मलिक असगर हाशमी/नई दिल्ली
देश में जब भी मजहबी दीवारों और नफरत की बातें सुर्खियां बनती हैं तब खेल के मैदान से कुछ ऐसी कहानियां निकलती हैं जो दिलों को जोड़ देती हैं। भारत की असल खूबसूरती यही है कि यहाँ हुनर किसी मजहब का मोहताज नहीं होता। जब किसी को मदद की जरूरत होती है तो हाथ बढ़ाने वाला उसका धर्म नहीं देखता। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के स्टार ओपनर बल्लेबाज यशस्वी जयसवाल आज जो चौके छक्के लगा रहे हैं उसके पीछे भी एक ऐसी ही बेमिसाल कहानी है। अगर मुंबई के एक मुस्लिम संस्थान ने सही समय पर यशस्वी का हाथ न थामा होता तो शायद इस बेमिसाल खिलाड़ी का करियर आजाद मैदान की खाक में कहीं खो गया होता।
अंजुमन ए इस्लाम का इतिहास भारतीय क्रिकेट के लिए नया नहीं है। भारत को पहला ऑलराउंडर देने वाले सलीम दुर्रानी और घरेलू क्रिकेट के दिग्गज वसीम जाफर जैसे इंटरनेशनल क्रिकेटर इसी शिक्षण संस्थान की देन हैं। सबसे हैरान करने वाली और खूबसूरत बात यह है कि एक मुस्लिम शिक्षण संस्थान होने के बावजूद इसकी 16 सदस्यीय क्रिकेट टीम में केवल चार मुस्लिम खिलाड़ी शामिल हैं।

स्कूल टीम में यशस्वी
इस टीम के कप्तान युवान राजपूत हैं। टीम के बाकी सभी खिलाड़ी गैर मुस्लिम हैं। यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यहाँ चयन सिर्फ और सिर्फ प्रतिभा के दम पर होता है मजहब देखकर नहीं। दिलचस्प बात यह भी है कि दशकों से देश की सेवा कर रहे इस संस्थान पर कभी किसी ने धर्म परिवर्तन या कन्वर्जन का कोई आरोप नहीं लगाया। यह शुद्ध रूप से शिक्षा और खेल को समर्पित एक पवित्र मंच है।
यशस्वी जयसवाल का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उत्तर प्रदेश से मुंबई आए इस लड़के ने क्रिकेट खेलने के लिए टेंट में रातें गुजारीं और पानी पूरी तक बेची। लेकिन उनके करियर पर सबसे बड़ा संकट तब आया जब उन पर गलत बर्थ सर्टिफिकेट देकर अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने का आरोप लगा।
इस विवाद के कारण एक तरह से उनके क्रिकेट खेलने पर बैन जैसी स्थिति बन गई थी। उनका भविष्य पूरी तरह से अंधकार में डूब चुका था। ऐसे मुश्किल वक्त में मुंबई के प्रसिद्ध अंजुमन ए इस्लाम स्कूल ने उनका साथ दिया। संस्थान ने उनकी सही स्थिति और कागजातों को तैयार करने में मदद की।
अंजुमन ए इस्लाम ने यशस्वी जयसवाल को अपने उर्दू विभाग में दाखिला दिया। सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि उन्हें स्कूल की क्रिकेट टीम में भी जगह दी। यह मुस्लिम संस्थान बिना किसी भेदभाव के गरीब और होनहार बच्चों को स्कॉलरशिप देता है। यशस्वी को भी यहाँ से पूरा सहयोग मिला जिससे उनका खेल निखरता चला गया।
अंजुमन ए इस्लाम की पिच से शुरू हुआ यशस्वी का यह सफर आज सफलता के आसमान को छू रहा है। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए यशस्वी जयसवाल ने एक नया इतिहास रच दिया है। गुवाहाटी के बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम में मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने आईपीएल में अपने 100 छक्के पूरे कर लिए हैं।
इस बारिश से प्रभावित मैच में राजस्थान रॉयल्स ने 27 रनों से शानदार जीत दर्ज की। 11 11 ओवर के इस मुकाबले में यशस्वी ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की। उन्होंने महज 10 चौकों और 4 छक्कों की मदद से नाबाद 77 रनों की पारी खेली।

यह उनके आईपीएल करियर का १७वां अर्धशतक था। इस पारी की बदौलत राजस्थान रॉयल्स ने 3 विकेट पर 150 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। यशस्वी अब राजस्थान रॉयल्स के लिए 100 से ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों के क्लब में शामिल हो गए हैं। इस सूची में अब वह चौथे स्थान पर हैं। उनसे आगे संजू सैमसन ने 192 छक्के जोस बटलर ने 135 छक्के और शेन वॉटसन ने 109 छक्के लगाए हैं।
इस मैच में जहाँ यशस्वी जयसवाल ने टीम की नींव रखी वहीं 15 साल के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से मैदान पर आग लगा दी। वैभव ने महज 14 गेंदों में 39 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक जसप्रीत बुमराह की गेंदों पर दो गगनचुंबी छक्के जड़े।
मैच के बाद यशस्वी ने अपनी रणनीति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि केवल तीन ओवर का पावरप्ले होने के कारण उनका ध्यान रन गति को तेज रखने पर था। यशस्वी ने अपने युवा जोड़ीदार वैभव की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वैभव बेहतरीन खेल खेल रहा है और वह हमेशा उसे मैदान पर बिना किसी डर के बिंदास खेलने की सलाह देते हैं।
यशस्वी ने यह भी बताया कि बदलते फॉर्मेट के साथ खुद को ढालना आसान नहीं होता लेकिन वह हर परिस्थिति में टीम के लिए बेहतर करने का प्रयास करते हैं।यशस्वी जयसवाल का घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। साल 20-20 के अंडर 19 वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत के लिए सबसे ज्यादा 400 रन बनाए थे।

इसके बाद वह महज 17 साल की उम्र में लिस्ट ए क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज बने। उनकी इस प्रतिभा को देखकर राजस्थान रॉयल्स ने साल 20-20 की नीलामी में उन्हें 2.40 करोड़ रुपये में खरीदा था।
साल 2023 यशस्वी के लिए सबसे खास रहा। उन्होंने आईपीएल 2023 में 48..08 की औसत और 163.61 के स्ट्राइक रेट से 625 रन बनाए। इसी शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह मिली। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू पर ही 171 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। इसके बाद वह टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने जहाँ उन्होंने 1478 रन बनाए। आज वह भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।
अंजुमन ए इस्लाम सिर्फ एक स्कूल नहीं है बल्कि यह भारत की गंगा जमुनी तहजीब का एक बड़ा केंद्र है। इसकी स्थापना देश में शिक्षा के स्तर को सुधारने और समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए की गई थी। साल 1880 में ही इस संस्थान ने ब्रिटिश सरकार को एक ज्ञापन सौंपा था।
इसमें व्यावसायिक औद्योगिक और बालिकाओं की शिक्षा पर जोर दिया गया था जो बाद में देश की शिक्षा नीति का आधार बना। साल 1936 में इस संस्थान ने कारीगरों के लिए पहला तकनीकी स्कूल शुरू किया था। आज इसके पास कई बड़े टेक्निकल हब और इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। पनवेल में स्थित हाजी ए आर कलसेकर इंटीग्रेटेड टेक्निकल कैंपस इसका बड़ा उदाहरण है।
इसके अलावा 1939 में लड़कियों के लिए शुरू हुआ पहला स्कूल आज सबू बाग गर्ल्स एजुकेशन कैंपस के रूप में प्रसिद्ध है जहाँ सात स्कूल और कॉलेज चलते हैं।अंजुमन ए इस्लाम को 20 नवंबर 1946 को कंपनी अधिनियम के तहत एक लाभ निरपेक्ष यानी नॉट फॉर प्रॉफिट संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया था।
यह संस्था महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम के तहत भी रजिस्टर्ड है। वर्तमान में इस महान संस्थान का नेतृत्व पद्म पुरस्कार विजेता डॉ ज़हीर काज़ी कर रहे हैं। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग और विशेषकर अल्पसंख्यकों के शैक्षिक और सामाजिक स्तर को सुधारना है। यह गरीब और जरूरतमंद छात्रों को मुफ्त शिक्षा और स्कॉलरशिप देता है। देश के युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
इसके साथ ही छात्रों में भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय भावना और सभी भाषाओं के प्रति सम्मान पैदा करना इसकी प्राथमिकता रही है। अंजुमन ए इस्लाम की यह कहानी हमें सिखाती है कि जब इरादे नेक हों और दिल में देश के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो मजहब की दीवारें अपने आप गिर जाती हैं। यशस्वी जयसवाल की सफलता में इस संस्थान का योगदान भारत की इसी साझी विरासत की जीती जागती तस्वीर है।