आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले एक साल में 65 किग्रा भार वर्ग में लगभग अजेय रहे भारतीय पहलवान सुजीत कलकल स्वयं को अपना आदर्श और जीत का प्रबल दावेदार मानते हैं लेकिन इसके साथ ही वह एलीट वर्ग की प्रतियोगिताओं में परिणाम को लेकर अनिश्चितता क प्रति भी जागरुक हैं।
सुजीत ने जून 2025 में अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में मिली जीत के बाद से सीनियर विश्व चैंपियनशिप को छोड़कर प्रत्येक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने हाल में बिश्केक में सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। उनका मानना है कि प्रदर्शन में निरंतरता और आत्मविश्वास उनकी सफलता की कुंजी रहे हैं।
सुजीत ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘‘मैं किसी खास व्यक्ति का अनुसरण नहीं करता। मुझे अपने मुकाबले देखना पसंद हैं, वह भी विशेषकर रविवार को। आप कह सकते हैं कि मैं खुद को अपना आदर्श मानता हूं।’’
सुजीत भले ही किसी विशेष पहलवान को अपना आदर्श नहीं मानते, लेकिन वह योगेश्वर दत्त, बजरंग पूनिया और अमित धनकड़ जैसे दिग्गज पहलवानों की प्रशंसा करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं योगेश्वर दत्त और अन्य पहलवानों को देखता था। उनसे सहनशक्ति, गति और ताकत जैसी कई चीजें सीखने को मिलती हैं, लेकिन मैं अधिकतर अपने मुकाबलों का विश्लेषण करता हूं। हमारा कार्यक्रम व्यस्त रहता है, लेकिन रविवार या विश्राम के दिनों में मैं अपने और सीनियर पहलवानों के मुकाबले देखता हूं। इससे गलतियों की पहचान करने और उनमें सुधार करने में मदद मिलती है।’’
सुजीत ने 65 किग्रा में अपने दबदबे के बावजूद यह मानने से इनकार कर दिया कि इस वजन वर्ग में उनका पूर्ण नियंत्रण है। उनसे पहले ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया इस भार वर्ग में भाग लेते थे।