Mohammad Jabir from Kargil: Won the National Teachers Award for his unique teaching style
अर्सला खान/नई दिल्ली
कहते हैं कि एक अच्छा शिक्षक सिर्फ किताब नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों को समझकर उनके सीखने का रास्ता आसान बनाता है। कारगिल के रहने वाले मोहम्मद जाबिर ने भी यही करके दिखाया। उन्होंने बच्चों की मनोविज्ञान को समझा, स्थानीय संस्कृति को अपनी पढ़ाई का हिस्सा बनाया और अंग्रेजी व पर्यावरण अध्ययन को बच्चों के लिए आसान और मजेदार बना दिया। उनके इसी अनोखे शिक्षण तरीके के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया।
सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर
मोहम्मद जाबिर कारगिल जिले के पशक्यूम गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से पूरी की। 12वीं के बाद उन्होंने एक निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया।
लेकिन जाबिर यहीं नहीं रुके। पढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीए किया। इसके बाद बेहतर शिक्षक बनने के लिए उन्होंने बीएड और एमएड की पढ़ाई कश्मीर विश्वविद्यालय से की। उन्होंने मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी से एमए और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में एमफिल भी किया। जाबिर ने अपनी पढ़ाई के दौरान लगातार मेहनत की और कई परीक्षाओं में सफलता हासिल की।
उन्होंने यूजीसी-नेट एजुकेशन, जेके-सेट इंग्लिश और सीटीईटी भी पास किया। इतना ही नहीं, आरआईई चंडीगढ़ के अंग्रेजी शिक्षण कोर्स में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया।
20 साल से बच्चों को दे रहे हैं नई सीख
मोहम्मद जाबिर पिछले करीब 20 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इनमें 11 साल से अधिक समय उन्होंने सरकारी शिक्षक के रूप में सेवा करते हुए बिताए हैं।
उन्होंने कई स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया और बाद में कारगिल के सरकारी मिडिल स्कूल करित में अपनी सेवाएं दीं। वह सिर्फ स्कूल के शिक्षक नहीं हैं, बल्कि इग्नू के बीएड कोर्स के इन-सर्विस अकादमिक काउंसलर के रूप में भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शोध भी किया है। उनके सात शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं।
बच्चों की शादी के गानों की धुन से पढ़ाई
मोहम्मद जाबिर का सबसे खास तरीका है बच्चों की दुनिया को समझकर पढ़ाना। कारगिल में सितंबर और अक्टूबर के महीने में शादी का मौसम होता है। शादी में शामिल होने के बाद बच्चे, खासकर छात्राएं, कई दिनों तक शादी के गीत और धुनें गुनगुनाती रहती हैं। जाबिर ने बच्चों की इसी रुचि को पढ़ाई से जोड़ दिया।
वह अंग्रेजी की कविताओं और गद्य को स्थानीय और परिचित धुनों में पढ़ाने लगे। इससे बच्चों को अंग्रेजी मुश्किल नहीं लगी और वे मजे से सीखने लगे।
ताली बजाते-बजाते सीख ली अंग्रेजी
एक दिन जाबिर ने बच्चों को एक खास लय में गाते हुए सुना। उस लय को देखकर उन्होंने सोचा कि क्यों न इसी तरीके को पढ़ाई में इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने तालियां और लय के साथ बच्चों को अंग्रेजी के शब्द, उच्चारण, व्याकरण और शब्दावली सिखाना शुरू किया। बच्चों को यह तरीका इतना पसंद आया कि पढ़ाई उनके लिए खेल जैसी बन गई। जाबिर मानते हैं कि बच्चे को उसकी पसंद और उसके मनोविज्ञान के अनुसार पढ़ाया जाए तो मुश्किल से मुश्किल विषय भी आसान हो सकता है।
वीडियो देखकर बच्चे खुद सुधारते हैं अपनी गलतियां
जाबिर ने बच्चों की पढ़ने की क्षमता सुधारने के लिए भी एक अनोखा तरीका अपनाया। उनकी कक्षा में एक पोडियम रखा गया है। बच्चे उस पर खड़े होकर किताब पढ़ते हैं और जाबिर उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं। बाद में पूरी कक्षा में वह वीडियो दिखाई जाती है। इससे बच्चा खुद को पढ़ते हुए देखता है और अपनी गलतियों को पहचानता है। फिर वह खुद ही अपनी पढ़ने की क्षमता सुधारने की कोशिश करता है। यह तरीका बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ाता है और उन्हें अपनी कमियों को पहचानने का मौका भी देता है।
22 नए तरीकों से बदल दी पढ़ाई
मोहम्मद जाबिर ने बच्चों को पढ़ाने के लिए करीब 22 नए और अलग तरीके अपनाए हैं। इनमें ताली बजाकर पढ़ाई, स्थानीय धुनों में सीखना, अंग्रेजी बोलने का अभ्यास, भाषा के खेल, नारे के जरिए पढ़ाना, खुले वातावरण में कक्षा लेना, कहानी का रोल प्ले करना और पढ़ने की प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं दी। जहां इंटरनेट की सुविधा सीमित थी, वहां उन्होंने व्हाट्सऐप क्लासरूम, ऑफलाइन नोट्स और ऑनलाइन असेसमेंट जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया। वह बच्चों को नोट्स देते समय कर्सिव राइटिंग का भी इस्तेमाल करते हैं, ताकि उनकी लिखावट साफ और एक जैसी बन सके।
शिक्षक भी सीखें, इसलिए देते हैं प्रशिक्षण
मोहम्मद जाबिर सिर्फ बच्चों को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि दूसरे शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देते हैं। वह शिक्षकों को यह समझाने की कोशिश करते हैं कि पढ़ाना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि खुशी का काम भी हो सकता है। उनका मानना है कि जब शिक्षक खुशी और उत्साह के साथ पढ़ाएगा, तभी बच्चे भी खुशी के साथ सीखेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से मिला सम्मान
मोहम्मद जाबिर की मेहनत और नए तरीकों को देशभर में पहचान मिली। साल 2022 में उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एक छोटे से गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पाने वाले शिक्षक तक का उनका सफर आज कई लोगों के लिए प्रेरणा है।
मोहम्मद जाबिर की सफलता बताती है कि अच्छी शिक्षा के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। जरूरत होती है बच्चों को समझने की। कभी बच्चों की पसंदीदा धुन में पढ़ाई कराना, कभी तालियां बजाकर अंग्रेजी सिखाना और कभी बच्चे को उसकी अपनी वीडियो दिखाकर गलती सुधारने का मौका देना यही छोटे-छोटे प्रयोग एक शिक्षक को खास बनाते हैं।