पुणे में मुस्लिम परिवारों ने वारकरियों का किया दिल से स्वागत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-07-2026
Muslim families in Pune gave a heartfelt welcome to the Warkaris.
Muslim families in Pune gave a heartfelt welcome to the Warkaris.

 

भक्ति चालक

महाराष्ट्र संतों की ज़मीन है। इस मिट्टी को संत ज्ञानेश्वर महाराज, संत तुकाराम महाराज और संत चोखामेला जैसे कई संतों के विचारों की विरासत मिली है। इन सभी संतों ने दुनिया को इंसानियत और भाईचारे का पैगाम दिया है। इन्हीं संतों के विचारों का सबसे बड़ा जश्न पंढरपुर की सालाना आषाढ़ी वारी (यात्रा) है।

हर साल आषाढ़ के महीने में लाखों वारकरी (यात्री) हाथों में मंजीरे और सिर पर तुलसी वृंदावन रखकर विट्ठल माउली के दर्शन के लिए पैदल पंढरपुर की तरफ निकलते हैं। पूरे महाराष्ट्र से निकली ये पालकियां जब पुणे में रुकती हैं, तो शहर का रंग पूरी तरह बदल जाता है। हर साल की तरह इस बार भी पुणे के मुसलमानों ने इंसानियत का फर्ज़ निभाते हुए वारकरियों की दिल खोलकर खिदमत की है।

पैर की मसाज और मुफ्त इलाज

वारी में पैदल चलने वाले वारकरी भाइयों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं और शरीर थक जाता है। ऐसे में उनकी सेहत की ज़रूरतों को तुरंत पूरा करने के लिए 'वर्क चैरिटेबल ट्रस्ट' और 'लव शेयर एंड केयर फाउंडेशन' एक साथ आए। इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर रास्ता पेठ के संत गाडगे महाराज मठ में एक हेल्थ कैंप लगाया।

इस कैंप में डॉक्टरों की एक टीम ने वारकरियों का चेकअप किया। उन्हें वहीं पर मेडिकल सलाह दी गई और मुफ्त दवाइयां भी बांटी गईं। इस कैंप में डॉ. आरिफ शेख और उनके साथियों ने वारकरियों का बहुत ही देखभाल के साथ इलाज किया।

लंबे सफर की वजह से वारकरियों के शरीर पर बहुत ज़ोर पड़ता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस कैंप में एक खास फुट मसाज सेक्शन भी बनाया गया था। लगातार पैदल चलने की वजह से थके हुए और पैरों के दर्द से परेशान वारकरियों को आराम देने के लिए यह सारी कोशिशें की जा रही थीं। 

यहां जानकारों के ज़रिए मसाज थेरेपी की बेहतरीन सहूलियत दी गई। डी. वाई. पाटिल नर्सिंग कॉलेज के वॉलिंटियर्स ने बहुत ही अदब और नरमी के साथ वारकरियों को यह फुट मसाज थेरेपी दी।इस मौके पर बात करते हुए ओवैस अंसारी ने इस काम की अहमियत बताई। उन्होंने कहा, "पैगंबर मोहम्मद की तालीम से हमें यह प्रेरणा मिली है। लोगों का दर्द दूर करना और उन्हें तकलीफ से आज़ाद करना ही इंसानियत की सबसे बड़ी खिदमत मानी गई है। आज के दौर में ऐसी खिदमत करना वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है।"

इस पूरे कैंप का बेहतरीन इंतज़ाम वर्क चैरिटेबल ट्रस्ट के पुणे प्रमुख वसीम शेख, और लव शेयर एंड केयर फाउंडेशन के पीयूष शाह और आकाश भालिया ने संभाला। उनकी कड़ी मेहनत की वजह से सभी वारकरियों को वक्त पर और बहुत ही सलीके से सहूलियतें मिलीं।
 

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

पुणे में एक और काबिले तारीफ पहल 'पश्चिम महाराष्ट्र एजुकेशन ट्रस्ट' और 'सामाजिक उद्धार संस्था' ने की। इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर वारकरियों के लिए नाश्ते और खाने-पीने का बहुत अच्छा इंतज़ाम किया। आषाढ़ी वारी के मौके पर पुणे से गुज़रने वाले हज़ारों वारकरियों की खिदमत के लिए यह कदम उठाया गया।

इस काम में पश्चिम महाराष्ट्र एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष ज़ुबैर रशीद खान, सामाजिक उद्धार संस्था के अध्यक्ष सिराज खान, सत्तार शेख, जमीयतुल अंसार ट्रस्ट के उपाध्यक्ष जाफर शेख, शाहिद शेख, सिद्दीक शेख, गौस शेख, चांद शेख और चामड़े गली के सभी मुस्लिम नौजवानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सबने मिलकर इस प्रोग्राम को कामयाब बनाया।

इस दौरान वारकरियों का बहुत प्यार से इस्तकबाल किया गया और उन्हें नाश्ता बांटा गया। संत तुकाराम महाराज के अभंग "अल्ला देवे, अल्ला दिलावे..." का बराबरी और इंसानियत का पैगाम इस मौके पर लोगों के सामने रखा गया। 

आयोजकोंने बताया कि हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम समाज तक पहुंचाने के लिए यह प्रोग्राम रखा गया था। वारकरियों के साथ-साथ मुकामी नागरिकों ने भी इस पहल का दिल से स्वागत किया।

गणेश पेठ के खान परिवार की 5 साल से खिदमत

शहर के बीचों-बीच बसे गणेश पेठ से भी ऐसी ही एक प्रेरणा देने वाली कहानी सामने आई है। लाखों वारकरी जब पंढरपुर की तरफ सफर करते हैं, तो शहर के कोने-कोने से निस्वार्थ खिदमत की मिसालें देखने को मिलती हैं। गणेश पेठ का खान परिवार पिछले 5 सालों से वारकरियों की बहुत ही अकीदत के साथ खिदमत कर रहा है। वे वारकरियों को चाय, नाश्ता और बेहतरीन मेहमाननवाज़ी दे रहे हैं।

यह खान परिवार गणेश पेठ में रहता है। अपने घर के बुज़ुर्गों की रहनुमाई में उन्होंने यह खिदमत शुरू की थी। तब से हर साल पालकी का काफिला जब उनके घर के बाहर से गुज़रता है, तो वे यह रवायत बिना भूले निभाते हैं। 

इस परिवार के सदस्य सिकंदर खान ने अपनी राय रखते हुए कहा, "हमारे वालिद ने यह खिदमत शुरू की थी और पिछले पांच सालों से हम इसे आगे बढ़ा रहे हैं। पालकी का रास्ता हमारे घर के पास से ही गुज़रता है, इसलिए हमें लगता है कि वारकरियों की खिदमत करना और उनका इस्तकबाल करना हमारी ज़िम्मेदारी है।"

यरवडा में 1932 से चली आ रही रवायत

हर साल लाखों वारकरी जब संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज के नाम का जयकारा लगाते हुए पुणे में दाखिल होते हैं, तब यरवडा के कारोबारी इकराम खान अपने परिवार के साथ वारकरियों की खिदमत के लिए तैयार रहते हैं। 

इस बार भी उन्होंने वारकरियों के लिए खाना, पीने का पानी, नाश्ता और दूसरी ज़रूरी सहूलियतों का बहुत अच्छा इंतज़ाम किया था। सैकड़ों वॉलिंटियर्स ने हज़ारों वारकरियों को खुशी-खुशी खाना परोसा।इकराम खान के परिवार का वारी के साथ यह रिश्ता आज का नहीं, बल्कि 94 साल पुराना है। 1932 में इकराम खान के दादा मोसा खान ने पंढरपुर वारी में वारकरियों की खिदमत करना शुरू किया था। उसके बाद उनके वालिद ईसा खान ने इस रवायत को आगे बढ़ाया। 

ईसा खान ने न सिर्फ वारी में, बल्कि रामवाड़ी के राम मंदिर में होने वाले सालाना रामनवमी त्योहार में भी हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे उन्होंने सामाजिक भाईचारे की एक मज़बूत बुनियाद रखी। आज इस परिवार की तीसरी पीढ़ी भी इन्हीं उसूलों को मानते हुए आगे बढ़ रही है। इकराम खान और उनके बेटे अहद इकराम खान ने दशकों पुरानी इस रवायत को जारी रखा है। वे वारकरियों की खिदमत करने के साथ-साथ समाज भलाई के कई कामों में भी हमेशा मदद करते हैं।

अपनी इस रवायत के बारे में बात करते हुए इकराम खान जज़्बाती होकर बताते हैं, "वारकरियों की खिदमत करना सिर्फ हमारी रवायत नहीं है, बल्कि हमारे बुज़ुर्गों की तरफ से हमारे हाथों में सौंपी गई एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। इंसानियत की तालीम मेरे दादा ने हमें दी थी। इस रवायत ने हमारे परिवार को पीढ़ियों से एक साथ जोड़ कर रखा है और हमें फख्र है कि हमारी तीसरी पीढ़ी इसे आगे ले जा रही है।"

'टीम एसआरके पुणे' की तरफ से नाश्ते का इंतज़ाम

आलंदी से पंढरपुर तक सैकड़ों किलोमीटर का यह सफर वारकरी बहुत ही अकीदत के साथ तय करते हैं। इस मुश्किल सफर में वारकरी भाइयों को थोड़ा आराम मिले और उनकी मदद हो सके, इसके लिए 'टीम एसआरके' के सदस्यों ने एक साथ आकर एक खास पहल की। 'टीम एसआरके पुणे' की तरफ से वारी में वारकरियों के लिए चाय, पानी और नाश्ते का इंतज़ाम किया गया था।

इस बेहद अहम और नेक काम का हिस्सा बनने पर टीम एसआरके पुणे ने खुशी ज़ाहिर की है। पंढरपुर की तरफ कदम बढ़ाने वाले हर वारकरी भाई का यह सफर महफूज़, आसान और सुकून भरा हो, ऐसी दुआ भी टीम

की तरफ से की गई। इस काम की वारकरियों के साथ-साथ मुकामी नागरिकों की तरफ से भी काफी तारीफ हो रही है।

मुस्लिम डिप्टी सरपंच ने तुकोबा की पालकी पर बरसाए फूल

पुणे के हवेली तालुका की कदमवाकवस्ती के डिप्टी सरपंच नासिर पठान और उनके परिवार ने संत तुकाराम महाराज की पालकी पर गेंदे के फूलों की बारिश की। इस वाकये का वीडियो आजकल सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है।

 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

 

 

सालों से चली आ रही पुणे के मुसलमानों की इन कोशिशों की मुकामी लोग, वारकरी और अलग-अलग सामाजिक संगठन हमेशा तारीफ करते हैं। उनकी इस निस्वार्थ खिदमत और संतों के विचारों की विरासत को सहेजने वाली इन कोशिशों को पूरे महाराष्ट्र का सलाम है।