दौर शुरू हुआ। धीरे-धीरे ब्रांड्स उनसे जुड़ने लगे। इवेंट्स में बुलाया जाने लगा। लोग उन्हें पहचानने लगे। लेकिन सबसे खास बात यह थी कि उनकी पहचान सिर्फ एक इन्फ्लुएंसर की नहीं, बल्कि एक “रियल मॉम” की बन रही थी।

ट्रोलिंग, आलोचना और मानसिक दबाव

सोशल मीडिया जितनी जल्दी लोगों को स्टार बनाता है, उतनी ही जल्दी उन्हें तोड़ने की कोशिश भी करता है। इरम को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कभी उनके हिजाब को लेकर सवाल उठे, कभी उनके पहनावे पर बातें हुईं। कई लोगों ने कहा कि वह बच्चों का इस्तेमाल फेम और पैसों के लिए कर रही हैं। इन बातों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। एक समय के लिए उन्होंने अपने बच्चों को वीडियो से दूर कर दिया। उन्हें डर लगने लगा कि कहीं लोग गलत न समझें। लेकिन फिर उन्होंने खुद से पूछा “क्या मैं अपने बच्चों को नुकसान पहुंचा रही हूं?”

जब जवाब “नहीं” था, तो उन्होंने फिर लोगों की बातों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उनके पति ने फिर उनका साथ दिया और कहा—“अगर तुम्हारा इरादा सही है, तो किसी की बात मायने नहीं रखती।”

आज की ‘मॉम्स फैशन’

आज इरम खान लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके फॉलोअर्स सिर्फ उनके वीडियो नहीं देखते, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। कई महिलाएं उन्हें देखकर अपना सफर शुरू कर रही हैं। हाल ही में एक महिला ने उनसे कहा कि वह इरम से प्रेरित होकर अपना कुकिंग चैनल शुरू कर रही हैं। इरम के लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। वह मानती हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होना सफलता नहीं है। असली सफलता तब है जब आपका काम किसी और की जिंदगी बदलने की वजह बन जाए।

एक मां जो सिर्फ कंटेंट नहीं, हिम्मत बन गई

आज के दौर में जहां सोशल मीडिया अक्सर दिखावे और नकली चमक से भरा नजर आता है, वहां इरम खान जैसी महिलाएं उम्मीद की तरह सामने आती हैं। उन्होंने साबित किया है कि एक मां सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं होती। अगर उसे सही माहौल और समर्थन मिले, तो वह अपने सपनों को भी पूरा कर सकती है। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि जिंदगी में मुश्किलें आएंगी, लोग आलोचना करेंगे, रास्ते रुकेंगे और कई बार खुद पर भरोसा भी टूटेगा। लेकिन अगर इंसान अपने इरादों पर कायम रहे, तो कोई भी मुश्किल उसे रोक नहीं सकती।

इरम खान की यात्रा सिर्फ सोशल मीडिया की सफलता की कहानी नहीं है। यह एक ऐसी महिला की कहानी है जिसने दर्द को ताकत में बदला, टूटन को पहचान बनाया और लाखों महिलाओं को यह भरोसा दिया कि सपने कभी खत्म नहीं होते। क्योंकि एक मां जब ठान लेती है, तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन जाती है।