A mother's last thirst and a son's pain: The untold story of Arshad Warsi
अर्सला खान/नई दिल्ली
मुंबई की चकाचौंध में जब Arshad Warsi मुस्कुराते नजर आते हैं, तो शायद ही कोई उनके भीतर छिपे उस दर्द को महसूस कर पाता है, जो सालों से उनके साथ चलता आ रहा है। उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी जिंदगी का वह हिस्सा फिर सामने आता है, जिसे वह कभी पूरी तरह भुला नहीं सके।
अरशद वारसी का बचपन सामान्य नहीं था। बहुत कम उम्र में ही उन्हें जिंदगी की कठिन सच्चाइयों से सामना करना पड़ा। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इसी बीच उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हो गईं। घर में इलाज के सीमित साधन थे और हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे थे।
कहानी का सबसे दर्दनाक मोड़ वहीं आता है, जब उनकी मां अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर थीं। डॉक्टरों ने साफ कहा था कि उन्हें पानी नहीं देना है। उनका शरीर उस हालत में नहीं था कि वह उसे सह सके। यह सलाह एक मेडिकल मजबूरी थी, लेकिन एक बेटे के लिए यह किसी सजा से कम नहीं थी।
बताया जाता है कि उस वक्त उनकी मां बार-बार पानी मांग रही थीं। एक मां, जो अपने बेटे को देख रही थी, अपनी आखिरी प्यास बुझाना चाहती थी। लेकिन अरशद के सामने एक असंभव फैसला था। डॉक्टर की बात मानें या मां की आखिरी इच्छा पूरी करें।
उन्होंने डॉक्टर की सलाह मानी। उन्होंने अपनी मां को पानी नहीं दिया। कुछ ही समय बाद उनकी मां इस दुनिया से चली गईं। यह एक ऐसा पल था, जिसने अरशद वारसी के भीतर एक गहरी छाप छोड़ दी। वक्त आगे बढ़ गया, जिंदगी बदल गई, लेकिन वह एक सवाल उनके भीतर हमेशा जिंदा रहा। क्या उन्होंने सही किया। क्या उन्हें मां को पानी दे देना चाहिए था।
यही सवाल धीरे-धीरे एक गिल्ट में बदल गया। एक ऐसा गिल्ट, जिसे उन्होंने कई बार इंटरव्यू में महसूस भी किया। उन्होंने कहा कि वह उस पल को कभी भूल नहीं पाए। उन्हें लगता है कि शायद वह अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी नहीं कर सके।
मां के जाने के बाद जिंदगी और भी कठिन हो गई। कुछ समय बाद उनके पिता का भी निधन हो गया। एक किशोर उम्र का लड़का अचानक पूरी तरह अकेला हो गया। पढ़ाई छूट गई। पेट भरने के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़े। कभी घर-घर जाकर सामान बेचना, कभी छोटी नौकरियां करना। हर दिन एक संघर्ष था। लेकिन इन सबके बीच उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया।
धीरे-धीरे उन्होंने डांस की दुनिया में कदम रखा। मेहनत की। पहचान बनाई। और फिर फिल्मों का रास्ता खुला। जब उन्होंने अभिनय शुरू किया, तो उनकी सहजता और टाइमिंग ने लोगों का दिल जीत लिया। Munna Bhai M.B.B.S. में उनका “सर्किट” का किरदार आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। लेकिन शायद ही कोई जानता है कि उस मुस्कान के पीछे कितनी पीड़ा छिपी है।
अरशद वारसी की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं है। यह उस बेटे की कहानी है, जिसने अपनी मां के आखिरी क्षणों में एक ऐसा फैसला लिया, जो आज भी उसे भीतर से कचोटता है। यह उस इंसान की कहानी है, जिसने दर्द को अपने भीतर समेटकर भी दुनिया को हंसाया। उनका जीवन यह भी सिखाता है कि कुछ फैसले सही या गलत नहीं होते, वे सिर्फ हालात की मजबूरी होते हैं। लेकिन उनका असर इंसान के दिल पर हमेशा रहता है।
आज उनके जन्मदिन पर, जब लोग उन्हें बधाई देते हैं और उनकी फिल्मों को याद करते हैं, तब यह भी याद रखना जरूरी है कि हर मुस्कान के पीछे एक कहानी होती है। अरशद वारसी की मुस्कान के पीछे उनकी मां की याद और एक अधूरी प्यास हमेशा जिंदा रहेगी।