एक शिक्षक ने सरकारी स्कूल में बना दी ‘मैथ्स वर्ल्ड

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 29-08-2026
A government school teacher's unique success story: From a dream to a 'Maths World'
A government school teacher's unique success story: From a dream to a 'Maths World'

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

कहते हैं कि अगर एक शिक्षक ठान ले, तो वह सिर्फ बच्चों का भविष्य ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की दिशा बदल सकता है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक याकूब एस. कोय्यूर ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया। उन्होंने सीमित संसाधनों वाले एक साधारण सरकारी स्कूल में ऐसा अनोखा ‘मैथ्स लैब’ बनाया, जिसने बच्चों के लिए गणित को डर नहीं, बल्कि दिलचस्पी और खुशी का विषय बना दिया।

पढ़ाई का सफर आसान नहीं था

याकूब एस. कोय्यूर का जन्म कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के कोय्यूर गांव में हुआ। उनके परिवार में कई भाई-बहन थे, लेकिन उनमें से हाई स्कूल तक पढ़ाई करने का मौका पाने वालों में याकूब अकेले थे।
 
 
उन्होंने एसडीएम कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने करीब दो साल तक स्थानीय सरकारी हाई स्कूल में बच्चों को पढ़ाया। यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली सपना शिक्षक बनना है।
 

उन्होंने मंगलुरु विश्वविद्यालय से बीएड की पढ़ाई की और दूसरा स्थान हासिल किया। साल 1996 में उन्होंने नाडा गांव के सरकारी हाई स्कूल में अपने शिक्षक जीवन की शुरुआत की।
 
4,000 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाया

अपने करीब 25 साल के शिक्षण सफर में याकूब ने 4,000 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाया। वह सिर्फ किताबों से पढ़ाने में विश्वास नहीं करते थे। खासकर पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए उन्होंने अलग और आसान तरीके से पढ़ाई की सामग्री तैयार की। उनका मानना था कि हर बच्चा सीख सकता है, जरूरत सिर्फ उसे सही तरीके से समझाने की होती है।
 
एक सपना, जिसने बदल दिया स्कूल

साल 2012 में याकूब कुछ नया करना चाहते थे। वह सोचते थे कि बच्चों के मन से गणित का डर कैसे खत्म किया जाए। एक रात उन्होंने एक अनोखा सपना देखा। सपने में उन्होंने स्कूल का एक कमरा देखा, जिसके बाहर लिखा था ‘Maths Lab’। कमरे की दीवारों पर रंग-बिरंगे नंबर, गणित के मॉडल और प्रेरणादायक बातें थीं।
 
 
सुबह उठते ही उन्होंने तय कर लिया कि वह इस सपने को सच करके रहेंगे। उन्होंने अपने सहकर्मियों और छात्रों से इस विचार पर बात की। सभी को उनका आइडिया अच्छा लगा, लेकिन आर्थिक मदद मिलना आसान नहीं था। आखिर यह एक सरकारी स्कूल था और संसाधन भी बहुत सीमित थे।
 
पुराने छात्रों ने बढ़ाया हाथ

याकूब ने हार नहीं मानी। उन्होंने फेसबुक और व्हाट्सऐप के जरिए अपने पुराने छात्रों से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें अपने सपने के बारे में बताया और कहा कि स्कूल में एक अनोखी मैथ्स लैब बनाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है।
 
 
फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसने याकूब का हौसला और बढ़ा दिया।

सिर्फ एक दिन के भीतर पुराने छात्रों और शुभचिंतकों की मदद आनी शुरू हो गई। शुरुआत में करीब 3.5 लाख रुपये जुट गए। किसी ने कम रकम दी, किसी ने ज्यादा, लेकिन सबका मकसद एक ही था अपने पुराने शिक्षक के सपने को पूरा करना। परिवार के सहयोग और पुराने छात्रों की मदद से स्कूल के एक खाली कमरे को एक खास गणित की दुनिया में बदल दिया गया। याकूब ने इसका नाम रखा ‘Maths World’।
 
यहां गणित को छूकर और देखकर सीखते हैं बच्चे

यह कोई साधारण क्लासरूम नहीं था। मैथ्स लैब में बच्चों के लिए गणित को समझने के कई अलग-अलग तरीके मौजूद थे। यहां एक बड़ी स्मार्ट टीवी स्क्रीन लगाई गई, जिस पर याकूब के ‘Maths Magic’ चैनल के गणित से जुड़े वीडियो दिखाए जाते थे। चैनल पर सैकड़ों गणित विषयों से जुड़ी सामग्री तैयार की गई।
 
लैब में स्मार्ट बोर्ड और अलग-अलग गणितीय मॉडल भी रखे गए। बच्चे सिर्फ किताब पढ़कर या बोर्ड देखकर गणित नहीं सीखते थे, बल्कि मॉडल को छूकर, देखकर और खुद प्रयोग करके गणित के सिद्धांत समझते थे। याकूब बताते हैं कि बच्चों में मैथ्स लैब को लेकर इतनी उत्सुकता थी कि कई बार वे खेल के पीरियड में भी लैब देखने चले जाते थे।
 
मेहनत को मिले बड़े सम्मान

याकूब के इस अनोखे प्रयास को समाज और सरकार दोनों ने सराहा। उन्हें साल 2016 में बेस्ट डिस्ट्रिक्ट टीचर अवॉर्ड, 2018 में बेस्ट स्टेट टीचर अवॉर्ड मिला।इसके बाद साल 2020 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह देशभर के चुनिंदा शिक्षकों में शामिल थे, जिन्हें उनके विशेष योगदान के लिए सम्मान मिला।
 
 
 
अब सिर्फ मैथ्स लैब नहीं, पूरे स्कूल को बदलना है

याकूब का सपना केवल एक मैथ्स लैब बनाकर खत्म नहीं हुआ। वह अपने स्कूल को बच्चों के लिए एक बेहतर और संपूर्ण सीखने की जगह बनाना चाहते हैं। स्कूल के पास मौजूद जमीन पर हर्बल पौधे और सब्जियां उगाई जा रही हैं। उनका सपना स्कूल परिसर को और हरा-भरा बनाने का है। वह एक आधुनिक लाइब्रेरी और दूसरे विषयों के लिए भी नई लैब बनाना चाहते हैं। उनकी पहल से दूसरे शिक्षक भी प्रेरित हुए। उनके एक साथी शिक्षक ने भी बच्चों के लिए आधुनिक स्मार्ट क्लास तैयार की।
 
असली सफलता क्या है?

याकूब एस. कोय्यूर मानते हैं कि शिक्षक का काम सिर्फ बच्चों को परीक्षा पास कराना नहीं है। असली शिक्षा वह है, जो बच्चों को अच्छा इंसान बनाए और उन्हें समाज को कुछ वापस देने के लिए प्रेरित करे। एक साधारण सरकारी स्कूल से शुरू हुआ याकूब का यह सफर आज हजारों शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रेरणा है।
 

याकूब एस. कोय्यूर की कहानी हमें सिखाती है कि बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। एक बड़ा सपना, सच्ची मेहनत और लोगों का साथ मिल जाए, तो सरकारी स्कूल का एक खाली कमरा भी बच्चों के भविष्य को रोशन करने वाली ‘मैथ्स वर्ल्ड’ बन सकता है।