जनता के भरोसे की मिसाल हैं सजदा अहमद

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-07-2026
Sajda Ahmed is an example of the public's trust.
Sajda Ahmed is an example of the public's trust.

 

देबकिशोर चक्रवर्ती

राजनीति में कदम रखना और चर्चा में बने रहना बहुत लोगों के लिए आसान हो सकता है। लेकिन आम जनता के दिलों में अपनी एक अलग और स्थायी जगह बनाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। पश्चिम बंगाल की उलुबेरिया लोकसभा सीट से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सांसद सजदा अहमद का जीवन सफर कुछ ऐसा ही है। उन्होंने एक साधारण महिला से लेकर समाज सेवा के रास्ते पर चलते हुए खुद को जनता के भरोसे के प्रतीक के रूप में स्थापित किया है।

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आज वे क्षेत्र में एक बेहद लोकप्रिय और सफल जननेता के रूप में जानी जाती हैं।सजदा अहमद का जन्म 22 जून 1962 को हावड़ा जिले के उलुबेरिया में हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद से ही उनका झुकाव सामाजिक कार्यों की तरफ हो गया था। समाज के पिछड़े तबकों की मदद करना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया था।

वे खासकर महिलाओं, बच्चों और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों और उनकी भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहीं। सुख हो या दुख, वे हर समय लोगों के साथ खड़ी नजर आईं। उस दौर में वे सीधे तौर पर सक्रिय राजनीति के मंच पर नहीं थीं।

इसके बावजूद जनता के लिए उनकी निस्वार्थ सेवा ने उनके लिए एक बड़े सार्वजनिक जीवन का रास्ता तैयार कर दिया था।  उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने उनके पूरे भविष्य की दिशा को बदल कर रख दिया। वे उलुबेरिया के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुल्तान अहमद की पत्नी हैं।

इस वजह से वे राजनीतिक माहौल को बहुत करीब से समझती थीं। हालांकि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें खुद सीधे तौर पर नेतृत्व की कमान संभालनी पड़ेगी। साल 2017 में सुल्तान अहमद के अचानक निधन से उलुबेरिया के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में एक बड़ा खालीपन आ गया था।

उस कठिन समय में क्षेत्र की जनता और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने उन पर भरोसा जताया। लोगों की उम्मीदों को देखते हुए सजदा अहमद ने इस बड़ी जिम्मेदारी को स्वीकार करने का फैसला किया।इसके बाद साल 2018 के उलुबेरिया लोकसभा उपचुनाव में वे पहली बार ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरीं।

हालांकि चुनावी राजनीति के लिए वे बिल्कुल नई थीं। लेकिन क्षेत्र के लोगों के साथ उनका पुराना और मजबूत रिश्ता काम आया। उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों की बदौलत उन्हें जनता का भरपूर समर्थन मिला। सजदा अहमद ने यह उपचुनाव रिकॉर्ड वोटों के अंतर से जीता और देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में कदम रखा।

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यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक सफलता नहीं थी बल्कि यह उलुबेरिया की जनता का उनके प्रति अटूट विश्वास था।  इस शानदार शुरुआत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2019 के आम चुनाव में उलुबेरिया के मतदाताओं ने एक बार फिर उन पर अपना भरोसा जताया और उन्हें भारी बहुमत से विजयी बनाया।

जनता के साथ उनका यह जुड़ाव लगातार मजबूत होता गया। हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर वे संसद में उलुबेरिया का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

यह लगातार मिलने वाली चुनावी सफलता साफ दिखाती है कि उनकी असली ताकत सिर्फ किसी राजनीतिक दल का टिकट नहीं है। उनकी असली ताकत तो क्षेत्र की जनता के साथ उनका गहरा जमीनी जुड़ाव है।  सजदा अहमद की राजनीति की सबसे बड़ी खासियत उनका बेहद सरल और सहज स्वभाव है।

चाहे सुदूर गांव हों या शहरी इलाके, वे हमेशा आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनती हैं। कोई भी व्यक्ति उनसे आसानी से मिल सकता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा के स्तर को सुधारने, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने, पीने के साफ पानी की व्यवस्था करने, ग्रामीण सड़कों के निर्माण और महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

जनता की जरूरतों और उनकी उम्मीदों को पूरा करने की इसी कोशिश ने उन्हें राजनीति में एक अलग पहचान दी है।उलुबेरिया और हावड़ा जिले के स्थानीय लोग अक्सर उनके द्वारा किए गए कामों की चर्चा करते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने में उन्होंने काफी रुचि दिखाई है।

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी उन्होंने कई ठोस कदम उठाए हैं। चाहे कोरोना महामारी का संकट हो या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा, वे राहत कार्यों और मानवीय मदद के लिए हमेशा जमीन पर सक्रिय रहीं।

संकट के समय में उनकी यह सक्रियता उन्हें एक राजनेता से बढ़कर एक संवेदनशील समाज सेवक के रूप में स्थापित करती है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सजदा अहमद ने अपने पति स्वर्गीय सुल्तान अहमद की जनता से जुड़ी राजनीतिक विरासत को एक नए और मजबूत रूप में आगे बढ़ाया है।

इसके साथ ही उन्होंने अपनी खुद की एक स्वतंत्र और प्रभावशाली राजनीतिक पहचान भी बनाई है। आज उलुबेरिया की जनता के लिए वे सिर्फ एक सांसद नहीं हैं। वे लोगों के सुख-दुख की साथी और एक ऐसी प्रतिनिधि हैं जिन पर हर कोई भरोसा कर सकता है।

एक साधारण घरेलू महिला से समाज सेविका और फिर समाज सेविका से एक जनप्रिय नेता बनने का सजदा सुल्ताना अहमद का यह सफर प्रेरणादायक है। यह कहानी साबित करती है कि अगर मन में समाज की सेवा करने की सच्ची इच्छा हो, तो जनता का प्यार और समर्थन जरूर मिलता है।

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संसद के भीतर वे उलुबेरिया के लोगों की आवाज बुलंद कर रही हैं। वहीं उनका यह संघर्षपूर्ण और सफल जीवन देश की अनगिनत महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में आगे आने और नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करता है।  आने वाले समय में उलुबेरिया के विकास और लोक कल्याण में उनका योगदान कितना व्यापक रूप लेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है कि सजदा अहमद के नेतृत्व की नींव जनसेवा की जमीन पर टिकी है। यही वजह है कि वे आज भी उलुबेरिया की सबसे भरोसेमंद और सम्मानित नेताओं में से एक बनी हुई हैं।