चपरासी से देश के नंबर वन ग्राम सेवक बने असलम शेख

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-07-2026
Aslam Shaikh rose from being a peon to the country's number one Gram Sevak.
Aslam Shaikh rose from being a peon to the country's number one Gram Sevak.

 

भक्ति चालक

स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने साढ़े तीन सौ साल पहले 'मैनेजमेंट' (प्रबंधन) और 'लीडरशिप' (नेतृत्व) की जो मिसाल दुनिया के सामने रखी थी, उसकी शुरुआत जुन्नर की मिट्टी से ही हुई थी। अवाम की भलाई, पानी का सही इंतज़ाम,  स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल और लोगों की हिस्सेदारी ही शिवाजी महाराज के नेतृत्व की असली पहचान थी।

इसी ऐतिहासिक ज़मीन की विरासत को अपने अंदर समेटे हुए, एक आम इंसान ने गांव की तस्वीर बदलने के लिए शिवाजी महाराज के इन्हीं विचारों को एक नया और आधुनिक रूप दिया। पेट पालने के लिए ग्राम पंचायत में चपरासी के तौर पर झाड़ू थामने वाले असलम हुसैन शेख ने अपनी मेहनत और काबलियत से ठिकेकरवाड़ी गांव को देश के नक्शे पर सीधे पहले नंबर पर ला खड़ा किया।

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बचपन में ही छिन गया था मां-बाप का साया

असलम हुसैन शेख का जन्म एक बेहद आम परिवार में हुआ था। उन्होंने नारायणगांव के ज़िला परिषद स्कूल से पहली से सातवीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद आठवीं से दसवीं तक की पढ़ाई गुरुवर्य राजाराम परशुराम सबनीस विद्यामंदिर से हुई।

साल 1982 में, जब वह महज़ आठवीं क्लास में थे, उनके मां-बाप का अचानक इंतकाल हो गया। इस अचानक आई मुसीबत ने उनकी पूरी ज़िंदगी को हिला कर रख दिया था। लेकिन गांव ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। स्वर्गीय भागूबाई शेलार, भामाबाई वालके और उनके परिवार ने असलम की देखभाल की।

इन्हीं लोगों की बदौलत असलम अपनी दसवीं तक की पढ़ाई पूरी कर सके। इस पूरे सफर में उनकी बहन बेबीजान इनामदार ने भी माता-पिता का फर्ज़ निभाते हुए उनकी स्कूल की और दूसरी सभी ज़िम्मेदारियां उठाईं।

इसके बाद 1984 में दसवीं पास करने के बाद असलम के सामने रोज़ी-रोटी का बहुत बड़ा सवाल था। उन्होंने वारुलवाड़ी ग्राम पंचायत में चपरासी के तौर पर नौकरी शुरू की। उस वक्त कृषीरत्न पुरस्कार जीतने वाले अनिल मेहर ने असलम को चपरासी के तौर पर काम करने का पहला मौका दिया था।

नौकरी करते हुए भी असलम ने आगे पढ़ने का अपना जज़्बा नहीं छोड़ा। उन्होंने अगले दो सालों में मांजरी फार्म के एग्रीकल्चर कॉलेज से 'एग्रीकल्चर डिप्लोमा' बेहतरीन नंबरों के साथ पास किया। इसके बाद मंचर कॉलेज से एक्सटर्नल स्टूडेंट के तौर पर 12वीं का इम्तिहान भी पास कर लिया।

1988 में उनकी शादी शमीम शेख से हुई। शमीम ने असलम को आगे बढ़ने में बहुत साथ दिया। लेकिन बदकिस्मती से डेंगू की वजह से शमीम का इंतकाल हो गया। इसके बाद असलम ने बिस्मिल्लाह शेख से शादी की। असलम बताते हैं कि उनकी हर कामयाबी में बिस्मिल्लाह का बहुत बड़ा हाथ है। उनके साजिद नाम का एक बेटा और मुमताज़ नाम की एक बेटी है, और अब दोनों की शादी हो चुकी है।

रुकावटों को पार कर बने ग्राम सेवक

इसी बीच, सरकार के बजट के नए नियमों (शून्य आधारित बजट) की वजह से पूरे महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियां बंद हो गई थीं। इसलिए एग्रीकल्चर डिप्लोमा में बेहतरीन नंबर लाने के बावजूद असलम को नौकरी नहीं मिल रही थी। आखिरकार 1989 में नारायणगांव ग्राम पंचायत में क्लर्क के तौर पर उनकी नौकरी पक्की हुई। 1989 से 2006 तक उन्होंने वहां क्लर्क और सीनियर क्लर्क के तौर पर बहुत ही ईमानदारी से काम किया।

आगे चलकर 2006 में उन्हें एक बहुत बड़ा सुनहरा मौका मिला। पुणे ज़िला परिषद ने ग्राम पंचायत कर्मचारियों के 10 प्रतिशत कोटे से कॉन्ट्रैक्ट पर ग्राम सेवकों की भर्ती निकाली। अपने एग्रीकल्चर डिप्लोमा के बलबूते असलम ने यह इम्तिहान दिया। पूरे महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा नंबर लाकर वह ग्राम सेवक बन गए। इसके बाद उन्होंने जुन्नर तालुका के आपटाले, निरगुडे, आंबेगव्हाण, रोहोकडी और ठिकेकरवाड़ी जैसी अलग-अलग ग्राम पंचायतों में अपने काम का ज़बरदस्त डंका बजाया।

ठिकेकरवाड़ी को बनाया देश में नंबर वन

2021 में असलम शेख ने ठिकेकरवाड़ी ग्राम पंचायत का चार्ज संभाला। उनके आने से गांव के विकास में तेज़ी आ गई। उनके कार्यकाल में गांव ने 'ग्राम ऊर्जा स्वराज विशेष पंचायत पुरस्कार 2023' के तहत पूरे देश में पहला मुकाम हासिल किया और 1 करोड़ रुपये का इनाम जीता।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में यह इनाम देने का प्रोग्राम रखा गया था। इस शानदार प्रोग्राम में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सर्टिफिकेट, ट्रॉफी और 1 करोड़ रुपये का चेक देकर ठिकेकरवाड़ी के आदर्श सरपंच संतोष ठिकेकर, ग्राम सेवक असलम शेख और बीडीओ शरदचंद्र माली का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान किया गया।

जब यह तिकड़ी इस बड़े सम्मान के साथ गांव लौटी, तो पूरे ठिकेकरवाड़ी में ढोल-नगाड़ों, पटाखों और औरतों के भजन मंडलियोंके साथ इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया गया था।

ठिकेकरवाड़ी के सरपंच संतोष ठिकेकर ने असलम के काम के बारे में अपनी राय ज़ाहिर की। उन्होंने कहा, "हमने असलम चाचा के साथ कई सालों तक काम किया है। वह अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हैं। वह बहुत अच्छी तरह से हमारा साथ देते थे और हमें हमेशा उनका बेहतरीन सहयोग मिला।"

असलम शेख की शानदार पहल से बदला गांव

ठिकेकरवाड़ी में महज़ 189 से 190 परिवार रहते हैं। इस छोटे से गांव को असलम शेख और सरपंच संतोष ठिकेकर ने मिलकर एक 'स्मार्ट गांव' बना दिया। अपने कार्यकाल में उन्होंने विकास के कई बड़े काम किए।

  • 100% सोलर एनर्जी का इस्तेमाल:गांव के सभी परिवारों को सोलर एनर्जी के इस्तेमाल के लिए खास सब्सिडी दिलाई गई। आज गांव के हर घर में गर्म पानी के लिए 100% सोलर वॉटर हीटर इस्तेमाल किए जाते हैं।
  • खुद पैदा की अपनी बिजली:गांव ने सोलर प्लांट, बायोगैस प्लांट और पवन चक्की (Windmill) के ज़रिए 10,000 वॉट तक बिजली पैदा करके गांव का बिजली बिल ज़ीरो कर दिया।
  • खेती की ज़मीन की पूरी नाप:गांव की सारी खेती वाली ज़मीन की सरकारी नपाई करवाने वाला ठिकेकरवाड़ी शायद महाराष्ट्र का पहला गांव बन गया।
  • 100% ड्रिप इरिगेशन (ठिबक सिंचन):कृषि विभाग की मदद से गांव की 100 प्रतिशत खेती के लिए सभी किसानों को ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया।
  • मिट्टी की जांच (सॉइल टेस्टिंग):ज़मीन में किन चीज़ों की कमी है, यह जानने के लिए गांव में मिट्टी की जांच की खास मुहिम शुरू की गई, जिसका फायदा किसान आज भी उठा रहे हैं।

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गांव को मिले 45 से ज़्यादा अवार्ड्स

ग्राम पंचायत के सही इंतज़ाम की वजह से ठिकेकरवाड़ी ग्राम पंचायत को अब तक छोटे-बड़े मिलाकर कुल 45 से ज़्यादा अवार्ड्स मिल चुके हैं। इनमें 'संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान' के तहत गांव को महाराष्ट्र में पहला अवार्ड मिला। इसके साथ ही, नेशनल लेवल के बेहद अहम 'राष्ट्रीय गौरव ग्राम स्पर्धा पुरस्कार' को जीतकर यह गांव देश की नंबर वन ग्राम पंचायत बन गया है।

असलम अपने काम के लिए जितने ईमानदार हैं, उतने ही अच्छे शहरी भी हैं। आज के हालात पर चिंता जताते हुए असलम कहते हैं, "आजकल समाज को बांटने की बहुत अजीब कोशिशें हो रही हैं। पहले ऐसे हालात नहीं थे। लोग एक-दूसरे के साथ प्यार और भाईचारे से रहते थे। हमारे नारायणगांव की भी यही पहचान है।"

असलम आगे कहते हैं, "मैं बचपन से देख रहा हूं, आज तक यहां कभी कोई धार्मिक तनाव नहीं हुआ। हम सभी त्योहार मिल-जुलकर मनाते हैं। मैंने 10 साल तक महासरोदय गणेशोत्सव मंडल के सेक्रेटरी और 10 साल तक उपाध्यक्ष के तौर पर भी काम किया है।"

अपने पूरे सफर का निचोड़ बताते हुए वह आखिर में एक बहुत अहम पैगाम देते हैं। वह कहते हैं, "अगर हम सब एकजुट होकर और एक दिल से रहेंगे, तभी हमारे देश की तरक्की होगी। अगर हम सब मिलकर रहेंगे, तो हमारा भविष्य बहुत रौशन है।"