हज का रूहानी मंज़र, मिना पहुंचे दुनिया भर के हाजी

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 27-05-2026
The Spiritual Spectacle of Hajj: Pilgrims from Across the Globe Arrive in Mina
The Spiritual Spectacle of Hajj: Pilgrims from Across the Globe Arrive in Mina

 

सऊदी अरब में हज 2026 के रूहानी और भावुक कर देने वाले मंज़र पूरी दुनिया के मुसलमानों के दिलों को छू रहे हैं। रुक्न-ए-आज़म वकूफ-ए-अराफात अदा करने के बाद 17 लाख से अधिक हाजी अब मुजदलिफा से मिना पहुंचने लगे हैं, जहां वे रमी-जमरात यानी शैतान को कंकरी मारने की रस्म अदा करेंगे। “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” की सदाओं, नम आंखों और दुआओं में डूबे इन मंज़रों ने हज के आध्यात्मिक महत्व को फिर दुनिया के सामने जीवंत कर दिया है।

सऊदी अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष कुल 17 लाख 7 हजार 310 लोगों ने हज अदा किया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 2.04 प्रतिशत अधिक है। इनमें 15 लाख 46 हजार 655 हाजी दुनिया के विभिन्न देशों से सऊदी अरब पहुंचे, जबकि 1 लाख 60 हजार 646 स्थानीय हाजी थे, जिनमें सऊदी नागरिक और वहां रहने वाले विदेशी शामिल हैं।

मंगलवार को लाखों हाजियों ने इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक वकूफ-ए-अराफात अदा किया। अराफात के मैदान में सूरज ढलने तक लोग इबादत, तिलावत और दुआओं में मशगूल रहे। हाजियों ने ज़ोहर और असर की नमाज़ कसर और जमाअत के साथ अदा की और खुत्बा-ए-हज सुना। हर तरफ सिर्फ दुआएं, आंसू और अल्लाह की बंदगी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता रहा।

जबल-ए-रहमत के दामन में मौजूद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले से आए औरंगज़ेब खान ने बताया कि उन्हें वर्ष 2009 में पहली बार हज की सआदत मिली थी, लेकिन इस बार सऊदी सरकार की व्यवस्थाएं पहले से कहीं अधिक आधुनिक और सुविधाजनक लगीं। उन्होंने कहा, “आज इस मुकद्दस जगह पर हम अपने मुल्क की अमन, तरक्की और स्थिरता के लिए खास दुआ कर रहे हैं।”

पहली बार हज कर रहे अली अकबर खान ने कहा कि वे वर्षों से टीवी पर वकूफ-ए-अराफात के दृश्य देखते थे, लेकिन आज खुद उस मैदान में मौजूद होना उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है। उन्होंने कहा, “जब अल्लाह बुलाता है तो सारे रास्ते खुद आसान हो जाते हैं।”

इटली में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के साजिद अली ज़ैब ने कहा कि वे हमेशा चाहते थे कि कम उम्र में ही हज अदा करें ताकि तमाम अरकान पूरी ताकत और समर्पण के साथ निभा सकें। उनके मुताबिक हज इंसान को सब्र, अनुशासन और इंसानियत का सबसे बड़ा पाठ सिखाता है।

वकूफ-ए-अराफात के बाद सूर्यास्त होते ही लाखों हाजी मुजदलिफा के लिए रवाना हुए। वहां उन्होंने मग़रिब और ईशा की नमाज़ कसर और जमाअत के साथ अदा की, रात खुले आसमान के नीचे गुजारी और रमी के लिए कंकरी जमा कीं। पूरी रात मुजदलिफा में इबादत, तस्बीह और दुआओं का सिलसिला जारी रहा।

मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात से हाजियों के काफिले मिना पहुंचने लगे, जहां वे जमरात को कंकरी मारने की सुन्नत अदा करेंगे। सऊदी हज मंत्रालय ने हाजियों की आवाजाही को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विभिन्न देशों के हज मिशनों को विशेष शेड्यूल जारी किए हैं, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

 

सऊदी सुरक्षा एजेंसियां, स्वास्थ्य मंत्रालय, नागरिक सुरक्षा विभाग और अन्य संबंधित संस्थाएं लगातार सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था तय रणनीति के अनुसार सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। मिना और मुजदलिफा में मेडिकल टीमों, एम्बुलेंस सेवाओं, निगरानी प्रणाली और डिजिटल गाइडेंस सिस्टम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा गया है ताकि हाजियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सऊदी जनरल अथॉरिटी फॉर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के अनुसार इस साल कुल हाजियों में 8 लाख 93 हजार 396 पुरुष और 8 लाख 13 हजार 905 महिलाएं शामिल हैं। विदेशों से आने वाले हाजियों में 14 लाख 85 हजार 729 लोग हवाई मार्ग, 54 हजार 429 लोग सड़क मार्ग और 6 हजार 497 लोग समुद्री मार्ग से सऊदी अरब पहुंचे।

इस वर्ष “मक्का रूट इनिशिएटिव” भी हज प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इस सुविधा का लाभ 3 लाख 88 हजार 700 हाजियों ने उठाया। इसके तहत विभिन्न देशों में ही इमिग्रेशन और अन्य यात्रा प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाती हैं, जिससे सऊदी अरब पहुंचने पर हाजियों को काफी आसानी होती है।

हज 2026 में आधुनिक तकनीक का उपयोग भी उल्लेखनीय रहा। मक्का, मदीना और मशाएर मुकद्दसा में संचार व्यवस्था को और मजबूत किया गया, जिसके कारण कॉल और डिजिटल संचार की संख्या 21.3 मिलियन तक पहुंच गई। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हाजियों को मार्गदर्शन और संपर्क में काफी सुविधा मिली।

हज ऑपरेशंस के लिए इस वर्ष 4 लाख 20 हजार 70 से अधिक कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें सुरक्षा बल, स्वास्थ्य कर्मी, सफाई कर्मचारी, ट्रैफिक अधिकारी और अन्य सेवा एजेंसियां शामिल हैं। हालांकि स्वयंसेवकों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

अराफात, मुजदलिफा और मिना के ये दृश्य एक बार फिर पूरी दुनिया को इस्लाम के भाईचारे, समानता और एकता का संदेश दे रहे हैं। लाखों लोग बिना किसी जाति, भाषा और राष्ट्रीयता के भेदभाव के एक ही सफेद लिबास में अल्लाह के सामने खड़े दिखाई दिए। यही हज का सबसे बड़ा संदेश भी है कि इंसान दुनिया की तमाम दीवारों को तोड़कर सिर्फ अपने रब की बंदगी में झुक जाए।

अब दुनिया भर की निगाहें मिना में जारी रमी-जमरात, कुर्बानी और तवाफ-ए-जियारत पर टिकी हैं, जहां हाजी अपने हज के अंतिम और महत्वपूर्ण अरकान अदा करेंगे।